• Hindi News
  • International
  • Taliban Afghanistan Kabul Capture LIVE Update; US Military Withdrawal | Pakistan Imran Khan, Indian Evacuation Latest News

तालिबानी हुकूमत:तालिबान बोला- अफगानिस्तान से काबिल लोगों को न ले जाए अमेरिका, 31 अगस्त तक हर हाल में पूरा करे रेस्क्यू ऑपरेशन

नई दिल्ली2 महीने पहले

तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। मुजाहिद ने एक बार फिर अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि नाटो की सेना 31 अगस्त तक किसी भी हाल में अफगानिस्तान छोड़कर चली जाए। हम इसकी समय सीमान बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उसने अमेरिका से अनुरोध किया कि वो अफगानिस्तान के काबिल लोगों को ना लेकर जाए।

इस बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा है कि 31 अगस्त के डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हमें विश्वास है कि हम इसे महीने के अंत तक इसे पूरा कर लेंगे।

मुजाहिद ने कहा कि अमेरिका को डॉक्टरों, इंजीनियरों और पढ़े लिखे इलीट वर्ग को अपने देश आने के लिए प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए।उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर अफरातफरी के माहौल की वजह से वो अफगान नागरिकों को एयरपोर्ट नहीं जाने दे रहे हैं। तालिबान ने अफगान नागरिकों से कहा है कि वो देश छोड़कर ना जाएं। मुजाहिद ने कहा कि महिलाओं को अभी अपनी सुरक्षा की वजह से घरों में ही रहना चाहिए।

तालिबान ने काबुल में संयुक्त राष्ट्र के कुछ परिसरों पर कब्जा किया, आवाजाही पर रोक लगाई
तालिबान ने काबुल स्थित संयुक्त राष्ट्र के परिसरों पर कब्जा कर लिया है। तालिबानियों ने यहां ऑफिस की तलाशी ली और तोड़फोड़ भी की है। यहां आने-जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। लड़ाकों ने वहां तैनात गार्ड से एक कमांडर और उसके आदमियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की भी मांग की है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने संयुक्त राष्ट्र की एक आंतरिक रिपोर्ट के हवाले से ये खबर दी है।

तालिबान महिलाओं के काम करने पर स्थायी रोक नहीं लगाएंगे
उन्होंने कहा कि तालिबान महिलाओं के काम करने पर स्थायी रोक नहीं लगाएंगे। जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि तालिबान पंजशीर के मुद्दे का शांतीपूर्ण समाधान चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि तालिबान ने किसी को भी निशाना नहीं बनाया है और घरों की तलाशी नहीं ली गई है। मुजाहिद ने कहा कि हम एक नई व्यवस्था, नई सरकार बनाना चाहते हैं और अफगानिस्तान का राष्ट्र निर्माण करना चाहते हैं। उन्होंने काबुल से सभी बैरियरों को हटाए जाने और बुधवार से बैंकों के खुलने की घोषणा भी की।

देश छोड़कर गए लोग लौट आएं, दूतावास को देंगे पूरी सुरक्षा
अमेरिकी खुफिया एजेंसी के प्रमुख से मुल्ला बरादार की मीटिंग के सवाल पर उन्होंने किसी भी जानकारी से इनकार किया। मुजाहिद ने देश छोड़ चुके अफगानी नेताओं को लेकर कहा कि हमारी किसी से दुश्मनी नहीं है और न हमनें ऐसे लोगों की कोई सूची ही बनाई है। जो लोग देश छोड़कर बाहर गए हैं, वे लौट आएं। हमनें अतीत की सभी बातों को भूला दिया है। मुजाहिद ने दूसरे देशों के दूतावास को सुरक्षा का आश्वासन देते हुए कहा, हम नहीं चाहते कि विदेशी दूतावास बंद हों या काम बंद करें। हमने उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- काबुल में आतंकी हमले का खतरा, 31 अगस्त तक सेना वापस आ जाएगी
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने G7 के देशों से कहा है कि 31 अगस्त तक किसी भी सूरत में उनकी सेना अफगानिस्तान छोड़ देगी। बाइडेन ने कहा, काबुल एयरपोर्ट का संचालन फिलहाल हमारी सेना देख रही है, लेकिन वहां स्थिति ऐसी है कि कभी भी उन पर बड़ा आतंकवादी हमला हो सकता है। इसे देखते हुए हमारा वहां से तय समय के मुताबिक निकलना बेहतर होगा।

