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ओमिक्रॉन का खतरा:साउथ अफ्रीका में सिर्फ 24% वैक्सीनेशन, अब पूरे देश में नए वैरिएंट का खतरा

केपटाउन2 महीने पहले
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साउथ अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से दुनिया परेशान है। 13 देशों ने कम्पलीट ट्रैवल बैन कर दिया है। दो सवाल अहम हैं। पहला- यह वैरिएंट कितना खतरनाक है। दूसरा- क्या मौजूदा वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ इफेक्टिव रहेंगी। इन सवालों के बीच, साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति कह रहे हैं कि यूरोप और खासतौर पर ब्रिटेन ने जानबूझकर दहशत फैला रहा है। उन्होंने साउथ अफ्रीका और इस महाद्वीप के दूसरे देशों पर लगे ट्रैवल बैन को भी गलत बताया। साउथ अफ्रीका में वैक्सीनेशन की रफ्तार भी बेहद धीमी है। यहां अब तक सिर्फ 24% लोग ही वैक्सीनेट हो पाए हैं।

दुनिया के लिए तो वैरिएंट ऑफ कंसर्न
साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा दो हफ्ते से चल रहे बवाल के बीच पहली बार जनता के सामने आए। कहा- दुनिया हमारे खिलाफ जिस तरह के प्रतिबंध लगा रही है, उससे मैं बहुत निराश हूंं। हमारे खिलाफ जो ट्रैवल बैन लगाए गए हैं, उन्हें फौरन हटाया जाना चाहिए। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन ने जो कदम उठाएं हैं, वे सही नहीं हैं।

रामफोसा चाहे जो कहें। दो बातें बिल्कुल सही हैं। पहली- उनकी सरकार ने वैक्सीनेशन पर फोकस नहीं किया। दूसरी- अगर उनकी हेल्थ मिनिस्ट्री को दो महीने पहले इस वैरिएंट का पता लग गया था तो उसने ये डाटा WHO से शेयर क्यों नहीं किया।

कई देशों ने अफ्रीकी देशों से आने वाले लोगों पर बैन लगा दिया है।
कई देशों ने अफ्रीकी देशों से आने वाले लोगों पर बैन लगा दिया है।

अब पूरा देश चपेट में
इस वैरिएंट का पहला मामला देश के सबसे ज्यादा घनी आबादी वाले राज्य गुटैंग में मिला था। कहा जा रहा है कि यह केस 9 नवंबर को सामने आया था। अब देश के तमाम हिस्सों और पड़ोसी देशों में ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीज मिल रहे हैं।

रामफोसा ओमिक्रॉन को वेक-अप कॉल यानी अलर्ट हो जाने के लिए कह रहे हैं। उनका कहना है कि दुनिया में वैक्सीनेशन को लेकर समानता नहीं है। इसकी वजह से यह वैरिएंट सामने आया। वो ये भूल जाते हैं कि उनके देश में 62% आबादी के लिए वैक्सीन मौजूद थे, लेकिन सिर्फ 24% लोगों ने ही वैक्सीन लगवाई। इसके बावजूद सरकार इसे अनिवार्य या मेंडेटरी नहीं करना चाहती।

बोत्सवाना ने डराया
साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, बोत्सवाना, ब्रिटेन, डेनमार्क, जर्मनी, हॉन्ग कॉन्ग, इजराइल, इटली, नीदरलैंड, फ्रांस, कनाडा और चेक रिपब्लिक समेत 13 से अधिक देशों में ओमिक्रॉन के मामले सामने आ चुके हैं। चिंता की बात ये है कि बोत्सवाना में सामने आए चारों मामले पूरी तरह से वैक्सीनेटेड लोगों में सामने आए हैं।

बोत्सवाना में मिले ओमिक्रॉन के चारों केस ऐसे लोगों में सामने आए हैं जिन्हें कोरोना की दोनों डोज लग चुकी थी। यानी नया वैरिएंट वैक्सीनेटेड लोगों को भी संक्रमित कर रहा है।

वैक्सीन कंपनियों ने कहा है कि वे इस वैरिएंट पर रिसर्च कर रही हैं।
वैक्सीन कंपनियों ने कहा है कि वे इस वैरिएंट पर रिसर्च कर रही हैं।

इन देशों में खतरा ज्यादा
साउथ अफ्रीका
बोत्सवाना
लेसोथो
स्वातिनी
जिम्बॉव्बे
नामीबिया
अंगोला
मोजाम्बिक
मलावी
जाम्बिया

जोहान्सबर्ग के एक लैब में काम करता टैक्नीशियन।
जोहान्सबर्ग के एक लैब में काम करता टैक्नीशियन।

36 घंटे में वैरिएंट का पता लगाया
डर्बन में नेल्सन मंडेला स्कूल ऑफ मेडिसिन के जीन स्पेशलिस्ट तुलियो डी ओलिवेरिया के मुताबिक, साउथ अफ्रीकी साइंटिस्ट्स ने इस मामले में बहुत तेजी से अपने काम को अंजाम दिया। ओलिवेरिया ने कहा- हमारी टीम ने इस मामले में काफी तेजी से काम किया। हमारे सामने 100 केस ऐसे आए थे, जिनको देखकर लगता था कि इनके लक्षण कुछ अलग हैं। टीम ने महज 36 घंटे में पता लगाया कि ये नया वैरिएंट है और तेजी से म्यूटेट हो रहा है।

अब फाइजर, बायोएनटेक और मॉडर्ना जैसे लीडिंग वैक्सीन कंपनियां यह पता लगाने में जुट गईं हैं कि उनकी वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ कितनी कारगर हैं। कुछ देश बूस्टर डोज पर विचार कर रहे हैं।