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1 दिन में 7 प्रांतों में तालिबानी हुकूमत:अफगानिस्तान सरकार का सरेंडर, 7 दिन में 19 प्रांतों पर तालिबान का कब्जा; राज्यों के गवर्नर समेत कई नेताओं ने तालिबानी शासन स्वीकारा

काबुलएक वर्ष पहले
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इस्माइल खान भारत के दोस्त माने जाते हैं, वे भी आतंकी हिरासत में हैं। - Dainik Bhaskar
इस्माइल खान भारत के दोस्त माने जाते हैं, वे भी आतंकी हिरासत में हैं।

अफगानिस्तान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है। तालिबान ने शुक्रवार को एक दिन में 7 प्रांतों पर अपनी हुकूमत बढ़ा ली है। पिछले सात दिन में वह अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार समेत 19 प्रांतों पर कब्जा कर चुका है। गुरुवार की रात को उसने कंधार पर कब्जा किया और फिर सुबह होते-होते लश्कर गाह शहर और पश्चिमी प्रांत घोर की प्रांतीय राजधानी पर कब्जा जमा लिया। इस बीच हेरात प्रांत की पूरी सरकार ने तालिबान के आगे सरेंडर कर दिया है।

अफगानिस्तान में हेरात प्रांत के गवर्नर, पुलिस चीफ, एनडीएस ऑफिस के हेड को तालिबान ने हिरासत में ले लिया है। तालिबान के खिलाफ जंग के प्रतीक रहे मोहम्मद इस्माइल खान (75) को भी तालिबान ने पकड़ लिया है। ऐसे में पश्चिमी देशों ने अपनों को निकालने की तैयारी तेज कर दी है। दूसरी तरफ, भारत, जर्मनी, तुर्की और कतर समेत कई देशों ने तालिबान से हिंसा और हमले रोकने की अपील की है। इसके अलावा यूरोपीय संघ (ईयू) और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यदि तालिबान हिंसा से अफगानिस्तान की सत्ता हासिल करता है तो उसे अंतरराष्ट्रीय असहयोग का सामना करना पड़ेगा।
भारत के दोस्त इस्माइल खान भी तालिबानी हिरासत में

अमेरिका और ब्रिटेन अपनों को निकालने की तैयारी में
अफगानिस्तान में बढ़े आतंक के बीच अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने भी अपनों को निकालने की तैयारी कर ली है। अमेरिका ने 3 हजार सैनिकों को वापस अफगानिस्तान भेजा है, जो उसके डिप्लोमैट्स को सुरक्षित निकालने का काम करेंगे। ब्रिटेन 600 कमांडो की टीम भेज रहा है। ये कमांडो पहले भी अफगानिस्तान में तैनात रह चुके हैं। इसके अलावा कनाडा ने भी अपनों को निकालने की तैयारी कर ली है।

अपनी आय बढ़ाने के लिए नशीली दवाओं पर नजर

तालिबान खुद को मजबूत करने के लिए नशीली दवाओं पर नजर लगाए बैठा है। टोलो न्यूज के मुताबिक, ताबिलान अफगानिस्तान में दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर अफीम की खेती कर रहा है। एक थिंक टैंक का अनुमान है कि अब हर प्रांत में अफीम की खेती कर सकता है।

हथियारों व गोला बारूद की कमी से जूझ रहे विद्रोही गुट

अफगानिस्तान के उत्तरी, उत्तरपूर्वी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में तालिबान का सामना कर रहे मिलिशया संगठनों को पीछे हटना पड़ रहा है। ये गुट हथियार और साजोसामान की कमी से जूझ रहे हैं। कई इलाकों में इन गुटों के लड़ाकों ने सरेंडर कर तालिबान में शामिल हो रहे हैं।

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