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ताइवान / चुनाव जीतने के 5 दिन बाद राष्ट्रपति साई की चीन को चेतावनी- हम आजाद मुल्क, हमला किया तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-विन ने अपने देश को चीन का हिस्सा मानने से इंकार किया। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-विन ने अपने देश को चीन का हिस्सा मानने से इंकार किया।
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ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-विन ने अपने देश को चीन का हिस्सा मानने से इंकार किया।ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-विन ने अपने देश को चीन का हिस्सा मानने से इंकार किया।

  • चीन ने ताइवान से कहा था- आजादी की घोषणा की तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे
  • साई ने कहा- हमें पहले से ही आजाद, इसकी घोषणा करने की कोई जरूरत नहीं 

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2020, 07:42 AM IST

ताइपे. ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-विन ने बुधवार को चेतावनी दी है कि अगर चीन उन पर हमला करता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी। साई ने 5 दिन पहले ही आम चुनाव में 80 लाख वोट के बड़े अंतर से जीत हासिल की है। उन्होंने चीन समर्थित प्रत्याशी को 38% के अंतर से चुनाव हराया था। ताइवान को चीन से अलग राष्ट्र बताते हुए साई ने कहा कि ताइवान पहले से ही आजाद देश है। इसे ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के नाम से जाना जाता है और हमें अपनी आजादी का ऐलान करने की जरूरत नहीं।

साई ने क्यों दिया बयान? 

साई के राष्ट्रपति बनने के बाद चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि अगर ताइवान आजादी की घोषणा करता है तो चीन उसपर जबर्दस्ती कब्जा कर लेगा। इस पर साई ने कहा कि एक आजाद देश होने के नाते हम चीन से सम्मान की उम्मीद करते हैं। मॉडर्न ताइवान पिछले 70 साल से मेनलैंड चीन से अलग है और स्वतंत्र तौर पर काम कर रहा है। ताइवान अपनी आजादी पर किसी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं करेगा।

‘उम्मीद करती हूं कि चीन हमारे जनादेश का सम्मान करेगा’

चीन की नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने  कहा कि मैं उम्मीद करती हूं कि ताइवान के लोगों के विचारों का चीन सम्मान करेगा। राष्ट्रपति चुनाव में दिए गए लोगों के जनादेश को गहराई से समझेगा। चीन इस पर गौर करते हुए अपनी कुछ मौजूदा नीतियों में भी बदलाव करेगा। उन्होंने कहा कि मुझ पर आजादी से जुड़े मुद्दों को मजबूती से रखने का दबाव है।

ताइवान मेनलैंड चीन का हिस्सा होने में विश्वास नहीं करता: साई

साई ने कहा कि 1949 में चीन के नागरिक युद्ध में कम्युनिस्ट से हार के बाद ताइवान दशकों तक नेशनलिस्ट चियांग काई-शेक की तनाशाही में रहा। 1980 के बाद यह एशिया के सबसे प्रगतिशील लोकतंत्र के तौर पर उभरा है। हालांकि, इसे दुनिया के काफी कम देशों से मान्यता मिली है लेकिन इस चुनाव का परिणाम बताता है कि ताइवान के लोग मेनलैंड चीन का हिस्सा होने की थ्योरी में विश्वास नहीं रखते।

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