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ताइवान की धाकड़ राष्ट्रपति:चीन की आंखों में चुभती हैं साई इंग वेन, हांगकांग की आजादी की समर्थक, भारत से है गहरा लगाव

नई दिल्ली19 दिन पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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करीब डेढ़ अरब की आबादी वाले चीन की दादागीरी और उसके ​अड़ियल रवैये के सामने महज दो करोड़ की आबादी वाले छोटे से देश ताइवान की महिला राष्ट्रपति साई इंग-वेन मजबूती से डटी हुई हैं। लोकतंत्र और स्वतंत्रता की समर्थक साई इंग-वेन चीन की हर चाल को नाकाम कर रही हैं। चीन की चालाकियों को मुंहतोड़ जवाब दे रहीं हैं। भास्कर वुमन की रिपोर्ट में पढ़िए आखिर कौन हैं ताइवान की लोकप्रिय राष्ट्रपति साई इंग-वेन जो चीन की आंखों की सबसे बड़ी किरकिरी बनी हुई हैं।

राष्ट्रपति साई इंग-वेन चीन को किस के दम पर चुनौती दे रहीं हैं? अगर युद्ध हुआ तो क्या ताइवान चीन के सामने खड़ा हो पाएगा? इस पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार स्वर्ण सिंह बताते हैं कि ताइवान की राष्ट्रपति अमेरिका के दम पर चीन को चुनौती देती हैं। ताइवान के पास अभी अमेरिका का सपोर्ट है। अमेरिका की विदेश नीति के लिए ताइवान सिर्फ एक कार्ड है, जिसका इस्तेमाल वह चीन पर अंकुश लगाने के लिए करता है। पिछले 4-5 साल से अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड और टेक को लेकर तनातनी जारी है, जिसकी वजह से वह ताइवान का समर्थन कर रहा है। प्रोफेसर सिंह कहते हैं कि चीन के साथ अमेरिका के रिश्ते कैसे भी हों, लेकिन अगर ड्रैगन ने हमला किया तो अमेरिका ताइवान के साथ लड़ने नहीं आएगा। वह सिर्फ अपने हथियार बेचेगा।

पिता चलाते थे कार रिपेयरिंग का बिजनेस, अमेरिका-ब्रिटेन से की पढ़ाई
राष्ट्रपति साई इंग-वेन 31 अगस्त, 1956 को ताइपे के एक बेहद सामान्य परिवार में पैदा हुईं। उनके पिता कार रिपेयरिंग का छोटा सा बिजनेस चलाते थे। साई अपने भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। साई ने कानून और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की पढ़ाई की। उन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई ताइवान और इसके आगे की पढ़ाई अमेरिका और ब्रिटेन से की। लॉ में मास्टर डिग्री अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और PhD ब्रिटेन के लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से की। साल 1984 में वे पढ़ाई पूरी कर ताइवान लौट आईं। जहां साल 1990 तक उन्होंने राष्ट्रीय चेंगची विश्वविद्यालय में बच्चों को कानून पढ़ाया।

बिना चुनाव लड़े ही काबिलियत के दम पर बनीं मंत्री साई। फाइल फोटो
बिना चुनाव लड़े ही काबिलियत के दम पर बनीं मंत्री साई। फाइल फोटो

अपनी काबिलियत के दम पर बिना चुनाव लड़े ही बनी मंत्री
साई ने पहली बार ताइवान सरकार के लिए साल 1993 में काम करना शुरू किया था। साई को वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन से बातचीत के लिए ताइवान का नेगोशिएटर नियुक्त किया गया। साल 2000 में जब ताइवान के राष्ट्रपति चेन शुई-बियान (Chen Shui-bian) बने, तब साई को पहली बार मंत्री बनाया गया। साई ने तब तक किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ीं थीं। मंत्रिपद उन्हें उनकी ​काबिलियत को ध्यान में रखकर दिया गया था।

पार्टी की कमान संभालने वाली पहली महिला, 2012 में लड़ा था राष्ट्रपति चुनाव
साई ने साल 2004 में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) ज्वाइन कर ली। इसके बाद उन्होंने कई पद संभाले। जब डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सत्ता में नहीं थी, उस वक्त लगातार दो कार्यकाल के लिए वे पार्टी प्रमुख रहीं। ताइवान में किसी राजनीतिक दल की कमान संभालने वाली साई पहली महिला बनीं। साल 2012 में उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं।