बाइडेन का यह बयान तब आया है, जब तालिबानी प्रवक्ता पिछले दो दिनों से अमेरिका को लगातार तय समय पर देश छोड़ने की चेतावनी दे रहे हैं। G7 के देश अमेरिका से 31 अगस्त के बाद भी वहां सेना रखने की गुजारिश कर चुके हैं। कई देशों को यह लग रहा है कि 31 अगस्त तक अफगानिस्तान छोड़ने वाले लोगों को बाहर निकालना मुश्किल काम है।

G7 के देश अमेरिका से 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में सेना रखने की गुजारिश कर चुके हैं। उनका मानना है कि तय तारीख तक लोगों का रेस्क्यू मुश्किल है। (फाइल फोटो)
G7 के देश अमेरिका से 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में सेना रखने की गुजारिश कर चुके हैं। उनका मानना है कि तय तारीख तक लोगों का रेस्क्यू मुश्किल है। (फाइल फोटो)

G7 देशों की तालिबान को दो टूक, 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में फंसे लोगों को निकालेंगे
दुनिया की 7 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों (G7) ने सोमवार को तालिबान से साफ शब्दों में कहा के वे 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में फंसे लोगों को निकालने का काम जारी रखेंगे। तालिबान से बस इतना कहना है कि वो सुरक्षित रास्ता दे। समूह में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान के देश शामिल हैं।

समूह ने कहा कि हम अफगानिस्तान के लोगों के सुरक्षित जीवन के लिए प्रतिबद्ध हैं। अफगानिस्तान के लोग सम्मान, शांति और सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार रखते हैं। हमारी कोशिश होगी कि महिलाओं के अधिकारों समेत आतंकवाद और मानवाधिकार पर तालिबान को जवाबदेह बनाया जाएगा।

इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय नए सिरे से अपने प्रयास शुरु करेगा। संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों का भी हमारा पूरा समर्थन रहेगा। वहीं यूरोपीय संघ ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने तक काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सेना तैनात रखने की मांग की है।

पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और हक्कानी नेटवर्क का आतंकी तालिबान सरकार में शामिल
अफगानिस्तान में तालिबानी शासकों के चेहरे सामने आ गए हैं। तालिबान ने मंगलवार को देश को चलाने के लिए 12 सदस्यों वाली एक काउंसिल का गठन किया है। इनमें 7 नामों का ऐलान कर दिया गया है। वहीं पांच नाम अभी तय होने बाकी हैं।

काउंसिल में अब्दुल गनी बरादर (तालिबान का सह-संस्थापक), मुल्ला याकूब (तालिबान संस्थापक के बेटे), खलील-उर-रहमान हक्कानी (हक्कानी नेटवर्क-आतंकी समूह), डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला (पूर्व प्रधानमंत्री), हामिद करजई (पूर्व राष्ट्रपति), हनीफ अतमार और गुलबुद्दीन हेकमतयार का नाम शामिल है। सूत्रों का कहना है कि 'राष्ट्रपति और अमीरात के अलावा तालिबान 12 सदस्यीय काउंसिल के साथ अफगानिस्तान पर शासन करेगा।' हक्कानी अमेरिका के मोस्टवांटेड आतंकियों की लिस्ट में शामिल है। उस पर 50 लाख डॉलर का इनाम भी है।

तालिबानी लड़ाकों का सफाया करने वाले गुल आगा शेरजई वित्तमंत्री बनाए गए
तालिबान ने मंगलवार को अपनी अंतरिम सरकार के कई मंत्रियों का ऐलान किया है। खास बात यह है कि संगठन ने किसी समय तालिबान के कट्‌टर विरोधी रहे गुल आगा शेरजई को वित्तमंत्री नियुक्त किया है। शेरजई पहले कंधार और फिर नंगरहार के गवर्नर रहे हैं।

