काबुल में आत्मघाती हमला:तालिबान के टॉप कमांडर रहीमुल्लाह हक्कानी की मौत; आतंकी विचारधारा का बड़ा समर्थक था

काबुल4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

अफगानिस्तान के काबुल में गुरुवार को आत्मघाती हमले में तालिबान के टॉप कमांडर रहीमुल्लाह हक्कानी की मौत हो गई। यह हमला एक मदरसे में हुआ है। हक्कानी तालिबान के आतंकी विचारधारा का बड़ा समर्थक था। इसके अलावा वह इस्लाम का बहुत बड़ा जानकार था।

आत्मघाती हमले की जानकारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट या रेजिस्टेंस फोर्स का हाथ हो सकता है। तालिबान की खुफिया एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

कई बार हमला होने के बाद भी बचा था हक्कानी
कमांडर हक्कानी पर यह तीसरा हमला था, जिसमें वह मारा गया। इससे पहले अक्टूबर 2020 में रहीमुल्ला पर हमला हुआ था और वह बाल-बाल बच था। साल 2013 में भी हक्कानी के काफिले पर हमलावरों ने फायरिंग की थी। उस समय पुलिस की जवाबी कार्रवाई में हमलावर भाग गए थे।

साल 2020 और 2013 में हक्कानी पर हमले हुए थे, जिसमें वो बाल-बाल बचा था।
साल 2020 और 2013 में हक्कानी पर हमले हुए थे, जिसमें वो बाल-बाल बचा था।

सोशल मीडिया में लाखों समर्थक
रहीमुल्ला हक्कानी पाकिस्तान की सीमा से लगे नंगरहार प्रांत का एक अफगान नागरिक था। उसे हदीस साहित्य का विद्वान माना जाता था। हक्कानी को अफगानिस्तान के गृहमंत्री और हक्कानी नेटवर्क के सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी का गुरु माना जाता है। अपने बयानों से रहीमुल्ला हमेशा चर्चाओं में बना रहता था। सोशल मीडिया में उसके लाखों समर्थक थे।

रहीमुल्ला हक्कानी पाकिस्तान की सीमा से लगे नंगरहार प्रांत का एक अफगान नागरिक था।
रहीमुल्ला हक्कानी पाकिस्तान की सीमा से लगे नंगरहार प्रांत का एक अफगान नागरिक था।

पाकिस्तान में रहता था हक्कानी
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के पहले हक्कानी पाकिस्तान में रहता था। वह 9 साल तक वहां रहा। इस दौरान उसने पेशावर में मदरसा जुबैरी की भी स्थापना की थी। यहां कई लोगों को जिहादी शिक्षा दी जाती है। इसी मदरसे के जरिए तालिबान के लिए पैसा इकट्ठा किया जाता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भी फंड रेज करने में मदद करती है।