राजपक्षे के बचाव में श्रीलंकाई राष्ट्रपति:विक्रमसिंघे बोले- पूर्व राष्ट्रपति के लौटने का यह वक्त सही नहीं, इससे देश में आग लग सकती है

कोलंबो19 दिन पहले
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श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का बचाव किया है। विक्रमसिंघे के मुताबिक, मुल्क में अभी हालात ऐसे नहीं हैं कि गोटबाया देश लौटें। रानिल ने कहा- पूर्व राष्ट्रपति अगर श्रीलंका लौटते हैं तो यह तय है कि विरोध प्रदर्शन एक बार फिर भड़क जाएंगे। मुल्क में फिर लपटें उठ सकती हैं।

अप्रैल में गोटबाया के खिलाफ अलग-अलग शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए थे। इसके पहले उनके भाई और पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे देश छोड़ चुके थे। 13 जुलाई को गोटबाया भी कोलंबो से मालदीव के रास्ते सिंगापुर भाग गए। उनके खिलाफ काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे।

पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे (दाएं) के साथ रानिल विक्रमसिंघे। रानिल के बारे में कहा जाता है कि वो राजपक्षे ब्रदर्स के साथी हैं और उनके लिए काम करते हैं।
पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे (दाएं) के साथ रानिल विक्रमसिंघे। रानिल के बारे में कहा जाता है कि वो राजपक्षे ब्रदर्स के साथी हैं और उनके लिए काम करते हैं।

हालात सुधरने में वक्त लगेगा
श्रीलंकाई अखबार ‘डेली मिरर’ के मुताबिक, प्रेसिडेंट विक्रमसिंघे नहीं चाहते कि देश में बहुत मेहनत के बाद फौज और पुलिस ने जो अमन बहाली कराई है, उसमें अब किसी तरह की दिक्कत हो। यही वजह है कि वो नहीं चाहते कि इन मुश्किल हालात में गोटबाया या उनका परिवार देश लौटे। रानिल ने कहा- मुझे नहीं लगता कि हालात पूरी तरह काबू में हैं और गोटबाया को इस वक्त देश लौटना चाहिए। इससे फिर सड़कों पर हिंसा हो सकती है, आग लग सकती है। मुझे ये भी नहीं लगता कि खुद गोटबाया इन हालात में देश लौटना चाहेंगे।

रानिल को दोनों तरफ फायदा
रानिल के बारे में कहा जाता है कि वो राजपक्षे ब्रदर्स के साथी हैं और उनके लिए काम करते हैं। यही वजह है कि उन्होंने जैसे ही राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो कोलंबो समेत देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। सेना ने काफी सख्ती के बाद इन पर काबू पाया। राष्ट्रपति वादा कर रहे हैं कुछ महीनों में देश के हालात काफी हद तक सुधरने लगेंगे। उन्होंने कहा- IMF से हमने स्टाफ लेवल एग्रीमेंट कर लिया है। जल्द ही हमें फंड मिलना शुरू हो जाएगा। हम कुछ देशों के संपर्क में हैं। उनसे भी मदद मांगेंगे।

13 जुलाई को भागे थे राजपक्षे
राजपक्षे को सत्ता से उखाड़ने इस जन आंदोलन का आखिरी चरण जुलाई के पहले हफ्ते में शुरू हुआ। 9 जुलाई को आम जनता ने राष्ट्रपति आवास और प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा जमा लिया। राष्ट्रपति गोटबाया अपना आवास छोड़कर भाग खड़े हुए। 13 जुलाई को परिवार समेत गोटबाया देश छोड़कर मालदीव भाग गए। इसी दिन श्रीलंका में फिर से इमरजेंसी लगा दी गई।

श्रीलंका के आर्थिक संकट के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले ताकतवर राजपक्षे परिवार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का श्रेय आम जनता के आंदोलन को जाता है, जो श्रीलंका के इतिहास में अनूठा है।

एक ही परिवार का राज
अप्रैल तक श्रीलंका में सरकार में राजपक्षे परिवार के पांच लोग शामिल थे। इनमें राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे, वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे, सिंचाई मंत्री चामल राजपक्षे और खेल मंत्री नामल राजपक्षे थे। ये सभी अब इस्तीफा देकर देश छोड़ चुके हैं।

एक समय श्रीलंका के नेशनल बजट के 70% पर इन राजपक्षे भाइयों का सीधा कंट्रोल था। राजपक्षे परिवार पर 5.31 अरब डॉलर यानी 42 हजार करोड़ रुपए अवैध तरीके से देश से बाहर ले जाने का आरोप है। इसमें महिंदा राजपक्षे के करीबी अजित निवार्ड कबराल ने अहम भूमिका निभाई थी, जो सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका के गवर्नर थे।