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तालिबानी हुकूमत:आतंकी संगठन हक्कानी का दावा- तालिबान विरोधी लड़ाकों के लीडर अहमद मसूद साथ आने को तैयार, तालिबानियों से छीन चुके हैं 3 जिले

नई दिल्ली5 महीने पहले

तालिबान ने कहा है कि पंजशीर में लड़ाकों का नेतृत्व कर रहा अहमद मसूद उनके साथ आने को तैयार है। आतंकी संगठन हक्कानी ने यह ऐलान किया है। अगर ऐसा होता है तो अफगानिस्तान में तालिबान को रोकने वाला अब कोई नहीं होगा।

अहमद मसूद के नॉर्दर्न अलायंस ने शुक्रवार को ही तालिबान लड़ाकों से 3 जिले छीनने का ऐलान किया था। इन जिलों में तालिबानी झंडा हटाकर अफगानिस्तान का राष्ट्रीय झंडा फहरा दिया गया था। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री जनरल बिस्मिल्ला मोहम्मद ने भी सोशल मीडिया पर कहा है कि पुल-ए-हिसार, बानू और देह-ए-सलाह से तालिबान को खदेड़ दिया गया है। बिस्मिल्लाह मोहम्मद अशरफ गनी की सरकार में रक्षा मंत्री थे।

काबुल एयरपोर्ट से हर रोज उड़ सकेंगे भारत के दो विमान
अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों के वतन वापसी की राह आसान हो गई है। दरअसल, काबुल एयरपोर्ट से भारत को रोजाना दो विमानों के संचालन की अनुमति मिल चुकी है। अमेरिकी और उत्तरी अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) फोर्स ने इसकी अनुमति शनिवार को दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अब वे जल्द ही सभी भारतीयों को वापस लाएंगे। यहां अभी 300 भारतीयों के फंसे होने की जानकारी है।

भारत का एक सी-17 विमान काबुल में और दूसरा पड़ोसी देश काजिकिस्तान में स्टैंडबाई पर है। अब लोगों को 2 या 3 बैच में निकाला जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, चार बस एयरपोर्ट पहुंची हैं। जल्द ही ये लोग भारत के लिए उड़ान भर सकते हैं।

तालिबान के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं पंजशीर के लड़ाके
तालिबानी भी पंजशीर मामले को जल्दी हल करने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि पंजशीर के लड़ाकों को शांत नहीं किया गया तो उन्हें सरकार चलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। पंजशीर अफगानिस्तान का एकमात्र ऐसा प्रांत है, जिसपर तालिबान आजतक अपना कब्जा नहीं कर पाया है।

सूत्रों के मुताबिक, तालिबान के वार्ताकार अहमद मसूद से लगातार सरकार में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है। हक्कानी के दावों की भी अभी पुष्टि नहीं हुई है।

हथियारों के साथ तैनात नॉर्थन अलायंस का लड़ाका। उनके पास लड़ाई के हर साधन मौजूद हैं।
हथियारों के साथ तैनात नॉर्थन अलायंस का लड़ाका। उनके पास लड़ाई के हर साधन मौजूद हैं।

तालिबान ने 70 सिखों और हिंदुओं को एयरपोर्ट से लौटाया
तालिबान ने शनिवार को भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान में सवार होने से 70 अफगान सिखों और हिंदुओं के एक जत्थे को रोक दिया है। उन्हें काबुल एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया। इसमें अफगानिस्तान संसद के दो अल्पसंख्यक सदस्य भी शामिल हैं। लड़ाकों ने उन्हें साफ शब्दों में कहा कि वे अफगानी हैं और देश नहीं छोड़ सकते।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विश्व पंजाबी संगठन (WPO) के अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह साहनी ने बताया कि भारत लौटने के लिए अफगान सिखों और हिंदुओं का यह पहला जत्था शुक्रवार से 12 घंटे से अधिक समय से हवाई अड्डे के बाहर इंतजार कर रहा था। तालिबान लड़ाकों ने उन्हें IAF के विमान में चढ़ने से रोक दिया और कहा कि चूंकि वे अफगानी हैं, इसलिए वे देश नहीं छोड़ सकते। समूह काबुल स्थित गुरुद्वारे में लौट आया है। साहनी ने कहा, अल्पसंख्यक सांसद नरिंदर सिंह खालसा और अनारकली कौर मानोयार भी इस समूह का हिस्सा थे।

अमेरिका ने अपने नागरिकों से काबुल एयरपोर्ट न जाने का निर्देश दिया
अमेरिका ने अपने नागरिकों को काबुल एयरपोर्ट से दूर रहने का निर्देश दिया है। अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकियों से कहा है कि एयरपोर्ट के हालात ठीक नहीं हैं। यहां गोलियां चल रही हैं और अफरातफरी का माहौल है। अमेरिकी नागरिकों से अपील है कि वे अभी काबुल एयरपोर्ट के आसपास भी न जाएं। एयरपोर्ट के हालात सुधरने के बाद सरकार फिर से नए निर्देश जारी करेगी।

अफगानिस्तान में फिलहाल 6 हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं।इनमें कई काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा संभाले हुए हैं।
अफगानिस्तान में फिलहाल 6 हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं।इनमें कई काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा संभाले हुए हैं।

