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कोरोना पर रिपोर्ट:स्टडी में दावा- हर्ड इम्युनिटी की बात अभी दूर, क्योंकि कोरोना प्रभावित देशों में संक्रमितों का प्रतिशत अभी सिंगल डिजिट में

बीजिंग9 महीने पहले
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चीन में भी हर्ड इम्युनिटी को लेकर स्टडी की गई, पर नतीजे नहीं मिले हैं। वुहान के अस्पतालों की एक स्टडी में कहा गया कि काम पर लौटने के इच्छुक 10% लोग संक्रमित हो गए। -प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
चीन में भी हर्ड इम्युनिटी को लेकर स्टडी की गई, पर नतीजे नहीं मिले हैं। वुहान के अस्पतालों की एक स्टडी में कहा गया कि काम पर लौटने के इच्छुक 10% लोग संक्रमित हो गए। -प्रतीकात्मक फोटो
  • न्यूयॉर्क स्टेट, कार्लोस हेल्थ इंस्टीट्यूट के साथ पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड और स्वीडन की रिपोर्ट
  • स्वीडन और ब्रिटेन ने सीमित लॉकडाउन रखकर हर्ड इम्युनिटी की कोशिश की, पर विफल रहे

कोरोना से लड़ने के लिए हर्ड इम्युनिटी को कारगर हथियार माना जा रहा था, पर ताजा स्टडीज की मानें तो हर्ड इम्युनिटी कोरोना से जूझ रहे देशों के लिए अभी भी बहुत दूर की बात है। क्योंकि, जिन देशों में भी कोरोना फैला है, वहां पर संक्रमितों का प्रतिशत एकल अंक में ही है। हर्ड इम्युनिटी वह स्तर होता है, जिसके बाद वायरस व्यापक रूप से नहीं फैल पाता।

इसका कोई तय मानक नहीं हैं, पर विशेषज्ञों की मानें तो इसके लिए 60% से ज्यादा लोगों का संक्रमित होना जरूरी है। न्यूयॉर्क स्टेट, पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड, कार्लोस हेल्थ इंस्टीट्यूट और स्वीडन की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने इस पर गहन शोध किया है। इसके मुताबिक सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों की बात करें तो, बचे हुए लोगों में भी संक्रमण का खतरा अभी भी बना हुआ है।

स्वीडन और ब्रिटेन जैसे देशों ने सीमित लॉकडाउन रखकर नागरिकों में इम्युनिटी का स्तर बढ़ाने की कोशिश की थी, पर यहां पर भी 7 से 17% लोग चपेट में आ गए। अमेरिका में न्यूयॉर्क सबसे ज्यादा प्रभावित है, यहां पर भी मई की शुरुआत में 20% नागरिक संक्रमित थे।

एक स्टडी में कहा गया कि काम पर लौटने के इच्छुक 10% लोग संक्रमित हो गए

चीन में भी हर्ड इम्युनिटी को लेकर स्टडी की गई, पर नतीजे नहीं मिले हैं। वुहान के अस्पतालों की एक स्टडी में कहा गया कि काम पर लौटने के इच्छुक 10% लोग संक्रमित हो गए। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एपिडेमियोलॉजिस्ट माइकेल मिना के मुताबिक, सभी स्टडी से यह बात तो स्पष्ट है कि हाल में किसी भी देश के हर्ड इम्युनिटी तक पहुंचने की संभावना नहीं है।

कोरोना के लिए हो रहे नए टेस्ट में लोगों के रक्त में एंटीबॉडी और संक्रमण से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम द्वारा तैयार प्रोटीन को जांचा जा रहा है। इससे उन लोगों का पता लगाया जा सकता है, जिनमें संक्रमण तो है, पर लक्षण नहीं दिखते। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती कोरोना के ऐसे मरीजों को पहचानना ही है।

कोरोना की आग बुझाने में फायर ब्रिगेड जैसी साबित हो सकती है इम्युनिटी
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी के प्रोफेसर कार्ल बर्गस्टॉर्म बताते हैं कि इन स्टडी को पूरी तरह आधार नहीं बना सकते। पर इनसे यह जरूर पता लग सकता है कि कोरोनावायरस वास्तव में कितना फैल गया है और इसकी क्षमता कितनी है। हर्ड इम्युनिटी की सीमा हर जगह अलग हो सकती है।

क्योंकि यह जनसंख्या घनत्व और सामाजिक संपर्क जैसे कारकों पर निर्भर करती है। हो सकता है कि कोरोना को लेकर भी लोगों में हर्ड इम्युनिटी पैदा हो जाए, पर यह नहीं कह सकते कि सभी मामलों में यह कितनी कारगर होगी, कितनी मजबूत होगी और कब तक बनी रहेगी। वहीं डॉ मिना का कहना है कि इम्युनिटी इस बीमारी में फायर ब्रिगेड की तरह काम कर सकती है।

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