तालिबान के खिलाफ लड़ाई में वे CIA के प्रमुख सहयोगी थे। उन्हें तालिबान का कसाई भी कहा जाता है। कंधार का गवर्नर रहते हुए उन्होंने तालिबान के सफाए में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने नंगरहार का गवर्नर रहते हुए सड़क निर्माण कराए थे, जिसकी वजह से उन्हें अफगानिस्तान का बुलडोजर कहा जाता है। कुछ दिन पहले ही शेरजई ने तालिबान के प्रति निष्ठा की कसम खाई थी। वे अफगानिस्तान के ऐसे बड़े नेताओं में हैं, जो पहले तालिबान के कट्टर विरोधी थे, लेकिन अब तालिबान के साथ हैं।

अमेरिका और तालिबान के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके मुताबिक 31 अगस्त तक तालिबान पूर्ण सरकार नहीं बना सकता, इसलिए अंतरिम सरकार बनाई गई है। -फाइल फोटो
अमेरिका और तालिबान के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके मुताबिक 31 अगस्त तक तालिबान पूर्ण सरकार नहीं बना सकता, इसलिए अंतरिम सरकार बनाई गई है। -फाइल फोटो

सद्र इब्राहिम को अंतरिम गृह मंत्री बनाया
तालिबान ने मुल्ला सखाउल्लाह को कार्यवाहक शिक्षा मंत्री और अब्दुल बारी को उच्च शिक्षा मंत्री बनाया है। सद्र इब्राहिम को अंतरिम गृह मंत्री बनाया गया है। वहीं, मुल्ला शिरीन को काबुल का गवर्नर और हमदुल्ला नोमानी को काबुल का मेयर बनाया गया है।

पुतिन ने अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट को लेकर किया आगाह
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद इस्लामिक स्टेट (ISIS) को लेकर आगाह किया है। रूसी राष्ट्रपति ने सोमवार को मध्य एशियाई देशों के सैन्य संगठन CSTO के एक शिखर सम्मेलन में ये बात कही। ये इमरजेंसी वर्चुअल मीटिंग अफगानिस्तान की स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। बैठक में रूस के अलावा ताजिकिस्तान, आर्मीनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं ने हिस्सा लिया।

बैठक को लेकर रूसी सरकार के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि, 'सदस्य देशों ने माना कि ये जरूरी है कि चरमपंथी इस्लामी तत्वों को अपने इलाके में घुसपैठ करने से दूर रखा जाए।' प्रवक्ता ने कहा, 'रूसी राष्ट्रपति ने खास तौर पर इस्लामिक स्टेट को लेकर चिंता जताई जो अफगानिस्तान में हमेशा से मजबूत रहे हैं। पुतिन ने CSTO को इससे खतरा बताया है।'

प्रवक्ता से जब पूछा गया कि रूस क्या अफगानिस्तान में किसी तरह की मध्यस्थता करेगा तो उनका जवाब था- 'ऐसा बिल्कुल नहीं है।' उन्होंने कहा राष्ट्रपति पुतिन ने बैठक में कहा कि अभी ये जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद और जी-20 देश आपस में तालमेल कर अफगानिस्तान के संकट का समाधान निकालें।

PM मोदी ने अफगानिस्तान के हालात पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन से की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अफगानिस्तान की ताजा स्थिति पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, अपने दोस्त राष्ट्रपति पुतिन के साथ अफगानिस्तान के ताजा हालात पर विस्तार से और उपयोगी चर्चा की है। हमने कोरोना के खिलाफ भारत और रूस के बीच सहयोग बढ़ाने और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा की है। पीएम ने इससे पहले सोमवार को जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से भी बातचीत की थी।

