श्रीलंका / ब्रिटिश एजेंसियां कह रहीं- ये क्राइस्टचर्च का बदला, खौफ दुनिया तक पहुंचे इसलिए बड़े होटलों पर हमले

Dainik Bhaskar

Apr 23, 2019, 10:07 AM IST



Sri Lanka bomb blast special British agencies calling it revenge of Christchurch attack
Sri Lanka bomb blast special British agencies calling it revenge of Christchurch attack
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Sri Lanka bomb blast special British agencies calling it revenge of Christchurch attack
Sri Lanka bomb blast special British agencies calling it revenge of Christchurch attack
Sri Lanka bomb blast special British agencies calling it revenge of Christchurch attack

  • 4 अप्रैल से हमले के 10 मिनट पहले तक चर्चों पर हमले के तीन इनपुट मिले थे
  • श्रीलंका के मंत्री बोले- सुरक्षा परिषद ने खुफिया विभाग की चिट्‌ठी के बाद भी अलर्ट नहीं किया 

ललित अल्लाहाकून श्रीलंका के सबसे बड़े मीडिया ग्रुप लेक हाउस के एडिटर इन चीफ

 

कोलंबो.  श्रीलंका थम सा गया है। तीन शहरों में रविवार को हुए आठ सीरियल ब्लास्ट की गूंज और उसका डर यहां के लोगों में साफ दिख रहा है। सुबह मैं अपने घर से दफ्तर आ रहा था। आज जितनी खाली यहां की सड़कें मुझे मिलीं, उतनी पिछले कई सालों में नहीं दिखी। सरकार और खुफिया तंत्र ने अपनी नाकामी मान ली है। देश के पुलिस प्रमुख ने इस्तीफा दे दिया है। आतंकी चर्च और पर्यटन स्थल पर हमला करने वाले हैं। विदेशियों खुफिया एजेंसियों से इसका इनपुट 4 अप्रैल को ही मिल गया था। हमले से एक दिन पहले भी वॉर्निंग जारी हुई थी और हमले से 10 मिनट पहले भी लोकल पुलिस को इनपुट मिले थे। तीन-तीन इनपुट के बाद भी कुछ नहीं किया गया। इस लापरवाही का हर्जाना लोगों की मौत के जरिए भुगतना पड़ रहा है। करीब 500 लोग अलग-अलग अस्पतालों में संघर्ष कर रहे हैं। 

 

इस हालात का जितना जिम्मेदार हमलावर आतंकी है, उससे कम जिम्मेदार यहां की सरकार भी नहीं है। भले ही श्रीलंका सरकार हमले के बाद अब एक्टिव नजर आ रही हो, एक के बाद एक कई मैराथन बैठकें कर रही हो, कई जगह जिंदा बम को डिफ्यूज किया हो, लेकिन यह फुर्ती हमला होने से पहले दिखाने की जरूरत थी। शायद 17-18 दिन पहले मिले इनपुट वार्निंग को गंभीरता से ले लिया गया होता तो हमले को होने से रोका या असर कम किया जा सकता था। एेसे में 27 साल के इस सबसे बड़े आतंकी धमाके की एक बड़ी जिम्मेदार सरकार भी है। 

 

राजनीतिक टकराव: मंत्रियों को भी नहीं दी गई हमले की जानकारी
श्रीलंका के मंत्री रजीता सेनारत्ने ने कहा कि प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे और उनके मंत्रियों तक को संभावित हमलों की जानकारी नहीं दी गई थी। उन्हें खुफिया विभाग की चिट्‌ठी के बारे में भी नहीं बताया गया। मंत्रियों को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठकों में नहीं बुलाया जाता। इन बैठकों का नेतृत्व राष्ट्रपति सिरिसेना करते हैं। सिरिसेना और प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे में मतभेद रहे हैं। सिरिसेना ने पिछले साल अक्टूबर में विक्रमसिंघे को हटाने की कोशिश भी की थी। मीडिया का कहना है कि विक्रमसिंघे हमले के एक दिन बाद सशस्त्र बलों के साथ मीटिंग करना चाहते थे, पर उनके घर पर कोई नहीं आ सका। वजह है कि उनके घर आने के लिए राष्ट्रपति सिरिसेना से अनुमति लेनी पड़ती है। 

 

घटना के 48 घंटे बाद फिलहाल यह तो तय हो गया है कि यह आतंकी हमला ही है। पुलिस श्रीलंका के ही आतंकी संगठन नेशनल तौहीद जमात को इस हमले का जिम्मेदार मान रही है। अब तक कई संदिग्धों को पकड़ा जा चुका है। ब्रिटिश एजेंसियों की तरफ से यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि यह सीरियल ब्लास्ट जैसे को तैसा जवाब देने के लिए कराया गया है। इंटलीजेंस इसे न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में पिछले महीने मस्जिद में हुए हमले के बदले के तौर पर भी देख रही है। 

