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तालिबानी हुकूमत:मसूद की सेना ने पंजशीर की पहाड़ियों में तालिबानी लड़ाकों को एम्बुश में फंसाया, रॉकेट हमले में 40 से ज्यादा दहशतगर्द ढेर

नई दिल्ली5 महीने पहले

तालिबान ने राजधानी काबुल समेत करीब पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है, लेकिन उनके लड़ाकों के लिए पंजशीर में घुसना मुश्किल हो रहा है। पंजशीर समर्थकों ने हाल ही में एक एक वीडियो जारी किया है, जिसमें पहाड़ों से तालिबान लड़ाकों पर जमकर गोलियां और रॉकेट दागे जा रहे हैं। इस लड़ाई में 40 से ज्यादा तालिबान लड़ाके मारे गए हैं, जबकि 19 को मसूद की सेना ने गिरफ्तार किया है।

वीडियो पंजशीर के खवाक जिले का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पंजशीर के लड़ाके पहाड़ों में छिपकर तालिबान लड़ाकों को अपने एम्बुश में फंसा रहे हैं। वे तालिबान लड़ाकों पर पहाड़ों से दनादन गोलियां और रॉकेट बरसा रहे हैं। पहाड़ों से घिरे इस क्षेत्र में एंट्री करना लड़ाकों के लिए मुश्किल हो रहा है। हालांकि, इस हमले में तालिबान ने भी नॉर्दर्न अलांयस की सेना को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है।

भारत ने कहा- आतंकी गतिविधियों के लिए न हो अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल
काबुल एयरपोर्ट से फ्लाइट ऑपरेशन शुरू होने पर भारत एक बार फिर से अपने लोगों को वहां से निकालेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए इसकी जानकारी दी है। बागची ने बताया कि वर्तमान में काबुल हवाई अड्डा चालू नहीं है। ऑपरेशन फिर से शुरू होते ही हम काबुल से लोगों को निकालने के लिए अपना अभियान शुरू करेंगे।

अफगानिस्तान में किस तरह की सरकार बनेगी? इस सवाल पर बागची ने कहा कि हम अटकलें नहीं लगा सकते। अफगानिस्तान में किस तरह की सरकार बन सकती है, इसके बारे में हमारे पास कोई ठोस जानकारी नहीं है। तालिबान से भारत की अगली बातचीत के रोडमैप के सवाल पर बागची ने बताया कि यह हां और ना की बात नहीं है। हमारा उद्देश्य है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह की आतंकी गतिविधियों के लिए न हो।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची।

काबुल एयरपोर्ट से उड़ानें जल्द शुरू होने की उम्मीद
अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत के बीच काबुल एयरपोर्ट से उड़ानें जल्द शुरू होने की उम्मीद है। कतर से आई एक टेक्निकल टीम आतंकी हमले से एयरपोर्ट पर हुए नुकसान का जायजा ले रही है। बता दें 31 अगस्त को अमेरिकी सेना के काबुल एयरपोर्ट से कब्जा छोड़ने के बाद वहां से उड़ानों का संचालन बंद है। अमेरिका समेत दूसरे देश काबुल एयरपोर्ट से सेना के विमानों से अपने-अपने लोगों को एयरलिफ्ट कर रहे थे, लेकिन 31 अगस्त से काबुल एयरपोर्ट तालिबान के कब्जे में है और अब एयरपोर्ट को फिर से शुरू करने से पहले तकनीकी खामियां दूर की जा रही हैं।

फोटो अमेरिका के शेनटिली शहर में स्थित एयरपोर्ट पर पहुंचे अफगानी परिवार की है। अमेरिका ने कहा है कि जो अफगानी देश छोड़ना चाहते हैं उन्हें निकालने का सिलसिला जारी रहेगा।
फोटो अमेरिका के शेनटिली शहर में स्थित एयरपोर्ट पर पहुंचे अफगानी परिवार की है। अमेरिका ने कहा है कि जो अफगानी देश छोड़ना चाहते हैं उन्हें निकालने का सिलसिला जारी रहेगा।

