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तालिबानी हुकूमत:पंजशीर में तालिबान और मसूद समर्थकों के बीच भीषण लड़ाई, दायकुंदी प्रांत में हजारा समुदाय के 14 लोगों की हत्या

काबुल9 महीने पहले

पंजशीर में अहमद मसूद से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि तालिबान ने कई तरफ से हमला बोला है। पंजशीर के लड़ाके भी उनका जवाब दे रहे हैं। इससे पहले तालिबानी सूत्रों ने कहा था कि पंजशीर में कई गुट तालिबान के समर्थन में आ रहे हैं। पंजशीर पर हमले की पुष्टि कई सूत्र कर रहे हैं। उधर, दायकुंदी प्रांत के खदीर जिले में तालिबान ने हजारा समुदाय के 14 लोगों की हत्या कर दी है।

हजारा समुदाय पर तालिबान का जुल्म
हजारा समुदाय से जुड़े कार्यकर्ताओं का दावा है कि हजारा बहुल जिले दायकुंदी में तालिबान ने नजीबा लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब में तोड़फोड़ और लूटपाट की है। हजारा पत्रकार बशीर अहंग के मुताबिक इस लाइब्रेरी में स्थानीय हजारा लड़कियां और लड़के पढ़ाई करते थे।

अफगानिस्तान के अखबार इतलेआत रोज ने दावा किया है कि दायकुंदी प्रांत के खदीर जिले में तालिबान ने कुल 14 लोगों को मारा है, जिनमें 2 आम नागरिक हैं। वहीं हजारा मामलों पर नजर रखने वाले एक कार्यकर्ता का कहना है कि हम स्वतंत्र तौर पर पीड़ितों से बात नहीं कर सके हैं लेकिन स्थानीय मीडिया ने 14 लोगों के मारे जाने की खबर प्रकाशित की है।

दायकुंदी में हजारा लड़ाके भी तालिबान से भिड़े
हजारा समुदाय के कार्यकर्ता ये आरोप लगाते रहे हैं कि दूरस्थ इलाकों में तालिबान जुल्म कर रहा है और असली तस्वीर सामने नहीं आ पा रही हैं। दायकुंदी से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक हजारा लड़ाकों और तालिबान के बीच लड़ाई भी हुई है। तालिबान ने दर्जन भर हजारा लड़ाकों की हत्या की है। तालिबान स्थानीय जासूसी नेटवर्क की मदद से हजारा लड़ाकों की पहचान कर रहे हैं।

काबुल में तालिबान ने लोगों से छीने हथियार, घरों से इतनी बंदूकें मिलीं कि गोदाम बन गया
अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान के पास हथियारों का जखीरा जमा हो गया है। अमेरिका ने अफगानिस्तान के सैनिकों को अब तक जितने भी हथियार, गोला-बारूद, लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और अन्य सैन्य साजो-सामान दिए थे, वे अब पूरी तरह से तालिबान के कब्जे में हैं। तालिबान ने आम लोगों से भी भारी संख्या में हथियार इकट्ठा किए हैं।

दरअसल, कुछ दिन पहले तालिबान ने एक निर्देश जारी किया था। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्वीट कर कहा था कि 'काबुल शहर में जिनके पास सरकारी वाहन, हथियार, गोला-बारूद और अन्य सरकारी सामान हैं, उन्हें स्वेच्छा से एक सप्ताह के भीतर संबंधित इस्लामिक अमीरात के अधिकारियों को सौंपना है। उन्होंने इस आदेश का उल्लंघन करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी के पास इनमें से कोई सामान पाया जाता है तो उनपर मुकदमा चलाया जाएगा।'

इसके बाद हजारों लोगों ने भारी संख्या में अपने हथियार जमा किए हैं। तालिबान लड़ाके भी घर-घर जाकर हथियारों की सर्चिंग कर उसे अपने कब्जे में ले रहे हैं।

IS आतंकियों ने कार की डिक्की से दागे 6 रॉकेट
अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी से ठीक एक दिन पहले इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने 6 रॉकेट दागे हैं। इनमें से 5 रॉकेट काबुल एयरपोर्ट को टारगेट कर छोड़े गए। इसे अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, छठा रॉकेट एक रिहायशी इमारत से टकरा कर गिर गया। इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

देर शाम इन हमलों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) ने ली है। संगठन ने अपने नशर न्यूज के जरिए टेलिग्राम चैनल पर इसकी पुष्टि की है। इससे पहले 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ISIS- खुरासान ग्रुप ने ली थी। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों समेत 170 लोग मारे गए थे।

कार की डिक्की में फिट किए गए थे 6 रॉकेट लॉन्चर
टोलो न्यूज के मुताबिक, काबुल के खैर खाना इलाके से सोमवार सुबह एक कार से 6 रॉकेट दागे थे। इसमें से पांच काबुल एयरपोर्ट की ओर छोड़े गए थे, जिसे अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया। हालांकि, हमलों के बाद भी काबुल एयरपोर्ट पर विमानों का आवागमन पहले की तरह ही जारी रहा।

यहां देखिए काबुल एयरपोर्ट पर रॉकेट हमले की तस्वीरें...

