तालिबान ने बनाई ड्रग ट्रेड से दूरी:दुनिया में अच्छी इमेज बनाने के लिए अफगानिस्तान में अफीम की खेती पर लगाई रोक, पिछले साल ड्रग्स से 11 हजार करोड़ रुपए कमाए थे

कंधार10 महीने पहले
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने 2018-19 के बीच ड्रग ट्रेड से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए की कमाई की।

अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के बाद तालिबान दुनिया भर से अपने शासन के लिए रजामंदी चाह रहा है। इसके लिए वह कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है। खुद को बेहतर दिखाने के लिए तालिबान ने अफीम उगाने वाले प्रमुख राज्यों को इसकी खेती करने से रोक दिया है। यह भी तब जब तालिबान की फंडिंग का बड़ा हिस्सा इसी से आता है। पिछले साल तालिबान ने ड्रग्स से 11 हजार करोड़ रुपए कमाए थे।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक, हालिया दिनों में तालिबानी प्रतिनिधियों ने कंधार में अफीम की खेती करने वाले किसानों से कहा है कि अब अफीम उगाना अवैध होगा। देश में अफीम की खेती वाले प्रांतों में कंधार प्रमुख है। अफीम यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है। इसके चलते देशभर में कच्चे अफीम के दाम तेजी से बढ़े हैं।

काबुल पर कब्जे के बाद कही थी ड्रग्स का व्यापार बंद करने की बात
18 अगस्त को तालिबानी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने 18 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि देश के नए शासक ड्रग के व्यापार को इजाजत नहीं देंगे। उस समय मुजाहिद ने यह नहीं बताया था कि इस व्यापार को रोकने के लिए क्या करेंगे। अब तालिबान ने अफीम की खेती पर ही बैन लगा दिया है।

कंधार, उरुजगन और हेलमन में स्थानीय किसानों ने कहा कि कच्चे अफीम के दाम तीन गुना हो गए हैं। पहले यह 70 डॉलर में एक मिलता था, जबकि अब 200 डॉलर में बिक रहा है। मजार-ए-शरीफ में भी अफीम की कीमत दोगुनी हो गई है। कच्चे अफीम से ही हेरोइन ड्रग बनता है।

ड्रग्स से होती है तालिबान की फंडिंग
ड्रग्स के व्यापार से ही तालिबान के 80 हजार लड़ाकों की फंडिंग होती है। नाटो की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में तालिबान ने ड्रग्स से 11 हजार करोड़ रु. कमाए। 2001 में अफीम का उत्पादन 180 टन था, जो 2007 में बढ़कर 8,000 टन हो गया।

तब अफगानिस्तान की GDP में अफीम के अवैध धंधे का हिस्सा 60% था। अफगानिस्तान में दुनिया की सबसे नशीली अफीम उगती है। यही अफीम दुनियाभर में प्रॉसेस्ड ड्रग्स, यानी हेरोइन के रूप में पहुंचती है, जो मूल अफीम से 1500 गुना ज्यादा नशीली है।

2017 में अफगानिस्तान में 9,900 टन अफीम का उत्पादन हुआ
UNODC के मुताबिक 2017 में अफगानिस्तान में अफीम का उत्पादन 9,900 टन रहा। इसकी बिक्री से किसानों ने करीब 10 हजार करोड़ रुपए की कमाई की। यह देश की GDP का 7% हिस्सा था। रिपोर्ट के मुताबिक अवैध अफीम की इकोनॉमी करीब 49 हजार करोड़ रुपए की रही। इसमें लोकल खपत, दवाओं के लिए एक्सपोर्ट समेत अन्य भी शामिल हैं।

तालिबान अपनी कमाई टैक्स वसूली से भी करता है। तालिबान अफीम का कारोबार करने वालों से टैक्स वसूलता है। साथ ही इससे जुड़े कारोबारियों से भी टैक्स वसूली करता है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने 2018-19 के बीच ड्रग ट्रेड से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए की कमाई की। अमेरिकी ऑफिशियल्स के मुताबिक तालिबान की 60% आय अवैध नशीले पदार्थों से होती है।

तालिबान का सालाना कारोबार लगभग 3 हजार करोड़ रुपए का
तालिबान अपने हिसाब-किताब का कोई ब्योरा प्रकाशित नहीं करता। उसकी सटीक कमाई और संपत्ति का पता लगाना मुश्किल है। 2016 में फोर्ब्स ने अनुमान लगाया था कि तालिबान का सालाना कारोबार 2,968 करोड़ रुपए है।