श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने भारत का शुक्रिया अदा किया:विक्रमसिंघे बोले- प्रधानमंत्री मोदी ने हमें बचाया, भारत मुश्किल वक्त में हमारे साथ रहा

कोलंबो17 दिन पहले
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श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे मुश्किल वक्त में साथ देने के लिए भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया है। रानिल ने कहा- हमारा देश अपने इतिहास के सबसे मुश्किल वक्त से गुजर रहा है। इस दौर में भारत और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो जीवन रक्षक सांसें दी हैं, इसके लिए हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं।

पिछले हफ्ते जब विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी तो मोदी ने उन्हें फोन पर बधाई दी थी। मोदी ने कहा था- मुझे खुशी है कि श्रीलंका मुश्किलों के बावजूद लोकतंत्र के रास्ते से डिगा नहीं है।

श्रीलंका की संसद में मोदी की तारीफ
सात दिन ठप रहने के बाद श्रीलंकाई संसद में बुधवार को काम हुआ। इस दौरान रानिल ने स्पीच दी। कहा- दुनिया हमारे हालात से वाकिफ है। कई देशों और संगठनों ने हमारी मदद की है, लेकिन मैं यहां भारत का जिक्र खास तौर पर करना चाहूंगा। हमें जो मदद भारत से मिली, वो बेमिसाल है। भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है। ऐसे वक्त जबकि हम फिर अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं तो भारत साथ है।
श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने आगे कहा- प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप में भारत ने हमें फिर से जिंदगी जीने के लिए सांसें दीं। अपने देश और आप सब लोगों की तरफ से हम भारत सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और वहां के लोगों का शुक्रिया अदा करते हैं।

4 अरब डॉलर की मदद दे चुका है भारत
इस साल जनवरी से अब तक भारत सरकार श्रीलंका को करीब 4 अरब डॉलर की मदद दे चुकी है। इसमें फ्यूल, कैश रिजर्व और फूड आयटम्स शामिल हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, 6 महीने की जरूरतों के लिए श्रीलंकाई सरकार को अब भी 5 अरब डॉलर की दरकार है। 2 करोड़ 20 लाख की आबादी वाले इस देश में हालात धीरे-धीरे अमन की तरफ बढ़ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और जापान के अलावा भारत भी चाहता है कि IMF श्रीलंका को जल्द से जल्द कर्ज दे ताकि वहां भुखमरी का संकट पैदा न हो और चीन को पैर पसारने का मौका दोबारा न मिले। माना जा रहा है कि इसी हफ्ते IMF की तरफ से श्रीलंका को किश्त मिलेगी।

पूर्व राष्ट्रपति का बचाव
पिछले हफ्ते विक्रमसिंघे ने पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का बचाव किया था। विक्रमसिंघे ने कहा था- मुल्क में अभी हालात ऐसे नहीं हैं कि गोटबाया लौटें। पूर्व राष्ट्रपति अगर श्रीलंका लौटते हैं तो यह तय है कि विरोध प्रदर्शन एक बार फिर भड़क जाएंगे। मुल्क में फिर लपटें उठ सकती हैं।

अप्रैल में गोटबाया के खिलाफ अलग-अलग शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए थे। इसके पहले उनके भाई और पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे देश छोड़ चुके थे। 13 जुलाई को गोटबाया भी कोलंबो से मालदीव के रास्ते सिंगापुर भाग गए।