 

करीब 48% क्रिश्चियन आबादी वाले न्यूजीलैंड में आतंकियों ने 1 फीसदी आबादी वाले मुस्लिमों की मस्जिद पर हमला किया था। इसके करीब एक महीने के बाद ही इस्लामिक चरमपंथियों ने श्रीलंका में 10% आबादी वाले क्रिश्चियन के चर्चों और होटलों पर हमला करके न्यूजीलैंड हमले का बदला ले लिया है। इसी थ्योरी के आधार पर चर्च को निशाना बनाने का यह सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। 

 

बच्चे चर्च जाने से घबरा रहे, बड़ों से पूछ रहे- गॉड कहां हैं? 
रविवार से घायलों की मदद में लगे शांता प्रसाद के मुताबिक मंजर देखना असहनीय था। उन्होंने 10 बच्चों को अस्पताल पहुंचाया। इनमें छह साल व आठ साल की दो बच्चियां भी थीं। शांता बताते हैं कि मुझे वो अपनी बेटियों जैसी लगीं। अगर समय पर इलाज नहीं मिलता तो वो नहीं बच पातीं। हमलों के बाद से मदद में लगे 52 साल के करुणारत्ने के मुताबिक उनके तीनों बच्चे बहुत डरे हुए हैं, उन्होंने टीवी पर सब देखा, अब वह चर्च जाने में भी घबरा रहे हैं। सवाल पूछते हैं, कि ये क्यों हो रहा है, आखिर गॉड कहां हैं? 

 

घटना के बाद हवाई टिकट और होटलों की बुकिंग कैंसिल हो रही 
कोलंबो के पांच सितारा होटलों पर भी फिदायीन हमले हुए हैं। शहर के इन होटलों में हाईप्रोफाइल विदेशी सैलानी ठहरते हैं। दुनियाभर में आतंकियों को अटेंशन मिले, इसलिए इन होटलों को भी निशाना बनाया गया। मरने वालों में करीब 39 लोग ऐसे हैं जो यूके, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, चीन और भारत जैसे देशों से यहां घूमने आए थे। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने देश में इमरजेंसी लगा दी है। सोमवार को भी कुछ धमाके हुए। हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। इन सारे धमाकों का असर लंबे समय तक श्रीलंका के लोगों की जिंदगी पर पड़ता रहेगा। श्रीलंका की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा। 

 

घटना के बाद होटलों और हवाई टिकट की बुकिंग कैंसिल होने लगी है। जबकि 20 से 30 लाख लोगों की जीविका इसी पर्यटन के भरोसे थी। कोलंबो में सरकार और सामजिक संगठन अब लोगों को सामान्य करने में लगे हैं। जो लोग रविवार को डरकर घर छोड़कर चले गए थे वो अब वापस अपने-अपने मोहल्लों में आने लगे हैं। टेंशन का माहौल है। स्थितियां अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहीं हैं। जल्द ही सब पहले जैसा भी हो जाएगा। उम्मीद है श्रीलंका सरकार इस घटना से बड़ी सीख लेकर लोगों को सुरक्षित माहौल दे पाएगी। 
- सिलुमिना अखबार के कंसल्टिंग एडिटर एल. पियासेना के इनपुट सहित

 

पिछले साल 23 लाख पर्यटक आए थे, एक माह में 2500 करोड़ की कमाई हुई थी 
श्रीलंका के बड़े टूर ऑपरेटरों और होटल संचालकों के मुताबिक गर्मी की छुटि्टयों का सीजन शुरू ही होने वाला था, अब लोग यहां आने में डरेंगे। श्रीलंका मेंं पर्यटन उद्योग तेजी से बढ़ रहा था, 2018 में करीब 4.5 लाख भारतीयों ने वहां पर यात्रा की। जबकि दुनियाभर से करीब 23 लाख पर्यटक पहुंचे थे। 2019 में भारतीय पर्यटकों की संख्या 10 लाख पार होने का अनुमान था। नवंबर 2018 में पर्यटन से 2,500 करोड़ रुपए कमाए थे, वहीं 2018 में 2000 करोड़ रुपए की आमदनी अक्टूबर में हुई थी। धमाकों के बाद अमेरिका और कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए ट्रेवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि श्रीलंका में पर्यटन स्थलों पर लगातार हमलों की संभावना है, इसलिए लोग वहां की यात्रा न करें। 

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