अफगान मीडिया के मुताबिक, इस कार के पीछे से ही 5 रॉकेट्स को काबुल एयरपोर्ट की तरफ लॉन्च किया गया था।
अफगान मीडिया के मुताबिक, इस कार के पीछे से ही 5 रॉकेट्स को काबुल एयरपोर्ट की तरफ लॉन्च किया गया था।

हमले के वक्त एयरपोर्ट पर 45 हजार लोग मौजूद थे
अमेरिकी सेना के अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी सैनिकों और काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद करीब 45 हजार लोगों की भीड़ को टारगेट कर ये रॉकेट हमले किए गए थे। अगर यह निष्क्रिय नहीं किया जाता तो बड़ी तादाद में लोगों की जान जा सकती थी।

इन रॉकेट्स को अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। फिलहाल किसी आतंकी समूह ने इन रॉकेट को दागने की जिम्मेदारी नहीं ली है।
इन रॉकेट्स को अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। फिलहाल किसी आतंकी समूह ने इन रॉकेट को दागने की जिम्मेदारी नहीं ली है।

26 अगस्त को फिदायीन हमले में 170 लोग मारे गए
इससे पहले गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर खुरासान प्रांत के इस्लामिक स्टेट (ISIS-K) आतंकी संगठन ने फिदायीन हमला किया था। इसमें 13 अमेरिकी सैनिक समेत 170 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने शुक्रवार को नंगरहार में ISIS-K के ठिकानों पर हमला किया और रविवार को काबुल में संगठन के आत्मघाती हमलावरों को निशाना बनाया।

हमले के लिए इस्तेमाल की गई कार के पास खड़े अफगानी नागरिक।
हमले के लिए इस्तेमाल की गई कार के पास खड़े अफगानी नागरिक।

व्हाइट हाउस ने की हमले की पुष्टि
काबुल एयरपोर्ट की तरफ सोमवार सुबह दागे गए 5 रॉकेट को अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। इस हमले की पुष्टि व्हाइट हाउस ने कर दी है। प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी ने कहा कि नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जेक सलीवन और चीफ ऑफ स्टाफ रॉन क्लेन ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को इस हमले की सूचना दी है।

राष्ट्रपति को यह भी बताया गया है कि काबुल एयरपोर्ट पर चल रहे अभियान को जारी रखा जाएगा। राष्ट्रपति ने भी अपने आदेश को दोहराया है कि ग्राउंड पर मौजूद अमेरिकी सेना की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए जो भी कार्रवाई जरूरी हो वह की जाए।

कार के पास खड़ा एक तालिबानी लड़ाका। कार से हुए हमले में फिलहाल किसी क्षति की खबर नहीं है।
कार के पास खड़ा एक तालिबानी लड़ाका। कार से हुए हमले में फिलहाल किसी क्षति की खबर नहीं है।

एयरपोर्ट पर सुबह दागे गए थे 5 रॉकेट
अफगानी सरकार में काम करने वाले पूर्व सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि इन रॉकेट्स को उत्तरी काबुल से एक गाड़ी से दागा गया था। वहीं, एयरपोर्ट के मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आवाजें स्थानीय नागरिकों ने सुनीं। लोगों के मुताबिक, मिसाइल से बम के टुकड़े भी गिरे। इससे समझा जा सकता है कि कम से कम एक रॉकेट को तो नष्ट कर दिया गया है। हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जहां स्थित है वहां से उत्तर में बनी इमारतों के ऊपर धुआं उठता देखा जा सकता है। सोशल मीडिया में कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, पर इनकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

रॉकेट लॉन्चिंग के बाद कार में आग लग गई। मौके पर खड़े स्थानीय नागरिक।
रॉकेट लॉन्चिंग के बाद कार में आग लग गई। मौके पर खड़े स्थानीय नागरिक।

रविवार को अमेरिका ने किया था काबुल एयरपोर्ट के बाहर हमला
करीब 8 बजे खबर आई थी कि काबुल के ऊपर से रॉकेट्स उड़ने की आवाजें सुनी गई हैं। तब इनके टारगेट की जानकारी नहीं थी। रविवार को भी काबुल एयरपोर्ट के पास अमेरिका ने रविवार शाम एयरस्ट्राइक की। इसमें 6 बच्चों समेत 9 लोगों की मौत हुई है। (पूरी खबर यहां पढ़ें...)

