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अफगानिस्तान में आतंकियों का खूनी खेल:तालिबान ने सरकारी मीडिया प्रमुख को मारा, गुरुद्वारे से निशान साहिब हटाया; आतंकवादियों ने अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाना शुरू किया

काबुल4 महीने पहले
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पख्तिया प्रांत के चमकनी इलाके में गुरुद्वारा थाला साहिब से आतंकवादियों ने निशान साहिब को उतार दिया। - Dainik Bhaskar
पख्तिया प्रांत के चमकनी इलाके में गुरुद्वारा थाला साहिब से आतंकवादियों ने निशान साहिब को उतार दिया।
  • भारत की टिप्पणी- निशान साहिब हटाया जाना नामंजूर, सभी वर्गों के हित सुरक्षित रहें

अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों की बढ़ती ताकत के साथ खूनी खेल भी बढ़ता जा रहा है। आतंकियों ने सरकारी मीडिया व सूचना केंद्र के प्रमुख दावा खान मेनापाल की शुक्रवार को हत्या कर दी। आंतरिक मंत्रालय के अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि तालिबान ने मेनापाल की हत्या शुक्रवार की नमाज पढ़ते वक्त की। मेनापाल ने राष्ट्रपति अशरफ गनी की टीम में प्रवक्ता के तौर पर भी सेवाएं दी थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा, मेनापाल की हत्या मुजाहिदीन द्वारा किए गए एक खास हमले में की गई और उनके कर्मों के लिए सजा दी गई। वहीं, तालिबान लड़ाकों ने शुक्रवार को दक्षिणी निरमोज प्रांत की राजधानी जरांज पर कब्जा जमा लिया है।

दूसरी ओर, तालिबान ने अब अफगानिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पख्तिया प्रांत के चमकनी इलाके में गुरुद्वारा थाला साहिब से आतंकवादियों ने निशान साहिब को उतार दिया है। इस गुरुद्वारे का सिख धर्म में बड़ा महत्व है, क्योंकि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देवजी ने यहां का दौरा भी किया था।

इधर, भारत सरकार ने इस घटना की शुक्रवार को कड़ी आलोचना की है। सरकार ने कहा, भारत ऐसा मानता है कि अफगानिस्तान का भविष्य ऐसा होना चाहिए जहां महिलाओं और बच्चों समेत सभी वर्गों के हित सुरक्षित रह पाएं।

तुर्की में इलाज करवा रहे दोस्तम काबुल लौटे, इनका नाम सुनकर कांपते हैं तालिबान के आतंकवादी
अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते हमलों के बीच ‘मजार-ए-शरीफ का बूढ़ा शेर’ के नाम से मशहूर मार्शल अब्दुल रशीद दोस्तम काबुल लौट आए हैं। दोस्तम की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 67 साल की उम्र में भी तालिबानी उनके नाम को सुनते ही कांपने लगते हैं। मार्शल अब्दुल रशीद दोस्तम अफगानिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार में 29 सितंबर 2014 से 19 फरवरी 2020 तक उपराष्ट्रपति भी रह चुके हैं। काबुल पहुंचते ही उन्होंने तालिबान के खात्मे की कसम भी खाई है। दोस्तम कई माह से तुर्की में इलाज करवा रहे थे।

24 घंटे में 300 से अधिक तालिबानी आतंकी ढेर
अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए अफगानी सेना लगातार मुकाबला कर रही है। करीब 24 घंटे के भीतर ही 300 तालिबानी लड़ाकों को सेना ने ढेर कर दिया। सेना के ऑपरेशन में 303 तालिबानी आतंकवादी मारे गए हैं, जबकि 125 घायल हुए हैं। ये ऑपरेशन नांगरहार, लघमान, गजनी, पक्तिका, कंधार समेत अन्य आसपास के इलाकों में चलाया गया था।

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