तालिबान का दावा-अंदराब में भारी मात्रा में हथियार कब्जाए
तालिबान का दावा है कि उसने अंदराब में भारी मात्रा में हथियार कब्जाए हैं। तालिबान ने अंदराब में कई मिलीशिया लड़ाकों को पकड़ने का दावा भी किया है। तालिबान और पंजशीर के बीच गंभीर वार्ता चल रही है। तालिबान के सामने चुनौती ये है कि उसे पंजशीर को बिना खून खराबे के जीतना है। अंदराब में बच्चों और बुजुर्गों पर तालिबान के हमले की तस्वीरें भी आई हैं।

तालिबान का दावा है कि उसने अंदराब में भारी मात्रा में हथियार कब्जाए हैं।
तालिबान का दावा है कि उसने अंदराब में भारी मात्रा में हथियार कब्जाए हैं।

पंजशीर के पहाड़ों में भीषण लड़ाई जारी, CIA चीफ ने मुल्ला बरादर के साथ की सीक्रेट मीटिंग
पंजशीर के आसपास तालिबान और विद्रोही गुट के बीच भीषण लड़ाई चल रही है। पंजशीर के लड़ाकों के पहाड़ों के ऊपर होने के कारण तालिबान पर वे भारी पड़ते दिख रहे हैं। हालांकि तालिबानी लड़ाके भी जमकर फायरिंग और रॉकेट लॉन्चर दागते दिख रहे हैं।

आज तालिबान सूत्रों ने दावा किया है कि पंजशीर की कई अहम चौकियों पर तालिबान पहुंच गए हैं। ये भी दावा किया जा रहा है कि पंजशीर की मोबाइल कनेक्टिविटी काट दी गई है। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के निदेशक विलियम बर्न्स और तालिबान नेता मुल्ला बरादर के बीच सोमवार को काबुल में मुलाकात हुई है।

एक ब्रितानी अखबार ने दावा किया है कि अहमद मसूद तालिबान से वार्ता करके आत्मसमर्पण कर सकते हैं। हालांकि, नॉर्दर्न अलायंस ने इसका खंडन किया है। दैनिक भास्कर को सूत्रों ने बताया कि तालिबान और पंजशीर के बीच वार्ता चल रही है।

भारत के रेस्क्यू को 'ऑपरेशन देवी शक्ति' नाम मिला

भारत सरकार ने अफगानिस्तान में चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को मंगलवार को नाम दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि इसे 'ऑपरेशन देवी शक्ति' नाम दिया गया है। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही भारतीय वायुसेना को सलाम किया है। भारत सरकार अफगानिस्तान से अब तक 800 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू कर चुकी है।

अहमद मसूद बोले- जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं
पंजशीर में अहमद मसूद ने आम लोगों को संबोधित किया है। वहां के लोगों ने उनके प्रति समर्थन जताया है। मसूद ने लोगों से कहा कि हम जान दे देंगे, लेकिन अपनी जमीन और सम्मान से समझौता नहीं करेंगे। बताया जा रहा है कि तालिबान और पंजशीर के बीच बातचीत भी चल रही है। पंजशीर के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उनके पास भारी मात्रा में हथियार उपलब्ध नहीं है।

यह इलाका चारों तरफ से तालिबान के कंट्रोल वाले इलाकों से घिरा हुआ है। माना जा रहा है कि पंजशीर लंबे समय तक तालिबान का मुकाबला नहीं कर पाएगा। तालिबान के लड़ाके भी पंजशीर के लोगों को सबक सिखाना चाहते हैं। पंजशीर के नजदीक बगलान प्रांत के गांवों और कस्बों में अलग-अलग लड़ाइयां चल रही हैं, जिनमें आम लोग मारे गए हैं और 3 हजार से अधिक लोग बेघर हुए हैं।

