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काबुल पहुंचा बरादर:तालिबान का को-फाउंडर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर आज जिहादी नेताओं से मिलेगा, सरकार के गठन पर होगी चर्चा

काबुल9 महीने पहले

तालिबान का को-फाउंडर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर काबुल पहुंच गया है। यहां वह अफगानिस्तान में नई सरकार बनाने के बारे में तालिबान के अपने साथियों और जिहादी नेताओं से बात करेगा। तालिबान के सूत्रों ने बताया कि समावेशी सरकार बनाने को लेकर चर्चा की जाएगी।

2010 में बरादर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अमेरिका के दबाव के बाद उसे 2018 में रिहा करके कतर भेज दिया गया। वहां उसे दोहा स्थित तालिबान के पॉलिटिकल ऑफिस का प्रमुख नियुक्त किया गया। यहीं पर उसने अमेरिका के साथ उस एग्रीमेंट को तय किया जिसके मुताबिक विदेशी सेनाएं अफगानिस्तान छोड़कर जाएंगी।

बरादर कतर से मंगलवार को अफगानिस्तान पहुंचा था। यहां वह कंधार में उतरा था, जहां से तालिबान की रूहानी शुरुआत मानी जाती है। उसके लौटने के चंद घंटों बाद ही तालिबान ने ऐलान किया कि उसकी हुकूमत इस बार अलग होगी।

देश का रक्षा मंत्री रह चुका है बरादर
मुल्ला अब्दुल गनी बरादर उन चार लोगों में से एक है जिन्होंने तालिबान का गठन किया था। वो तालिबान के फाउंडर मुल्ला उमर का डिप्टी था। 2001 में अमेरिकी हमले के वक्त वो देश का रक्षा मंत्री था।

2010 में अमेरिका और पाकिस्तान ने एक ऑपरेशन में बरादर को गिरफ्तार कर लिया। उस वक्त शांति वार्ता के लिए अफगानिस्तान सरकार बरादर की रिहाई की मांग करती थी। सितंबर 2013 में उसे रिहा कर दिया गया।

अमेरिका के साथ बातचीत का समर्थन करता रहा है
2018 में तालिबान ने कतर के दोहा में अपना राजनीतिक दफ्तर खोला। वहां अमेरिका से शांति वार्ता के लिए जाने वाले लोगों में मुल्ला अब्दुल गनी बरादर प्रमुख था। उसने हमेशा अमेरिका के साथ बातचीत का समर्थन किया है।

इंटरपोल के मुताबिक मुल्ला बरादर का जन्म उरूज्गान प्रांत के देहरावुड जिले के वीटमाक गांव में 1968 में हुआ था। माना जाता है कि उनका संबंध दुर्रानी कबीले से है। पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी दुर्रानी ही हैं।

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