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बड़ी टेक कंपनियों के छोटे सेंटर्स पर शोषण!:सिलिकॉन वैली से उलट हालात, नौकरी सुरक्षित नहीं, भेदभाव-प्रताड़ना के आरोप

2 महीने पहलेलेखक: एलाना सैमुअल्स
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प्राइनविले, ऑरेगन में स्थित फेसबुक का डेटा सेंटर। यहां कर्मचारियों के शोषण की कई शिकायतें हैं। - Dainik Bhaskar
प्राइनविले, ऑरेगन में स्थित फेसबुक का डेटा सेंटर। यहां कर्मचारियों के शोषण की कई शिकायतें हैं।
  • दिग्गजों की स्थिति- गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, एपल और अमेजन ने हजारों जॉब कांट्रेक्टिंग कंपनियों को दे रखे हैं

नील मेकनाली बिजली सप्लाई कंपनी के एक वेयरहाउस में काम करते थे। उन्हें, गूगल के काउंसिल बफ्स, आयोवा सेंटर में काम करने का ऑफर मिला। उनका वेतन वेयरहाउस के समान रहता। फिर भी, वे अमेरिका की सबसे अधिक कीमती कंपनियों में शामिल गूगल में जाने के लिए फौरन तैयार हो गए। लेकिन, जिस कंपनी ने मेकनाली को भर्ती किया, वह गूगल नहीं बल्कि मोदीज इंजीनियरिंग है।

मोदीज ने देशभर में गूगल के सेंटरों में हजारों कर्मचारियों को ठेके पर नौकरी दे रखी है। गूगल के समान अमेरिका की अन्य बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों ने छोटे शहरों में कई दफ्तर और सेंटर खोल रखे हैं। इन कंपनियों ने कम वेतन देने वाले कांट्रेक्टरों की सेवाएं ले रखी हैं। ये कर्मचारियों का जमकर शोषण करते हैं।

मेकनाली को तीन माह के कांट्रेक्ट पर रखा गया। उन्हें नौकरी शुरू करने के बाद पता लगा कि गूगल ने उस सेंटर में दो साल से अधिक समय से किसी को स्थायी नहीं किया है। वे बताते हैं, कर्मचारी अगर अच्छा काम करते हैं तब भी उनकी छंटनी हो जाती है। कई कांट्रेक्टर तो एक माह से ज्यादा नौकरी की गारंटी नहीं देते हैं। कुछ कांट्रेक्टिंग कंपनियों पर कर्मचारियों से गलत व्यवहार करने के आरोप हैं। सिलिकॉन वैली में टेक कंपनियों के कर्मचारियों को जैसा वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, वैसा कुछ भी छोटे शहरों में स्थित सेंटरों में नहीं हैं।

आप जब हर बार कोई ई-मेल भेजते हैं या फोटो स्टोर करते हैं या क्लाउड पर कुछ सेव करते हैं तो आप गूगल के काउंसिल ब्लफ जैसे डेटा सेंटर पर निर्भर कर रहे होते हैं। रेफ्रिजरेटर और कार जैसे प्रोडक्ट में वाई फाई का उपयोग होने के कारण डेटा सेंटरों की मांग बढ़ी है। दुनियाभर में 2020 में 600 हाइपर स्केल डेटा सेंटर थे। आधे से अधिक हाइपर स्केल सेंटर अमेजन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के हैं। ऑनलाइन काम बढ़ने के साथ टेक कंपनियों का काम बढ़ रहा है। तीनों कंपनियों की हर साल डेटा सेंटर खोलने की योजना है।

फेसबुक ने प्राइनविले, ऑरेगन डेटा सेंटर के विस्तार पर 15 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। ऑरेगन लेबर ब्यूरो के अनुसार डेटा सेंटर के संबंध में कर्मचारियों की ओर से कई शिकायतें आई हैं। सेंटर के सिक्योरिटी कांट्रेक्टर जी4एस को नस्ली भेदभाव के पांच मामलों के लिए चार करोड़ रुपए से अधिक हर्जाना देना पड़ा है। समय पर वेतन न देने की भी शिकायतें हैं। कर्मचारियों ने जी4एस के खिलाफ 2017, 2018 और 2019 में वेतन न देने के दावे दायर किए थे। ऑरेगन में अमेजन के डेटा सेंटर में जी4एस की एक महिला सिक्योरिटी गार्ड ने सुपरवाइजर के खिलाफ यौन प्रताड़ना की शिकायत की है।

ऑरेगन में डेटा सेंटरों का अध्ययन करने वाली कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर जेना बरेल कहती हैं, टेक कंपनियां बहुत सारे जॉब कांट्रेक्ट पर दे रही हैं। डेटा सेंटर कंप्यूटर उपकरणों को ठंडा रखने के लिए बहुत ज्यादा पानी का इस्तेमाल करते हैं। फिर भी, अमेरिका के सूखा ग्रस्त पश्चिमी इलाकों में सेंटर खुल रहे हैं।

अरबों का मुनाफा फिर भी करों से छूट
महामारी में दूसरे कारोबार प्रभावित हुए पर टेक्नोलॉजी कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है। इस समय गूगल का मूल्य लगभग 15 लाख करोड़ रुपए है। यह 2019 से दोगुना है। पिछले सप्ताह उसने रिकॉर्ड 1.37 लाख करोड़ रुपए के मुनाफे की जानकारी दी है। एपल ने पिछली तिमाही में 1.61 लाख करोड़ रुपए कमाए हैं। इस दौरान माइक्रोसॉफ्ट की आय 1.22 लाख करोड़ रुपए रही। यह पिछले साल इस अवधि से 47% अधिक है। टेक कंपनियों की संपत्ति में स्थानीय सरकारों की हिस्सेदारी नहीं है। मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग सहित अन्य सेक्टरों में नौकरियां कम होने की वजह से राज्यों के बीच टेक कंपनियों को छूट देने की होड़ मची है।