पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • International
  • Sri Lanka China News Updates | Sri Lanka China Relation Colombo Port City Economic Commission Bill

श्रीलंका में चीन ने और पैर पसारे:हम्बनटोटा बंदरगाह के बाद कोलंबो पोर्ट सिटी भी अब चीन के हवाले; कुछ रिपोर्ट्स में दावा- यहां का पासपोर्ट भी अलग होगा

कोलंबो4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

श्रीलंका में चीन ने एक और इलाके में दबदबा बढ़ाना शुरू कर दिया है, जो कन्याकुमारी से महज 290 किलोमीटर दूरी पर है। ये ठिकाना है श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में बन रही पोर्ट सिटी। श्रीलंकाई सदन से सुप्रीम कोर्ट तक के विरोधों के बावजूद 'राजपक्षे ब्रदर्स' की सरकार ने उस बिल को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत ये सिटी बसाई जाएगी।

श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे पर चीन के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 20 मई को ये विवादित बिल सदन में पास हुआ और 24 मई को श्रीलंका पोर्ट सिटी के कंस्ट्रक्शन का ठेका एक चीनी कंपनी को दे दिया गया।

सवाल-जवाब में जानिए ये पोर्ट सिटी इतनी चर्चा में क्यों और भारत को इससे क्या परेशानियां...
1. क्या है कोलंबो पोर्ट सिटी प्रोजेक्ट?

श्रीलंका सरकार ने सदन में जो इकोनॉमिक कमीशन बिल संशोधनों के साथ पास किया, उसके मुताबिक कोलंबो पोर्ट सिटी का निर्माण होगा। ये 269 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाई जाएगी। प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने पिछले हफ्ते संसद में ही कहा था कि कोलंबो पोर्ट सिटी से 5 साल में 2 लाख जॉब्स श्रीलंकाई नौजवानों को मिलेंगे। इससे डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा और फायदा हमारे देश को होगा। कोलंबो पोर्ट सिटी के डायरेक्टर यामुन जयरत्ने ने कहा कि यह साउथ एशिया का फाइनेंशियल हब बनेगा। श्रीलंका भी दुबई और हॉन्गकॉन्ग की तरह बेहतरीन और मैच्योर सर्विस दे सकेगा।

2. इस बिल का विरोध क्यों किया गया?
सरकार ने इस पोर्ट सिटी को बनाने के लिए संसद में बिल पेश किया। इसमें कई बातें या शर्तें ऐसी थीं जो सीधे तौर पर श्रीलंका को चीन का भावी उपनिवेश या गुलाम बनाने वाली थीं। लिहाजा विपक्ष ने इसका विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट में 24 याचिकाओं के जरिए इसे चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने जनमत संग्रह और बिल में संशोधन का सुझाव दिया।

3. राजपक्षे ब्रदर्स ने क्या चालाकी दिखाई?

श्रीलंका में सरकार इन्हीं दो भाइयों के हाथों में है। बाईं तरफ प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और दाईं तरफ राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे। (फाइल)
श्रीलंका में सरकार इन्हीं दो भाइयों के हाथों में है। बाईं तरफ प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और दाईं तरफ राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे। (फाइल)

श्रीलंका में गोटबाया राजपक्षे राष्ट्रपति और महिंदा राजपक्षे प्रधानमंत्री हैं। दोनों सगे भाई हैं और देश में इस वक्त इनकी ही पूर्ण बहुमत वाली सरकार है। 2014 में भी इनकी ही पार्टी सत्ता में थी। उसी दौरान कोलंबो पोर्ट सिटी के लिए चीन से समझौता हुआ था। बाद की सरकार ने भी इसका समर्थन किया।

‘राजपक्षे ब्रदर्स’ के पास संसद में बहुमत था, लिहाजा बिल को पास होने में भी देर नहीं लगी। पक्ष में 149 और विरोध में 58 वोट पड़े। राजपक्षे सरकार इतनी शातिर निकली कि उसने जनमत संग्रह कराने की मांग पर विचार करने के बजाय, बिल में मामूली संशोधन कर दिए। फिर संसद में अपने बहुमत के बल पर इसे पास करा लिया। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि इन दोनों ही मांगों पर विपक्ष का भी समर्थन लिया जाए। यानी संशोधन और जनमत संग्रह दोनों पर, लेकिन ये हो न सका।

