तालिबान राज में भयावह हालात:अफगानिस्तान में भुखमरी से बचने को बेटियां बेच रहे लोग, ढाई करोड़ की आबादी सूखे की चपेट में

3 महीने पहले
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तालिबान के राज में विदेशी आर्थिक मदद बंद होने से पहले ही संकट में फंसे अफगानिस्तान पर अब सूखे की नई मार पड़ी है। देश की आधे से ज्यादा आबादी इसकी चपेट में आ चुकी है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि भुखमरी से बचने के लिए अफगानिस्तान के गरीब तबके के लोग अपनी बेटियों को बेचने के लिए मजबूर हैं।

2 से ढाई लाख रुपए में बिक रहीं बच्चियां
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, भुखमरी से बचने के लिए शादी के नाम पर छोटी उम्र में बेची जा रही बच्चियों की कीमत 2 से ढाई लाख रुपए के बीच लगाई जा रही है। पश्चिमी अफगानिस्तान में फाहिमा नाम की एक महिला ने बताया कि उसकी 6 साल और डेढ़ साल की बेटियों को उसके पति ने बेच दिया है। बड़ी बेटी की कीमत 3350 डॉलर (करीब 2.5 लाख रुपए) लगाई गई, जबकि छोटी बच्ची के बदले उन्हें 2800 डॉलर (करीब 2.1 लाख रुपए) मिले। ये पैसे भी एकमुश्त नहीं दिए गए हैं बल्कि बच्चियों को खरीदने वाले परिवार किस्तों में ये भुगतान करेंगे।

फाहिमा ने कहा, मेरे विरोध करने पर पति ने कहा कि बेटियों को नहीं बेचने पर हम सभी मर जाएंगे, क्योंकि खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। उसने बताया कि उसकी बच्चियों के होने वाले पति भी नाबालिग हैं।

पैसा अभी मिल रहा, बच्चियों को बाद में ले जाएंगे
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी अफगानिस्तान के ही एक गांव की महिला ने भी बाकी बच्चों का खाना जुटाने के लिए अपनी नवजात बेटी को 500 डॉलर में बेच दिया। अभी उस महिला को 250 डॉलर का भुगतान हो गया है। बाकी पैसे बच्ची के पैदल चलना सीख लेने पर दिए जाएंगे।

अफगानिस्तान के पश्चिमी प्रांत बदघिस की राजधानी काला-ए-नॉ सूखे की मार से बुरी तरह प्रभावित है। गांव के लोगों का कहना है कि साल 2018 में पड़े अकाल के दौरान युवा लड़कियों की शादी करने की संख्या में बढ़ोतरी हुई थी। इस साल बारिश नहीं होने से एक बार फिर लड़कियों को बेचने के मामले बढ़े हैं।

नवंबर से बड़े पैमाने पर भुखमरी की चेतावनी
यूएन के वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने पिछले सोमवार को ही अफगानिस्तान में भुखमरी की शुरुआत की चेतावनी दी थी। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने कहा था कि नवंबर से अफगानिस्तान की आधी से ज्यादा आबादी यानी करीब ढाई करोड़ लोगों के सामने एक वक्त की रोटी के इंतजाम का संकट होगा।

तालिबान बोला- यह हमारी समस्या नहीं
काला-ए-नॉ में लगे गरीबों के कैंप में अब्दुल रहीम अकबर सबसे गरीब लोगों के लिए ब्रेड या दूसरी खाने की चीजें मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने भुखमरी के चलते बेटियों को बेचने के कई मामले सामने आने पर स्थानीय तालिबान प्रशासन से गुहार लगाई है, लेकिन तालिबान के स्थानीय गवर्नर मौलवी अब्दुल सत्तार ने एएफपी के साथ बातचीत में बाल विवाह को तालिबान की समस्या नहीं होने की बात कही है।

मौलवी सत्तार ने कहा कि ऐसी शादियों के पीछे तालिबान की सत्ता नहीं बल्कि खराब अर्थव्यवस्था जिम्मेदार है। उन्होंने अर्थव्यवस्था के खराब होने का ठीकरा अमेरिका के सिर पर फोड़ा है, जिसने अफगान सरकार की विदेशी मुद्रा तालिबान को सौंपने पर प्रतिबंध लगा रखा है।