अमेरिका / सदर्न कैलिफोर्निया में हर 3 मिनट में आता है एक भूकंप, 9 साल में कम तीव्रता के 20 लाख झटके आए



दक्षिणी कैलिफोर्निया। दक्षिणी कैलिफोर्निया।
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दक्षिणी कैलिफोर्निया।दक्षिणी कैलिफोर्निया।

  • कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (सैन डिएगो) का सर्वे
  • रिपोर्ट कहती है कि इस इलाके में रोजाना 495 बार भूकंप आया

Dainik Bhaskar

Apr 22, 2019, 07:20 AM IST

वॉशिंगटन. एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी कैलिफोर्निया में हर 3 मिनट में एक भूकंप आता है। यह बात कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (सैन डिएगो) के अध्ययन में सामने आई है। सर्वे के दौरान पता चला कि दक्षिणी कैलिफोर्निया में 2008 से 2017 के बीच 20 लाख भूकंप आए थे, लेकिन इनकी तीव्रता 2.0 से लेकर 3.0 थी। इस वजह से लोगों को ये महसूस नहीं हुए। रिपोर्ट कहती है कि इस इलाके में रोजाना 495 बार भूकंप आया।

3.0 तीव्रता से ज्यादा का भूकंप ही पता चल पाता है

  1. यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक- आमतौर पर 3.0 तीव्रता से ज्यादा के भूकंप का ही पता चल पाता है। छोटी तीव्रता के भूकंप का पता लगाने में उन लोगों को भी परेशानी होती है, जो इसकी रिसर्च से जुडे़ हैं। 

  2. शोधकर्ताओं का कहना है कि भवन निर्माण की प्रक्रिया या फिर वाहनों से पैदा होने वाले शोर की वजह से छोटी तीव्रता के भूकंपों का पता नहीं चलता। छोटे भूकंपों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने टेंपल मैचिंग प्रक्रिया का सहारा लिया। हालांकि, सीस्मोलॉजी में यह तरीका 2006 से चलन में था, लेकिन हफ्ते में अक्सर दो बार ही इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। 

  3. रिसर्चर जाक रोज का कहना है कि टेंपल मैचिंग प्रक्रिया में डेटा का स्टोर करने में परेशानी होती है। इसके लिए बड़े कंप्यूटरों की जरूरत होती है। उनका कहना है कि छोटी तीव्रता वाले भूकंप का पता लगाने के लिए अब बड़े पैमाने पर डेटा को एकत्र किया जा रहा है। 

  4. इस डेटा से पता लगाया जा सकता है कि कैसे भूकंप आने की शुरुआत होती है। रोज का कहना है कि उनकी रुचि छोटे भूकंप के अध्ययन में इस वजह से थी, क्योंकि उनके रिकार्ड में बड़े भूकंप से जुड़ा डेटा नहीं था। उनका कहना है कि टेंपल मैचिंग ऐप कुछ सेकंड का समय देता है, ताकि बचाव के उपाय किए जा सकें।

  5. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की सीस्मोलॉजिस्ट मेरिन डेनोले का कहना है कि टेंपल मैचिंग से जो डेटा एकत्र हुआ है, वह भविष्य में होने वाली रिसर्च में मददगार साबित होगा। इसे लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। यह भूकंप का सबसे बड़ा कैटलॉग है। इससे हमें पता चलेगा कि भूकंप कहां से और कैसे आते हैं। इससे नए फाल्ट सिस्टम का भी पता चल सकेगा, जिसे हम अब तक नहीं देख पा रहे थे। 

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