बिना मेयर बने ही इतने ऊंचे ओहदे पर पहुंची
साई ने जब से राजनीति में कदम रखा, तब से अपने देश को सशक्त बनाने का सपना देखा। साल 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीतकर सरकार बनाई। साई का राष्ट्रपति बनना कई मामलों में ऐतिहासिक था। वह देश की पहली महिला राष्ट्रपति और पहली अविवाहित राष्ट्रपति हैं। साई ताइवान की पहली ऐसी राष्ट्रपति बनीं, जिसने देश की राजधानी ताइपे का मेयर पद नहीं संभाला था। इतना ही नहीं, साई एशियाई देशों में पहली महिला राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो किसी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक नहीं रखती हैं। पहले कार्यकाल में साई की लोकप्रियता इस कदर बढ़ी की कि 2020 में वे एक बार फिर प्रचंड बहुमत से राष्ट्रपति चुनी गईं।

साई एशियाई देशों में पहली महिला राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो किसी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक नहीं रखतीं। फाइल फोटो
साई एशियाई देशों में पहली महिला राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो किसी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक नहीं रखतीं। फाइल फोटो

मानवाधिकार के लिए किया काम, हांगकांग के हक में उठाई आवाज
राष्ट्रपति साई इंग वेन को राजनीति धाकड़ नेता होने के साथ ही मानवाधिकार के क्षेत्र में भी काम करने के लिए जाना जाता है। साल 2017 में साई सरकार ने कानून बनाकर समलैंगिक शादी को वैधता दी। उन्होंने कई ज्यूडिशियल, लेबर और पेंशन रिफॉर्म्स किए हैं। साल 2019 में एक कानून के विरोध में जब हांगकांग के युवाओं ने आंदोलन किया और चीन ने उन्हें दबाने की कोशिश की, तब साई ने हांगकांग के हक में आवाज उठाई। इसके लिए चीन ने उसे धमकी भी दी।

भारत से है खास प्यार, पसंद है चना मसाला और नान
ताइवान की राष्ट्रपति साई को भारत से विशेष प्रेम है। उन्हें भारतीय खाना बहुत पसंद हैं। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद साई भारतीय दौरे पर आईं थीं। यहां से जाने के बाद उन्होंने ट्वीट कर भारत की संस्कृति, आर्किटेक्ट और उदारता की जमकर तारीफ की थी। साई ने कहा था कि ताइवान भाग्यशाली है कि यहां कई भारतीय रेस्तरां हैं और ताइवान की जनता उन्हें प्यार करती है। मैं खुद चना मसाला और नान खाने के लिए रेस्तरां जाती हूं और चाय हमेशा मुझे भारत की यात्रा के दिनों और जीवंत, विविध व ढेर सारे रंगों से भरे देश की याद दिलाती है।

जनता ने हर बात मानी, कोरोना के खिलाफ जीती जंग
चीन से बाहर जब दुनिया भर को कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में लिया तो राष्ट्राध्यक्षों के हाथ-पैर फूल गए, लेकिन ताइवान की राष्ट्रपति साई ने महामारी के खिलाफ जंग में अपने लोगों का साथ मांगा। फिर क्या था- जैसे-जैसे साई ने कहा, जनता ने वैसा-वैसा किया। इसका परिणाम यह हुआ कि ताइवान ने बिना किसी जोर-जबरदस्ती के कोरोना वायरस के खिलाफ जंग जीत ली।

साई को बिल्लियां बहुत पसंद हैं। मीडिया में उन्हें 'क्रेजी कैट लेडी' भी कहा जाता है। फाइल फोटो
साई को बिल्लियां बहुत पसंद हैं। मीडिया में उन्हें 'क्रेजी कैट लेडी' भी कहा जाता है। फाइल फोटो

बिल्लियों से है बेहद प्रेम, क्रेजी कैट लेडी के नाम से जानते हैं लोग
साई को बिल्लियां बहुत पसंद हैं। मीडिया में उन्हें 'क्रेजी कैट लेडी' भी कहा जाता है। साई के घर में तीन-तीन बिल्लियां पली हैं। इसके अलावा उन्हें कुछ कुत्ते भी पाले हैं। पहली बार राष्ट्रपति बनने के बाद उनका बिल्ली प्रेम और कुत्तों को गोद लेने वाली बात ने खूब सुर्खियां बटोरीं थीं।

ताइवान एक संप्रभु देश, चीन की हर हरकत का मुंहतोड़ देती हैं जवाब
राष्ट्रपति साई इंग वेन ताइवान को एक संप्रभु राष्ट्र के तौर पर देखती हैं। उनका मानना है कि ताइवान 'वन चाइना' का हिस्सा नहीं है। चीन उनके इस रवैये को लेकर नाराज रहता है। वर्ष 2016 में जब से वह सत्ता में आई हैं, तब चीन ताइवान से बातचीत करने से इनकार करता रहा है। चीन ने इस द्वीप पर आर्थिक, सैनिक और कूटनीतिक दबाव भी बढ़ा दिया है। चीन का मानना है कि ताइवान उसका क्षेत्र है। चीन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर ताकत के जोर उस पर कब्जा किया जा सकता है, लेकिन साई चीन की अवैध हरकत का मुंहतोड़ जवाब देती हैं।