पाकिस्तान का कबूलनामा: हमने तालिबान के लिए सबकुछ किया
पाकिस्तान का आतंक प्रेम एक बार फिर सामने आया है। इमरान खान के एक मंत्री ने इस बार तालिबान से नजदीकियों की बात कबूली है। इमरान सरकार में मंत्री शेख राशिद ने तालिबान का खुले तौर पर समर्थन करते हुए खुद को उनका संरक्षक बताया है। राशिद ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा है कि हमने तालिबान के नेताओं की लंबे वक्त तक हिफाजत की है। तालिबानी नेताओं ने हमारे यहां शरण ली, शिक्षा ली और यहां घर बनाया। हमने तालिबान के लिए सबकुछ किया है।

इससे पहले 15 अगस्त को जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसे अफगानियों की आजादी बताया था। कुछ दिन पहले पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने भी तालिबान का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि तालिबान इस बार एक पॉजिटिव माइंडसेट के साथ आया है। वह महिलाओं को भी सत्ता में भागीदार बनाएगा।

अमेरिका सड़क के रास्ते भी लोगों को निकालने का प्लान बना रहा
अमेरिका ने काबुल एयरपोर्ट भले ही तालिबान को सौंप दिया है, लेकिन वह अफगानिस्तान में फंसे अपने नागरिकों और अफगानियों को निकालने का सिलसिला जारी रखेगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की अंडर सेक्रेटरी विक्टोरिया नुलैंड ने कहा है कि जो लोग अफगानिस्तान छोड़ना चाहते हैं उन्हें निकालने के लिए हवाई और सड़क मार्ग समेत सभी विकल्प तलाशे जा रहे हैं। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने जानकारी दी है कि 31 अगस्त की रात तक 24 हजार अफगानियों समेत 31,107 लोग अफगानिस्तान से अमेरिका पहुंच चुके हैं।

पंजशीर में अहमद मसूद और अमरुल्लाह सालेह की अगुवाई में पंजशीर के लड़ाके तालिबान के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।
पंजशीर में अहमद मसूद और अमरुल्लाह सालेह की अगुवाई में पंजशीर के लड़ाके तालिबान के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।

अपडेट्स

  • तालिबान के पॉलिटिकल ऑफिस के डिप्टी हेड शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने कतर में तुर्की के राजदूत मुस्तफा गोकसू से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद तालिबान ने कहा है कि तुर्की ने अफगानिस्तान के साथ संबंध बरकरार रखने और सहयोग करने का भरोसा दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने पंजशीर में लड़ रहे तालिबान और नॉर्दर्न अलायंस से अपील की है कि इंसानियत की खातिर जंग रोक दें। संयुक्त राष्ट्र के ह्यूमेनिटेरियन को-ऑर्डिनेटर अलाकबारोव ने कहा है कि पंजशीर के हालात की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन कुछ दिनों में ये उपलब्ध हो जाएगी।

पंजशीर में 13 तालिबानी मारे गए
अफगानिस्तान के पंजशीर में तालिबान की नॉर्दर्न अलायंस से जंग चल रही है। इस बीच खबर है कि नॉर्दर्न अलायंस के लड़ाकों ने 13 तालिबानियों को मार गिराया है। साथ ही तालिबान के एक टैंक को भी तबाह कर दिया है। वहीं नॉर्दर्न अलायंस की अगुआई कर रहे अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा है कि तालिबान से जंग लड़ रही रेजिस्टेंस फोर्स भले ही पंजशीर में हो, लेकिन वह सभी अफगानियों के हकों की रक्षा करेगी।

पंजशीर के लड़ाकों का ऐलान- तालिबान के खिलाफ जंग जारी रहेगी
पंजशीर में तालिबान के खिलाफ जंग लड़ रही रेजिस्टेंस फोर्स ने कहा है कि ये लड़ाई जारी रहेगी, क्योंकि तालिबान से वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। बता दें पूरे अफगानिस्तान में पंजशीर ही ऐसा इलाका है जहां तालिबान कब्जा नहीं कर पाया है। यहां पंजशीर के शेर के नाम से मशहूर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद और अफगानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह तालिबान के खिलाफ जंग की अगुआई कर रहे हैं।