आतंकियों ने कार की पिछली सीट और डिक्की के हिस्से में रॉकेट लॉन्चर फिट किया था। रॉकेट लॉन्चिंग के बाद कार पूरी तरह जल कर खाक हो गई।
आतंकियों ने कार की पिछली सीट और डिक्की के हिस्से में रॉकेट लॉन्चर फिट किया था। रॉकेट लॉन्चिंग के बाद कार पूरी तरह जल कर खाक हो गई।

अमेरिका ने बयान जारी कर बताया कि ISIS-K का एक सुसाइड बॉम्बर काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने वाला था। इससे पहले ड्रोन की मदद से एयरस्ट्राइक कर कार को उड़ा दिया गया। तालिबान ने भी बयान जारी कर घटना की पुष्टि की है। हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि आत्मघाती हमलावर गाड़ी में नहीं था।

भारत के साथ व्यापारिक और राजनीतिक संबंध रखना चाहता है तालिबान
तालिबान ने कहा है कि वह भारत के साथ अफगानिस्तान के व्यापारिक और राजनीतिक संबंध जारी रखना चाहता है। तालिबान के बड़े नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनेकजई ने कहा कि भारत इस क्षेत्र का अहम देश है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ व्यापार, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को बहुत अहमियत देते हैं।

पश्तो भाषा में जारी किए गए एक वीडियो में वे कहते देख रहे हैं कि काबुल में सरकार बनाने को लेकर कई समूहों और राजनीतिक दलों के साथ चर्चा जारी है। हम ऐसी सरकार बनाना चाहते हैं जिसमें सब तरह के लोगों की हिस्सेदारी हो।

तालिबान ने लगाए अमेरिका पर आरोप
अमेरिका ने इससे पहले शुक्रवार को भी अफगानिस्तान के नंगरहार में हमला किया था। अमेरिका ने कहा कि ये हमले काबुल एयरपोर्ट पर ब्लास्ट करने वाले ISIS-K के ठिकानों पर किए गए। हालांकि तालिबान की राय इसे लेकर अलग है। (पूरी खबर यहां पढ़ें...)

तालिबान के राजनीतिक दफ्तर के सदस्य अब्दुल्लाह वसीक ने कहा कि अमेरिका अफगानिस्तान में ISIS की मौजूदगी को बढ़ा-चढ़ाकर बता रहा है। वसीक ने यह भी कहा कि अमेरिका को अफगानिस्तान में हमले करने का कोई अधिकार नहीं है। यह दोहा एग्रीमेंट का उल्लंघन है।

तालिबान और अमेरिका ने अफगानिस्तान में शांति बनाए रखने के लिए 29 फरवरी 2020 को दोहा एग्रीमेंट साइन किया गया था। अमेरिका की तरफ से शुक्रवार को किए गए हमले के बाद वसीक ने यह स्टेटमेंट दिया है। उन्होंने कहा कि, दुनिया ने ISIS को अहम बना दिया है, यह अफगानिस्तान में टिकेगा नहीं।

ISIS-K के खिलाफ हमले जारी रखेगा अमेरिका
अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के लिए सिर्फ दो दिन बाकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सलीवन ने ऐलान किया है कि तालिबान 31 अगस्त के बाद भी लोगों को अफगानिस्तान छोड़कर जाने देगा। उन्होंने कहा कि तालिबान ने हमें वादा किया है और हम इस स्थिति में हैं कि तालिबान को उन वादों को पूरा करना पड़ेगा। (पूरी खबर यहां पढ़ें...)

हालांकि यह भी तय हो चुका है कि सितंबर से अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में मौजूद नहीं रहेगी, लेकिन अमेरिका काबुल एयरपोर्ट पर ब्लास्ट करने वाले आतंकी समूह ISIS-K के खिलाफ स्ट्राइक और दूसरे अभियान जारी रखेगा।

काबुल एयरपोर्ट पर गुरुवार को ISIS-K के हमले के बाद उठता धुआं। यहां सिलसिलेवार तीन धमाके हुए। इनमें से दो फिदायीन धमाके थे।
काबुल एयरपोर्ट पर गुरुवार को ISIS-K के हमले के बाद उठता धुआं। यहां सिलसिलेवार तीन धमाके हुए। इनमें से दो फिदायीन धमाके थे।

अफगानिस्तान में 300 अमेरिकी बाकी
सलीवन ने कहा कि अफगानिस्तान में अब सिर्फ 300 अमेरिकी रह गए हैं। इन्होंने बताया है कि ये अफगानिस्तान छोड़ना चाहते हैं। हम तेजी से काम कर रहे हैं ताकि उन्हें एयरपोर्ट तक लाया जा सके, प्लेन में बिठाया जा सके और अफगानिस्तान से बाहर निकाला जा सके।

अफगानिस्तान बॉर्डर पर फायरिंग, 2 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत
पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर रविवार रात हुई फायरिंग में पाकिस्तान के 2 सैनिकों की मौत हो गई। मुठभेड़ खैबर पख्तूनख्वा बाजौर जिले में हुई। बाजौर में स्थित पाकिस्तान के मीलिट्री पोस्ट पर अफगानिस्तान की तरफ से फायरिंग की गई। इस दौरान पाकिस्तान के सैनिकों ने भी फायरिंग की।

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