काबुल में लड़कियों का पहला स्कूल रवांडा पहुंचा
तालिबान के खौफ से बड़ी मात्रा में लोगों का पलायन जारी है। काबुल एयरपोर्ट के जरिए अब तक 48 हजार से ज्यादा लोग देश छोड़कर जा चुके हैं। सोमवार को 24 घंटों में ही 14 हजार से ज्यादा लोग अफगानिस्तान ने पलायन कर गए। अफगानिस्तान में लड़कियों का पहला बोर्डिंग स्कूल भी देश से बाहर जा चुका है। स्कूल ऑफ लीडरशिप अफगानिस्तान की संस्थापक शबाना बासिज रासिख ने ट्विटर के जरिए बताया है कि वो अपनी छात्राओं को लेकर रवांडा पहुंच गई हैं।

25 साल की शबाना बासिज रासिख लड़कियों की शिक्षा की हिमायती हैं। -फाइल फोटो
25 साल की शबाना बासिज रासिख लड़कियों की शिक्षा की हिमायती हैं। -फाइल फोटो

शबाना के मुताबिक पिछले सप्ताह वो अपनी छात्राओं, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को लेकर काबुल से कतर पहुंच गईं थीं। उनके साथ करीब 250 लोग थे। अब वो अपने पूरे स्कूल को लेकर कतर से रवांडा जा रही हैं, जहां उनकी छात्राएं इस साल के अपने सेमेस्टर को पूरा करेंगी। शबाना ने कतर और रवांडा की सरकार का शुक्रिया अदा किया है और कहा है कि अमेरिका ने उनके दल के बचाव अभियान में पूरा सहयोग किया। अब उनका स्कूल रवांडा से ही चलेगा, लेकिन शबाना का कहना है कि ये स्कूल स्थायी तौर पर रवांडा में नहीं रहेगा और उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में कभी न कभी वो अपने देश लौट पाएंगी। शबाना ने कुछ दिन पहले अपने स्कूल से जुड़े सभी रिकॉर्ड जला दिए थे, ताकि तालिबान को ये पता न चल सके कि उनके स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियां किन परिवारों की हैं।

अफगानिस्तान से अपना प्लेन हाईजैक होने की बात से पलटा यूक्रेन

पहले रूस की न्यूज एजेंसी तास ने यूक्रेन के उप विदेश मंत्री येवगेनी येनिन के हवाले से कहा था कि हथियारबंद लोगों ने यूक्रेन के प्लेन को हाईजैक कर लिया है।- फाइल फोटो।
पहले रूस की न्यूज एजेंसी तास ने यूक्रेन के उप विदेश मंत्री येवगेनी येनिन के हवाले से कहा था कि हथियारबंद लोगों ने यूक्रेन के प्लेन को हाईजैक कर लिया है।- फाइल फोटो।

यूक्रेन ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से अपना विमान हाईजैक किए जाने की खबर को नकार दिया है। इससे पहले रूस की न्यूज एजेंसी तास ने यूक्रेन के उप विदेश मंत्री येवगेनी येनिन के हवाले से कहा था कि हथियारबंद लोगों ने यूक्रेन के नागरिकों को अफगानिस्तान से बाहर निकाल रहे प्लेन को हाईजैक कर लिया है और इसे ईरान की तरफ ले जाया गया है। इसके बाद ईरान ने प्लेन हाईजैक की खबर का खंडन किया था। उसका कहना था कि प्लेन ईंधन भरवाने के लिए ईरान के मशहद शहर आया था। यूक्रेन का कहना है कि तीन उड़ानों से 256 लोगों को काबुल से निकाला गया है, जिनमें अफगानिस्तान में काम करने वाले यूक्रेन के नागरिकों के अलावा अफगानिस्तान के नागरिक भी शामिल हैं।

यूक्रेन के उप विदेश मंत्री बोले- विमान में हमारे लोग नहीं
इससे पहले यूक्रेन के उप विदेश मंत्री येनिन ने कहा, 'रविवार को कुछ लोगों ने हमारा प्लेन हाईजैक कर लिया। मंगलवार को इसे अज्ञात यात्रियों के साथ ईरान ले जाया गया है, इसमें यूक्रेन के वे लोग नहीं हैं, जिन्हें एयरलिफ्ट करने के लिए हमने विमान भेजा था। अपने लोगों को निकालने की हमारी अगली तीन कोशिशें भी नाकाम रही हैं, क्योंकि हमारे लोग काबुल एयरपोर्ट तक नहीं पहुंच पाए।'