तालिबान ने पंजशीर में गवर्नर नियुक्त किया
अफगानिस्तान के पंजशीर पर भले ही तालिबान का कब्जा नहीं हो, लेकिन उसने अपनी तरफ से पंजशीर का नया गवर्नर नियुक्त कर दिया है। अफगानी मीडिया 1TVNewsAF ने यह जानकारी दी है। वहीं तालिबान की तरफ से पंजशीर के लड़ाकों (नॉर्दन अलायंस) से बातचीत कर रहे तालिबान के इनविटेशन एंड गाइडेंस कमीशन के प्रमुख आमिर खान मुताकी ने कहा है कि पंजशीर को लेकर वार्ता विफल हो चुकी है। साथ ही कहा है कि जो सरेंडर करना चाहें वो सरेंडर कर सकते हैं और जो लड़ना चाहते हैं उन्हें जवाब दिया जाएगा, हम पंजशीर पर हमला कर चुके हैं।

भारत में हमला कर सकता है ISIS-K
अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत के बीच भारत में भी आतंकी हमले का खतरा बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने वाले आतंकी संगठन ISIS का खुरासान ग्रुप (ISIS-K) भारत में हमले की साजिश रच रहा है। ISIS-K भारत में हिंदू नेताओं और मंदिरों को निशाना बना सकता है। बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बैठे आतंकी ISIS के संपर्क में हैं। कश्मीर और कर्नाटक से पकड़े गए कुछ संदिग्धों ने ये खुलासा किया है। इसके बाद खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है।

अमेरिका ने कहा- तालिबान एक क्रूर संगठन है
अफगानिस्तान छोड़ने के बाद अमेरिकी सेना के जनरल मार्क मिल्ले ने कहा है कि तालिबान एक क्रूर संगठन है और इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है वह बदलेगा या नहीं। इस दौरान मिल्ले ने तालिबान के साथ अमेरिका की अभी तक की डीलिंग्स को लेकर कहा कि ऐसे मौकों पर आप वही करते हैं जो अपने मिशन और फौज के लिए जोखिम कम करने के लिए जरूरी होता है, न कि वह जो आप चाहते हैं। वहीं ऑस्टिन ने कहा कि तालिबान के साथ भविष्य में सहयोग को लेकर कोई अटकलबाजी नहीं कर सकते, लेकिन हमारा फोकस ISIS-K पर रहेगा।

अमेरिकी सेना के जनरल मार्क मिल्ले (दाएं) और अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन (बाएं) ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अफगानिस्तान मिशन से जुड़े सवालों का जवाब दिया था।
अमेरिकी सेना के जनरल मार्क मिल्ले (दाएं) और अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन (बाएं) ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अफगानिस्तान मिशन से जुड़े सवालों का जवाब दिया था।

बता दें बीते गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर हमले के बाद से ही आतंकी संगठन ISIS-खुरासान (ISIS-K) को अमेरिका ने निशाने पर ले रखा है। काबुल एयरपोर्ट पर फिदायीन हमले में अमेरिका के 13 सैनिक मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी ISIS-K ने ली थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चेतावनी दी थी कि हमलावरों को ढूंढ-ढूंढ कर मारेंगे। इसके 36 घंटे क अंदर ही अमेरिका ने अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में ड्रोन से हमला कर ISIS-K के दो आतंकियों को मार गिराया था।

UN की चेतावनी- अफगानिस्तान में एक महीने में खाद्यान्न संकट पैदा हो सकता है
अफगानिस्तान में तालिबान अपनी सरकार बनाने की तैयारी कर रहा है और लूटे गए अमेरिकी हथियारों के साथ परेड निकाल रहा है। दूसरी तरफ देश पर खाद्यान्न संकट मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान में एक महीने के अंदर खाने का संकट पैदा हो सकता है और हर तीन में से एक व्यक्ति को भूख का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही कहा है कि अफगानिस्तान के आधे से ज्यादा बच्चे इस वक्त खाने को तरस रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में अफगानिस्तान में खाने-पीने की वस्तुएं करीब 50% महंगी हो चुकी हैं, जबकि पेट्रोल की कीमतों में 75% का इजाफा हुआ है।

