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नाइजर / आतंकी हमले में 73 सैनिक मारे गए, मिस्र गए राष्ट्रपति महामदू दौरा बीच में छोड़कर लौटे

अधिकारियों ने पश्चिम अफ्रीकी देश की सेना पर हुए अब तक सबसे घातक हमला बताया। अधिकारियों ने पश्चिम अफ्रीकी देश की सेना पर हुए अब तक सबसे घातक हमला बताया।
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अधिकारियों ने पश्चिम अफ्रीकी देश की सेना पर हुए अब तक सबसे घातक हमला बताया।अधिकारियों ने पश्चिम अफ्रीकी देश की सेना पर हुए अब तक सबसे घातक हमला बताया।

  • पश्चिमी नाइजर में यह हमला माली सीमा के पास हुआ, घटना के बाद माली की सेना ने अपने ठिकानों को हटा लिया है
  • कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि हमले का मकसद जिहादियों के नियंत्रण वाले क्षेत्र का विस्तार करना है 

Dainik Bhaskar

Dec 12, 2019, 04:35 PM IST

नियामे. संदिग्ध इस्लामिक आतंकियों ने पश्चिम नाइजर में मंगलवार को एक सैन्य चौकी पर हमला किया। इसमें 73 सैनिक मारे गए हैं। सेना की चौकी माली सीमा के पास स्थित है। पश्चिम अफ्रीकी देश के रक्षा विभाग ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, इस इलाके में अलकायदा और इस्लामिक आतंकियों द्वारा हमला किया जाता रहा है।

फ्रांस में होने वाले शिखर सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले यह हमला हुआ है। सम्मेलन में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पश्चिम अफ्रीकी नेताओं के साथ सहेल क्षेत्र में फ्रांसीसी सेना की भूमिका पर चर्चा करने वाले थे। बुधवार देर रात राष्ट्रपति महामदू इसूफू ने ट्वीट किया- मैं नाइजर की सीमा के पास हुए घटनाक्रम के बाद मिस्र की विदेश यात्रा से लौट आया।

जिहादी लंबे समय से नाइजर में सक्रिय

राष्ट्रपति के एक सलाहकार ने कहा कि यहां जिहादी लंबे समय से सक्रिय हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जिहादियों का मकसद उनके नियंत्रण वाले क्षेत्र का विस्तार करना है। बढ़ती असुरक्षा को देखते हुए माली की सेना ने सीमा के पास स्थित अपने ठिकानों को हटा लिया है।

नाइजर और फ्रांस की सेना हिंसा रोकने में नाकाम

जहां हमला हुआ, वह इलाका नाइजर के उआलम शहर से 45 किमी दूर है। यहां दो साल पहले एक हमले में चार नाइजीरियन सैनिकों के साथ चार अमेरिकी अधिकारी मारे गए थे। इस्लामी कट्टरपंथी लंबे समय से इस इलाके में विदेशियों को अगवा और लोकप्रिय स्थानों को निशाना बनाते रहे हैं। क्षेत्रीय सैन्य बल और फ्रांसीसी सेना हिंसा को रोकने में विफल रहे हैं। नाइजर, माली समेत कई अफ्रीकी देशों में इस्लामिक कट्टरपंथ से लड़ने के लिए फ्रांस ने अपनी सेना तैनात की है।

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