तालिबान ने कंक्रीट ब्लॉक हटाए, सड़क निर्माण तेज किया
तालिबान ने काबुल में बम धमाकों के असर को कम करने और हमले रोकने के लिए पूरे शहर में कंक्रीट के ब्लॉक लगाए गए थे। काबुल नगर प्रशासन का कहना है कि अब इन कंक्रीट ब्लॉक को हटाया जा रहा है। इससे पहले राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी कहा था कि वो इन ब्लॉक को हटवा देंगे। उनके कार्यकाल के दौरान कुछ ब्लॉक हटवाए भी गए थे। लेकिन जैसे-जैसे सुरक्षा हालात खराब हुए और ब्लॉक लगा दिए गए। यहां हमले होने के कारण ब्लॉक लगाए गए थे। कंक्रीट ब्लॉक हटाए जाने से काबुल में लोगों का आना जाना आसान होगा।

तालिबान का दावा है कि उसके प्रशासन में काबुल सुरक्षित है। काबुल पर अधिकतर हमले तालिबान ने ही किए थे। तालिबान ने काबुल कंधार हाइवे के निर्माण कार्य भी तेज कर दिया है। तालिबान ये दिखाना चाहते हैं कि उनके शासन में देश अपनी रफ्तार से चल रहा है। कंधार तालिबान का गढ़ है। कंधार से काबुल जाने वाला हाइवे तालिबान के लिए अहम होगा। कंधार से काबुल करीब 500 किलोमीटर दूर है, सड़क मार्ग से इस सफर में करीब 10-11 घंटे लगते हैं।

तालिबान ने गजनी का एंट्री गेट क्रेन से तोड़ा
अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान अब वहां की हेरिटेज साइट्स को निशाना बना रहा है। अफगानिस्तान के हालात पर नजर रख रहे लोगों के ट्टिवर अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि तालिबानियों ने गजनी प्रांत के एंट्री गेट को क्रेन से तोड़ दिया है। ये गेट इस्लामी साम्राज्य की स्थापना की याद में बनाया गया था। गजनी का गेट तोड़ने पर तालिबान ने सफाई दी है। तालिबान की दलील है कि गेट लड़ाई में जर्जर हो गया था और किसी भी समय गिर सकता था।

दूसरी तरफ खबर है कि तालिबान ने एक और इलीट यूनिट बनाई है, जिसका नाम विक्ट्री फोर्स या 'फतह' रखा है। तालिबान के हाथ लगे अमेरिकी हथियारों और सैन्य उपकरणों से इस फोर्स को लैस किया गया है। फिलहाल इसकी यूनिट को काबुल में तैनात किया गया है।

तालिबान की नई विक्ट्री फोर्स की ये तस्वीर अफगानिस्तानी मीडिया में शेयर गई है।
तालिबान की नई विक्ट्री फोर्स की ये तस्वीर अफगानिस्तानी मीडिया में शेयर गई है।

अमरुल्लाह सालेह का दावा- तालिबान बच्चों को ढाल बना रहा
पंजशीर की अंदराब घाटी में पंजशीर के लड़ाके तालिबान से जंग लड़ रहे हैं। इस बीच अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्लाह ने कहा है कि तालिबान ने अंदराब घाटी में खाने और ईंधन की सप्लाई रोक दी है। यहां स्थिति बेहद खतरनाक है। हजारों महिलाओं और बच्चों को पहाड़ों की तरफ भागना पड़ा है। पिछले दो दिनों से तालिबान के लोग बच्चों और बुजुर्गों को अगवा उन्हें अपनी ढाल बना रहे हैं।