UAE भागे अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी के भाई ने तालिबानियों से हाथ मिलाया
अफगानिस्तान से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भागे राष्ट्रपति अशरफ गनी के भाई हशमत गनी अहमदजई ने तालिबान के साथ हाथ मिला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने आज काबुल में आतंकी खलील हक्कानी से मिलकर तालिबान का दामन थाम लिया। खलील हक्कानी पर अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का इनाम रखा हुआ है और वह मोस्ट वांटेड है। खलील हक्कानी, जलालउद्दीन हक्कानी का भाई है। हक्कानी नेटवर्क ने अफगानिस्तान में कई बड़े हमले किए थे और भारतीय हितों को भी निशाना बनाया था।

हशमत गनी तालिबान के वित्तीय मामले संभाल सकते हैं या वित्त विभाग से जुड़ सकते हैं। हशमत गनी पहले से ही तालिबान के संपर्क में हैं। काबुल में जब तालिबान आए थे तो उन्हें सुरक्षा भी मुहैया कराई थी और उनकी लूटी गई रेंजरोवर कार भी लौटाई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बारे में लिखा है।

तालिबानी जिन 150 लोगों को ले गए, उन सभी को छोड़ा
सरकारी सूत्रों ने बताया कि काबुल में फ्लाइट का इंतजार कर रहे सभी भारतीय सुरक्षित हैं। उन्हें लंच ऑफर किया गया था और अब वे काबुल एयरपोर्ट के लिए निकल गए हैं। इन लोगों में शामिल भारतीयों की अब काबुल एयरपोर्ट से जल्द वतन वापसी की उम्मीद है। तालिबानी काबुल एयरपोर्ट के पास से भारतीयों समेत 150 लोगों को अपने साथ ले गया था। ये साफ नहीं हो पाया था कि इन लोगों को ले जाने के पीछे तालिबान का मकसद क्या था, लेकिन भास्कर के सूत्रों ने पहले ही बताया था कि सभी लोग सुरक्षित हैं।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रेसिडेंट मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि काबुल में गुरुद्वारे में जो 300 सिख फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं, वे सभी सुरक्षित हैं। किडनैपिंग जैसा कोई वाकया नहीं हुआ है। ऐसी कोई भी खबर गलत है।

इससे पहले तालिबान के प्रवक्ता अहमदुल्लाह वासे ने भी 150 लोगों को अगवा करने की बात को गलत बताया था। तालिबान का कहना था कि लोगों को अगवा नहीं किया बल्कि सुरक्षित एयरपोर्ट पहुंचाने की कोशिश की है। इस घटना को लेकर भास्कर के काबुल से जुड़े सूत्रों का भी कहना था कि जिन लोगों को तालिबान लेकर गया, उन्हें दस्तावेजों की जांच के लिए ले जाया गया होगा। वहीं काबुल के एक विश्वस्त पत्रकार ने इसे फेक न्यूज बताया था। इस बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से पूछने पर उन्होंने भास्कर को बताया था कि फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं कर सकते।

अफगानिस्तान में फंसे हैं 1000 भारतीय
अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के सभी अधिकारियों को एयरलिफ्ट कर लिया गया है, लेकिन काबुल समेत दूसरे शहरों में अभी 1000 भारतीयों के और फंसे होने का अनुमान है। विदेश मंत्रालय इनकी लोकेशन और स्थिति का पता लगाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि सभी लोगों ने भारतीय दूतावास से संपर्क नहीं किया है।

4 दिन पहले 120 भारतीयों की वतन वापसी हुई थी
काबुल से भारतीयों को एयरफोर्स के विमानों में लाया जा रहा है। पिछले मंगलवार को 120 से ज्यादा लोगों की ग्लोबमास्टर C-17 से वतन वापसी हुई थी। इनमें काबुल स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी, ITBP के जवान और अन्य लोग शामिल थे। इससे पहले सोमवार को भी 45 लोगों को एयरलिफ्ट किया गया था।

तालिबानी सरकार बनाने की कवायद तेज, मुल्ला अब्दुल गनी बरादर काबुल पहुंचा
तालिबान का को-फाउंडर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर काबुल पहुंच चुका है। वह तालिबानी सरकार बनाने के लिए जिहादी नेताओं और अफगानी पॉलिटिशियन से भी बात करेगा। तालिबान ये पहले ही कह चुका है कि अफगानिस्तान में लोकतंत्र नहीं चलेगा बल्कि शरिया कानून लागू होगा। पूरी खबर पढ़िए...

तालिबान की आहट से ही सहम जाते हैं काबुल के लोग
काबुल में फंसे लोग तालिबान से इस कदर खौफ खाए हुए हैं कि सड़क पर कोई गाड़ी नजर आते ही वे बाथरूम की तरफ दौड़ पड़ते हैं। घरों की लाइट और मोबाइल फोन बंद कर वे खुद को बाथरूम में कैद कर लेते हैं। बच्चों की आवाज न सुनाई दे, इसलिए उनके मुंह पर कपड़ा बांध देते हैं।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक काबुल में फंसे एक परिवार के रिश्तेदार ने ये हाल बयां किया है। इस परिवार के दो लोगों का तालिबान ने बीते सालों में कत्ल कर दिया था। ऐसे में तालिबान की आहट सुनते ही पूरा परिवार बुरी तरह डर जाता है। काबुल में फंसे ऐसे परिवारों के जो रिश्तेदार दूसरे देशों में हैं, वे अपनी-अपनी सरकारों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

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