4. चीन ने श्रीलंका को क्या लालच दिया है?
श्रीलंकाई सरकार के सामने चीन ने लालच का जाल फेंका और राजपक्षे सरकार फंस गई। दरअसल, चीन ने कहा है कि वो कोलंबो पोर्ट सिटी में श्रीलंका का पहला ‘स्पेशल इकोनॉमिक जोन’ यानी SEZ बनाएगा। यहां हर देश की करंसी में बिजनेस किया जा सकेगा। नतीजा इस पोर्ट सिटी के कंस्ट्रक्शन का ठेका चीनी कंपनी को दिया जा चुका है।

चीनी मीडिया द्वारा जारी इस फोटो में दिखाया गया है कि कंस्ट्रक्शन के बाद कोलंबो पोर्ट सिटी कुछ इस तरह नजर आएगी।
चीनी मीडिया द्वारा जारी इस फोटो में दिखाया गया है कि कंस्ट्रक्शन के बाद कोलंबो पोर्ट सिटी कुछ इस तरह नजर आएगी।

5. श्रीलंका में चीन के इरादे क्या हैं?

पूर्वी अफ्रीका हो या पाकिस्तान, चीन हमेशा से ही कर्ज देकर अपना विस्तार करता आया है। श्रीलंका पर तो उसकी पैनी नजर है। हम्बनटोटा को वो पहले ही 99 साल की लीज पर ले चुका है। कोलंबो पोर्ट सिटी के साथ भी 99 साल की लीज की शर्त है। कर्ज के मकड़जाल में श्रीलंका उलझ जाएगा और जैसे हम्बनटोटा को खोया, वैसा ही कोलंबो पोर्ट सिटी के साथ भी होगा। पिछले साल, BBC ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था- श्रीलंका ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सुधार के लिए चीन से अरबों डॉलर का कर्ज लिया है।

पिछले साल शी जिनपिंग श्रीलंका यात्रा पर आए थे। तब एयरपोर्ट से होटल तक इसी तरह के पोस्टर कोलंबो की सड़कों पर नजर आए थे।
पिछले साल शी जिनपिंग श्रीलंका यात्रा पर आए थे। तब एयरपोर्ट से होटल तक इसी तरह के पोस्टर कोलंबो की सड़कों पर नजर आए थे।

6. अलग पासपोर्ट का क्या माजरा है?
seatrade-maritime.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अब श्रीलंका के जिस क्षेत्र में जड़ें जमाने जा रहा है, वो भारत के कन्याकुमारी से महज 290 किलोमीटर दूर है। हम्बनटोटा पर पहले ही उसका कब्जा है। कोलंबो पोर्ट सिटी और हम्बनटोटा के लिए चीन एक अलग पासपोर्ट भी तैयार कर रहा है। हालांकि, श्रीलंकाई सरकार या मीडिया ने अब तक अलग पासपोर्ट के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

7. सबसे जरूरी सवाल, भारत परेशान क्यों?
अगर आप टाइमिंग पर गौर करें तो चीन की हरकत बहुत हद तक साफ हो जाती है। दरअसल, मार्च के आखिर में भारत में महामारी की दूसरी लहर ने जोर पकड़ा। भारत सरकार के हाथ-पैर फूल गए। इसी वक्त चीन ने श्रीलंका में कोलंबो पोर्ट सिटी प्रोजेक्ट हथियाने के लिए तेजी से चालें चलीं। अप्रैल में बिल तैयार हुआ। मई में विरोध और संशोधन के बाद यह पास भी हो गया।

फरवरी में इसी राजपक्षे सरकार ने 2019 में तय हुए भारत-जापान और श्रीलंका के ट्रांसशिपमेंट प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया था। इसमें 51% शेयर श्रीलंका, जबकि 49% भारत और जापान के थे।

श्रीलंका में विपक्ष और आम नागरिकों ने कोलंबो पोर्ट सिटी को चीन के हवाले करने का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने तमाम मांगें अनसुनी कर दीं।
श्रीलंका में विपक्ष और आम नागरिकों ने कोलंबो पोर्ट सिटी को चीन के हवाले करने का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने तमाम मांगें अनसुनी कर दीं।

याद कीजिए, पिछले साल जब अमेरिका में कोविड की पहली लहर के दौरान हर रोज हजारों लोग मारे जा रहे थे, तभी चीन ने हॉन्गकॉन्ग सिक्योरिटी बिल और साउथ चाइना सी में बेहद तेजी से सैन्य दबदबा बढ़ाना शुरू किया था, लेकिन अमेरिका ने उसकी चाल नाकाम कर दी थी।

भारत को भी अब चीन की नई चाल से निपटने के रास्ते बहुत तेजी से खोजने होंगे, क्योंकि पाकिस्तान और चीन के साथ दो मोर्चों पर खतरा पहले से ही था, अब श्रीलंका के रास्ते तीसरा खतरा भी सामने आ रहा है।

खबरें और भी हैं...