जंग और जिंदगी की कश्मकश:​​​​​​​कीव के बेसमेंट में 19 सरोगेट बेबीज, बमबारी के बीच देखभाल में डटीं दाई मां, क्योंकि असल मां-बाप का आना मुश्किल

कीव9 महीने पहले
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धूल भरी सीढ़ियों, कांपती दीवारों और बम धमाकों के बीच लुडमिला याशेन्को करीने से सजाए बिस्तरों पर लेटे नवजातों को संभालने में जुटी हैं। याशेन्को की तरह दूसरी नैनीज भी हैं, जिनकी एक नजर टेलीविजन पर रूस-यूक्रेन जंग की ताजा खबर पर टकी हैं और दूसरी नजर बच्चों पर है।

यूक्रेन की राजधानी कीव के इस बेसमेंट में 19 नवजात हैं। सभी को सरोगेट मदर्स ने जन्म दिया है। जंग के बीच जिंदगी ने आंखें खोली हैं तो नई मुश्किलें भी साथ ही आई हैं। इन सरोगेट बेबीज का भविष्य अनिश्चित है, क्योंकि जंग के चलते अब यह तय नहीं कि जिनके वो वारिस है, वे मां-बाप कभी उन्हें लेने आएंगे या नहीं।

"इन बच्चों को कैसे छोड़ दूं, अभी इनसे दूर नहीं जा सकती"
कीव में सरोगेट मदर्स के लिए बने इस सेफ्टी बंकर को सरोगेट प्रोवाइडर कंपनी BioTexCom ने बनाया है। बच्चों को संभाल रही येशेन्को कहती हैं- मेरे पति यूक्रेन आर्मी में हैं और वो चाहते हैं कि मैं यहां से दूर चली जाऊं, पर मैं नहीं जा सकती, मैं इन बच्चों को कैसे छोड़ दूं, मैं अपना काम को कैसे छोड़ दूं।

यशेंको ने कहा-जंग के बीच बच्चों को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है।
यशेंको ने कहा-जंग के बीच बच्चों को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है।
सेफ्टी बंकर में रह रहे इन बच्चों के नाम भी रखे गए हैं।
सेफ्टी बंकर में रह रहे इन बच्चों के नाम भी रखे गए हैं।

सरोगेसी हब में सवाल- बच्चों का लीगल गार्जियन कौन
दुनिया के सबसे बड़े सरोगेसी हब यूक्रेन में हर साल कपल सरोगेट बेबीज के लिए कपल्स आते हैं। जंग ने हालात बदल दिए हैं। सरोगेट बेबीज की देखभाल कर रही नैनीज को पता नहीं कि बच्चों के बायोलॉजिकल पेरेंट्स अपने बच्चों से मिलने कब आएंगे। मुश्किल यही नहीं है। ज्यादातर सरोगेट बेबीज के पेरेंट्स विदेशी हैं। ऐसे में इन बच्चों की नागरिकता भी खतरे में है। यूक्रेनी कानून के मुताबिक, बच्चों के बॉयोलॉजिकल पेरेंट्स को अपना अधिकार हासिल करने के लिए खुद मौजूद रहना जरूरी है। अब सवाल है कि इन बच्चों का लीगल गार्जियन कौन होगा।

सरोगेसी से पैदा हुए बच्चों के माता-पिता जंग के कारण अपने बच्चों को लेने के लिए यूक्रेन नहीं आ सकते हैं।
सरोगेसी से पैदा हुए बच्चों के माता-पिता जंग के कारण अपने बच्चों को लेने के लिए यूक्रेन नहीं आ सकते हैं।

आनिया (26) सरोगेट मदर हैं। वे दूसरी बार ऐसा कर रही है। 31 हफ्ते के प्रेग्नेंसी है और अभी लीव में रह रही है। जंग के चलते कमिआन्स्के से भागकर यहां आई थीं। आनिया के क्लाइंट भी उन्हीं के साथ रह रहे हैं। आनिया के पति और दो बच्चे भी साथ ही हैं। आनिया कहती हैं- क्लाइंट चाहते हैं कि मैं वेस्टर्न यूरोप में चली जाऊं पर ऐसा करते हुए डर लग रहा है। हो सकता है कि वहां मुझे ही इन बच्चों का लीगल पेरेंट्स रजिस्टर कर लिया जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल यूक्रेन में 2,000 से 2,500 बच्चे सिर्फ सरोगेसी के जरिए ही पैदा होते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल यूक्रेन में 2,000 से 2,500 बच्चे सिर्फ सरोगेसी के जरिए ही पैदा होते हैं।
यूक्रेन में $30,000 से $50,000 में ही सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया हो जाती है।
यूक्रेन में $30,000 से $50,000 में ही सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया हो जाती है।

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एक पहलू यह भी

युद्ध का मैदान बने यूक्रेन के मिकोलीव शहर में 25 साल की एंजेला कालिसनिक फ्रंटलाइन से थोड़ी ही दूर ट्यूलिप और गुलाब बेच रही है। एंजेला ने कहा- हमें नहीं पता था कि युद्ध होने वाला है, हमारे इलाके में फूल खिलते हैं और हम उन्हें फेंकना नहीं चाहते। बाहर सड़कों पर सैनिक लड़ रहे हैं, लेकिन कालिसनिक की दुकान के अंदर, रंग-बिरंगे गुलदस्ते दीवार पर सजे हुए हैं।