अंदराब में तालिबान और अफगान फौज में भीषण लड़ाई; 50 तालिबानी ढेर
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से बचे एकमात्र पंजशीर में लड़ाई खतरनाक मोड़ पर जाती दिख रही है। पंजशीर घाटी अफगानिस्तान के उन चंद इलाकों में है, जहां अभी तालिबान का कब्जा नहीं हुआ है। पंजशीर से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि अंदराब में हुई लड़ाई में 50 से ज्यादा तालिबानी लड़ाके मारे गए हैं और 20 से ज्यादा लड़ाकों को बंधक बनाया गया है।

काबुल से 78 लोग भारत पहुंचे, गुरु ग्रंथ साहिब की 3 प्रतियां भी आईं
अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के बीच काबुल से भारतीयों को सुरक्षित निकालने का सिलसिला जारी है। इसे ऑपरेशन देवी शक्ति नाम दिया गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि इस मिशन के तहत आज 78 लोगों को लेकर एयर इंडिया का AI-1956 विमान तजाकिस्तान की राजधानी दुशाम्बे से दिल्ली पहुंचा है। इनमें 25 भारतीय नागरिक और 46 अफगानी सिख भी शामिल हैं। इस विमान में काबुल के गुरुद्वारों से निकाले गए तीन गुरु ग्रंथ साहिब भी लाए गए हैं। इन गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप को संभालने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वी मुरलीधरन और BJP नेता आरपी सिंह पहुंचे थे जो गुरु ग्रंथ साहिब को सिर पर रखकर एयरपोर्ट से बाहर लाए। गुरु ग्रंथ साहिब की इन प्रतियों को दिल्ली के एक गुरुद्वारे में रखा जाएगा।

गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियों को एयरपोर्ट से गुरुद्वारे ले जाने के लिए खास पालकी साहिब भी तैयार की गई।
गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियों को एयरपोर्ट से गुरुद्वारे ले जाने के लिए खास पालकी साहिब भी तैयार की गई।
गुरु ग्रंथ साहिब को नगर-कीर्तन के साथ ले जाने के एयरपोर्ट पर सिख समुदाय के लोगों की भारी भीड़ जमा थी।
गुरु ग्रंथ साहिब को नगर-कीर्तन के साथ ले जाने के एयरपोर्ट पर सिख समुदाय के लोगों की भारी भीड़ जमा थी।

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति की हत्या की साजिश का दावा
तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान छोड़ चुके पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के भाई हशमत गनी ने दावा किया है कि अशरफ गनी की हत्या की साजिश थी। हशमत का कहना है कि काबुल में खूनखराबा और माहौल खराब करने के मंसूबे थे, ताकि सेना के कुछ रिटायर्ड लोग अपने इरादे पूरे कर सकें। उन्होंने मेरी हत्या की साजिश भी रची थी। हशमत ने अंग्रेजी न्यूज चैनल WION से बातचीत में ये दावा किया है।

हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि अशरफ गनी की हत्या कौन करना चाहता था? इस सवाल के जवाब में अशरफ ने कहा कि समय आने पर ये खुलासा खुद अशरफ गनी ही करेंगे। हशमत ने खुद के तालिबान में शामिल होने की खबरों को भी खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने तालिबानी हुकूमत कबूल की है, लेकिन उनके साथ शामिल होना कबूल नहीं किया है।

अपडेट्स

  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने आज G-7 की इमरजेंसी बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इसमें वे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में सेना को रोकने के लिए कहेंगे, ताकि लोगों को काबुल एयरपोर्ट से निकालने के लिए और समय मिल सके।
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) अफगानिस्तान की स्थिति पर चर्चा के लिए आज जिनेवा में विशेष सत्र आयोजित करेगी। UNHRC के 47 सदस्य देशों में से 29 ने इस विशेष सत्र का समर्थन किया है।
  • अमेरिका ने सोमवार को काबुल से 10,900 लोगों को निकाला है। 14 अगस्त से अब तक अमेरिकी सेना 48,000 लोगों को एयरलिफ्ट कर चुकी है। अमेरिका ने ये भी बताया है कि जुलाई के आखिर से अब तक करीब 53,000 लोगों को रीलोकेट किया जा चुका है।

भारत में अफगानी रिफ्यूजियों का डर- CAA लागू हुआ तो रहना मुश्किल होगा, पूरी खबर पढ़िए...

