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कोरोना वैक्सीन का कवच तैयार:साउथ अफ्रीका की कंपनी ने वैक्सीन के लिए बनाया हीलियम कूल्ड केस, बिना पावर सप्लाई -150 तक तापमान रहेगा

केपटाउन6 महीने पहले
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साउथ अफ्रीका में ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल का पहला दौर शुरू हो चुका है। यहां अब तक कोरोना के 8 लाख 28 हजार 598 मरीज मिले हैं। - Dainik Bhaskar
साउथ अफ्रीका में ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल का पहला दौर शुरू हो चुका है। यहां अब तक कोरोना के 8 लाख 28 हजार 598 मरीज मिले हैं।

साउथ अफ्रीका की कंपनी रेनर्जेन ने वैक्सीन रखने के लिए हीलियम कूल्ड केस तैयार किया है। कंपनी का दावा है कि बिना पावर सप्लाई के इसमें वैक्सीन को -70 से -150 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में रखा जा सकता है।इसमें वैक्सीन 30 दिन तक सेफ रहेगी। कंपनी ने यह टेक्नीक पेटेंट भी करा ली है।

कंपनी के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर स्टेफेनो मेरानी ने बताया कि इस इनोवेशन की मदद से दूरदराज के इलाकों में वैक्सीन के डोज पहुंचाने का रास्ता खुल जाएगा। बुधवार को एक इंटरव्यू में मेरानी ने बताया कि रेनर्जेन का यह डिजाइन हीलियम की मदद से ठंडा रहता है। इसे अफ्रीका और साउथ ईस्ट एशिया में वैक्सीन ले जाने में इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां कोल्ड स्टोरेज के इंतजाम नहीं हैं।

अफ्रीका को ध्यान में रखकर डिजाइन बनाया

मेरानी का कहना है कि हमने यह डिजाइन अफ्रीका के मार्केट को ध्यान में रखकर बनाया है। यह वैक्सीन को फैक्ट्री से लोकल फार्मेसी तक ले जाने या इंट्रा सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए नहीं है। यह अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के लिए है, जहां लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन किसी चीज को कहीं पहुंचाने में बहुत ज्यादा वक्त लेती है।

फाइजर की वैक्सीन को -70 डिग्री टेम्प्रेचर की जरूरत

कोरोना वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन में सबसे बड़ी दिक्कत कोल्ड स्टोरेज सिस्टम की है। फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन को -70 डिग्री सेल्सियस में स्टोर करने की जरूरत होती है। इस वैक्सीन को ब्रिटेन और कनाडा में इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल मिल चुका है। मॉडर्ना की वैक्सीन को भी काफी ठंडे माहौल की जरूरत होती है। ऐसे में कई देशों की सरकारें वैक्सीन के लिए नया कोल्ड स्टोरेज सिस्टम तैयार कर रही हैं।

ड्राई आइस के मुकाबले हीलियम ज्यादा बेहतर

ये केस एल्यूमीनियम से बने हैं। इनमें वैक्सीन के कम से कम 100 डोज रखे जा सकते हैं। इसमें लिक्विड फार्म में हीलियम ड्राई आइस या लिक्विड नाइट्रोजन के मुकाबले ज्यादा देर तक वैक्सीन को ठंडा रखता है। रेनर्जेन दक्षिण अफ्रीका में अपना पहला कमर्शियल लिक्विड नैचुरल गैस प्लांट बना रही है। इसमें 2021 की तीसरी तिमाही में प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।

यहां हीलियम का प्रोडक्शन भी होगा। मेरानी ने कहा कि इसके बाद एक डिवाइस की ऑपरेटिंग कॉस्ट एक दिन के लिए प्रति डोज करीब लगभग पांच रुपए आएगी। कंपनी बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए पार्टनर की तलाश कर रही है।

अफ्रीका में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मरीज

अफ्रीका में कोरोना मरीजों की तादाद से बढ़ रही है। इलाज के इंतजाम दुरुस्त न होने से हालात ज्यादा बिगड़ रहे हैं। अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, यहां सितंबर से ही रोज मिलने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि, पूरे महाद्वीप में ऐसा नहीं हो रहा है।

दुनिया के छह करोड़ मरीजों में अफ्रीका की हिस्सेदारी महज 20 लाख है। साउथ अफ्रीका में अब तक कोरोना के 8 लाख 28 हजार 598 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 22 हजार 574 मरीजों की मौत हो गई। सात लाख 54 हजार 658 मरीज ठीक हो चुके हैं।

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