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चीन में प्रदूषण ने बढ़ाया खतरा:बीजिंग में धुंध की वजह से 200 मीटर हुई विजिबिलिटी; सड़कें और स्कूल के खेल मैदान बंद

बीजिंग23 दिन पहले
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बीजिंग में शुक्रवार को विजिबिलिटी का लेवल 200 मीटर से भी कम हो गया। - Dainik Bhaskar
बीजिंग में शुक्रवार को विजिबिलिटी का लेवल 200 मीटर से भी कम हो गया।

चीन की राजधानी में प्रदूषण की वजह से हालात खराब होते जा रहे हैं। शुक्रवार को यहां विजिबिलिटी महज 200 मीटर और कई इलाकों में तो इससे भी कम हो गई। इसके बाद कुछ अहम सड़कों को बंद कर दिया गया। स्कूलों में बच्चों को प्लेग्राउंड्स में जाने से रोक दिया गया। चीन सरकार की तरफ से अब तक इन हालात पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसी हफ्ते COP26 क्लाइटमेट समिट के दौरान कोयले से बिजली बनाने को लेकर काफी चिंता जताई गई थी। चीन में शुक्रवार को प्रदूषण और स्मोग की वजह यही कोयला माना जा रहा है।

हाईवे और स्कूल के मैदान सूने
शुक्रवार को बीजिंग में अफसरों ने साफ कर दिया कि धुंध और जहरीली हवा के चलते राजधानी के तमाम बड़े हाईवे और स्कूल प्लेग्राउंड्स बंद किए जा रहे हैं। विजिबिलिटी कम होकर 200 मीटर तक दर्ज की गई। कुछ इलाकों में तो यह इससे भी काफी कम हो गई थी। इसके बाद हाईवेज को सबसे पहले बंद किया गया। ‘बैंकॉक पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में अगर यह खतरा कम नहीं हुआ तो कुछ दिनों के लिए स्कूल बंद भी किए जा सकते हैं।

क्या है वजह
पिछले महीने लगातार इस तरह की रिपोर्ट्स आईं कि चीन में बिजली की कमी हो रही है और यह सदी के सबसे बड़े बिजली संकट का सामना कर रहा है। इसके बाद कोयले के जरिए इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन को काफी तेज किया गया। इसकी वजह से पॉल्यूशन लेवल भी तेजी से बढ़ा और आसमान काले होते चले गए। कोल प्रोडक्शन बढ़ने से दिक्कतें कुछ ज्यादा ही हो गईं।

चीन पर कोयले से बिजली उत्पादन कम करने को लेकर पूरी दुनिया का दबाव है, लेकिन उसने अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए। हालात ये हैं कि पिछले दिनों ग्लास्गो में जो क्लाइमेट समिट हुई, उसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल ही नहीं हुए। उन्हें वीडियो लिंक से जुड़ना था, लेकिन वो इसके जरिए भी शामिल नहीं हुए। रस्म अदायगी के तौर पर उन्होंने सिर्फ एक बयान जारी कर दिया।

बीजिंग में शुक्रवार को धुंध के बीच एक परिवार।
बीजिंग में शुक्रवार को धुंध के बीच एक परिवार।

सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैसें
चीन दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करता है। इन्हीं की वजह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है। हाल के महीनों में यह काफी तेजी से हो रहा है। चीन को इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

खास बात यह है कि सब कुछ सामने होने के बाद भी चीन सरकार इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। उसने एक बयान में कहा कि खराब मौसम की वजह से यह हालात पैदा हुए हैं। फरवरी में यहां विंटर ओलिंपिक्स होने हैं और इसके पहले ये हालात परेशान करने वाले हैं। अमेरिकी दूतावास ने बीजिंग के वातावरण को खतरनाक बताया है।

कैसे पूरे करेगा वादा
चीन में शुक्रवार को पीएम लेवर 2.5 हो गया था। इसका अर्थ यह हुआ कि ये फेफड़ों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अफसरों के मुताबिक, ये हालात शनिवार शाम तक बने रह सकते हैं। चीन ने इस हफ्ते की शुरुआत में दस लाख टन कोयला उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया था। उसने दुनिया से वादा किया है कि वो 2060 तक नेट जीरो एमिशन का लक्ष्य पूरा कर लेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बुधवार को COP26 समिट में हिस्सा न लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना की थी। बाइडेन ने कहा था- अब बातों से काम नहीं चलेगा, हम सख्त और प्रभावी कदम उठाने होंगे। चीन की ऊर्जा जरूरतों का 60% कोयले से आता है।