तालिबान की अमेरिका को धमकी- 31 अगस्त तक अफगानिस्तान छोड़ दें
भारत समेत दुनियाभर के देश अफगानिस्तान से अपने नागरिकों को निकालने में लगे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी कहा था कि 31 अगस्त तक काबुल से लोगों को निकालने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इस बीच तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने एक बयान जारी किया और धमकी भरे लहजे में कहा कि नाटो फोर्स 31 अगस्त तक काबुल एयरपोर्ट से कब्जा छोड़ दे और अपने देश लौट जाए।

तालिबानी प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि 31 अगस्त रेड लाइन थी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि उनकी फौज इस तारीख तक अफगानिस्तान से चली जाएगी। इस तारीख को आगे बढ़ाने का मतलब है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना फिर अपना कब्जा बढ़ा रही है। अगर ऐसा होता है तो अमेरिका को इसका परिणाम भुगतना होगा।

फ्रांस ने कहा- 31 अगस्त के बाद भी लोगों को निकालते रहेंगे
तालिबान की इस धमकी का फ्रांस ने जवाब दिया है। फ्रांस ने साफ कहा है कि 31 अगस्त की डेडलाइन के बाद भी हम अपने नागरिकों को काबुल से निकालने का काम जारी रखेंगें। फ्रांस का यह बयान सीधे तौर पर तालिबान को चुनौती है कि अगर उसने रेस्क्यू ऑपरेशन में अड़चनें पैदा कीं तो ठीक नहीं होगा।

काबुल एयरपोर्ट पर हमला कर सकते हैं ISIS के आतंकी
काबुल एयरपोर्ट पर भीड़ को नियंत्रित करने में लगे अमेरिकी-नाटो सैनिकों को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी ISIS के आतंकी आत्मघाती हमलों से निशाना बना सकते हैं। हमले का अलर्ट मिलने के बाद एयरपोर्ट इलाके में सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। अधिकारी भी भीड़ पर कड़ी नजर रख रहे हैं। हथियारों को डिटेक्ट करने के लिए जगह-जगह खुफिया सेंसर लगा दिए गए हैं। साथ ही अमेरिकी सेना एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक मार्ग बना रही है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने भी आतंकी खतरे को लेकर चर्चा की है।

बाइडेन की बड़ी घोषणा- जिन अफगानियों ने युद्ध में मदद की, उन्हें अमेरिका में देंगे शरण
अफगानिस्तान से सेना बुलाए जाने की घोषणा के बाद चौतरफा घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बड़ा ऐलान किया है। बाइडेन ने सोमवार को कहा कि अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जिन लोगों ने अमेरिकी सेना की मदद की है, उन्हें अमेरिका में शरण दी जाएगी। बाइडेन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक बार स्क्रीनिंग और बाकी औपचारिकताएं हो जाने के बाद हम उन अफगानियों का अपने देश में स्वागत करेंगे जिन्होंने युद्ध के दौरान हमारी मदद की थी।

तालिबान के समर्थन में आया चीन, कहा- चरमपंथी संगठन को हर मदद देंगे
तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अफगानिस्तान की आर्थिक मदद रोक दी है। इस पर चीन ने इशारों-इशारों में अमेरिका पर निशाना साधा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने अफगानिस्तान की बदतर स्थिति के लिए अमेरिका को जिम्मेदार बताया है।

वेनबिन ने कहा कि अफगानिस्तान को इस हालत में छोड़कर वॉशिंगटन वापस नहीं जा सकता। चीन युद्धग्रस्त अफगानिस्तान को मजबूत करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिका के बैंकों में मौजूद अफगान सरकार के खातों को सील कर दिया गया है। इसके अलावा अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी अफगानिस्‍तान को मिलने वाली करीब 460 मिलियन डॉलर की राशि की निकासी को रोक दिया है।

खबरें और भी हैं...