तालिबान के खौफ और अनिश्चित भविष्य के खतरे को देखते हुए अफगानिस्तान के लोगों का पलायन जारी है। फोटो पाकिस्तान के चमन शहर में बने शरणार्थी कैंप में रह रहे अफगानियों की है।
तालिबान के खौफ और अनिश्चित भविष्य के खतरे को देखते हुए अफगानिस्तान के लोगों का पलायन जारी है। फोटो पाकिस्तान के चमन शहर में बने शरणार्थी कैंप में रह रहे अफगानियों की है।

3 दिन में तालिबानी सरकार बनेगी, महिलाएं भी शामिल होंगी
कतर में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के उप-प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने बुधवार को कहा कि तीन दिन में नई सरकार की घोषणा हो जाएगी। इसमें वे लोग शामिल नहीं किए जाएंगे, जो 20 साल से सरकार में हैं। नई सरकार में पवित्र और शिक्षित लोग शामिल होंगे। महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे पहले तालिबान नेता अनस हक्कानी ने भी कहा था कि सरकार बनाने की प्रक्रिया आखिरी दौर में है।

तालिबान ने कहा- भारत से अच्छे संबंध चाहते हैं, कश्मीर में दखल नहीं देंगे
अमेरिका ने अफगानिस्तान में अलकायदा की कमर तोड़कर रख दी थी, लेकिन उसकी सैन्य मौजूदगी हटते ही अलकायदा फिर हिमाकत दिखाने लगा है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के जाने के अगले ही दिन अलकायदा ने तालिबान से कहा है कि अफगानिस्तान की ही तरह कश्मीर को आजाद कराया जाए। अलकायदा ने कहा, इसी तरह लेवंट, सोमालिया, यमन, कश्मीर को भी आजाद कराना चाहिए।

हालांकि, तालिबान ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह अफगानिस्तान को आतंकियों के हाथ में नहीं पड़ने देगा। तालिबान नेता अनस हक्कानी ने बुधवार को कहा, 'हम कश्मीर के मुद्दे में दखल नहीं देंगे। हम भारत के साथ दोस्ताना और अच्छे संबंध चाहते हैं। कश्मीर हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। हम हमारी नीति के खिलाफ काम नहीं करेंगे।'

अफगानियों का पलायन जारी
काबुल एयरपोर्ट से अमेरिकी सेना के जाने के बाद भी अफगानिस्तान से लोगों के पलायन का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। तालिबान की क्रूरता और खौफ की वजह से लोग किसी भी तरह देश छोड़ देना चाहते हैं। एयरपोर्ट बंद है, लेकिन लोग पहाड़ों और रेतीले रास्तों से होकर पाकिस्तान, तुर्की और ईरान बॉर्डर में जान की दुहाई देकर शरण ले रहे हैं।

डेली मेल ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाएं (गर्भवती भी शामिल), बच्चे, बुजुर्ग और नौजवान इन रास्तों से तालिबान के साये से दूर जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीड़ में कई ऐसे लोग भी हैं, जो पैदल ही 1500 किलोमीटर पैदल चलकर तुर्की, ईरान और अफगानिस्तान भाग रहे हैं।

देखें, अफगानिस्तान से पलायन की तस्वीरें..

काबुल एयरपोर्ट पर तालिबान के लड़ाके मौजूद हैं और फ्लाइट ऑपरेशन बंद है। ऐसे में लोग पैदल ही हजारों किमी चलकर बॉर्डर क्रॉस कर रहे हैं।
काबुल एयरपोर्ट पर तालिबान के लड़ाके मौजूद हैं और फ्लाइट ऑपरेशन बंद है। ऐसे में लोग पैदल ही हजारों किमी चलकर बॉर्डर क्रॉस कर रहे हैं।
अफगानिस्तान से भागकर हजारों लोग तुर्की और ईरान में शरण ले रहे हैं।
अफगानिस्तान से भागकर हजारों लोग तुर्की और ईरान में शरण ले रहे हैं।
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