न्यूयाॅर्क / कट-कॉपी-पेस्ट के जनक टेस्लर नहीं रहे, जॉब्स ने उनसे कहा था- आप दुनिया बदल सकते हैं

वैज्ञानिक लैरी टेस्लर। (फाइल फोटो) वैज्ञानिक लैरी टेस्लर। (फाइल फोटो)
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वैज्ञानिक लैरी टेस्लर। (फाइल फोटो)वैज्ञानिक लैरी टेस्लर। (फाइल फोटो)

  • लैरी ने आईफोन, आईपैड की कई तकनीक डेवलप कीं
  • जेरॉक्स पालो अल्टो रिसर्च सेंटर से करियर शुरू किया था

दैनिक भास्कर

Feb 21, 2020, 05:47 PM IST

न्यूयाॅर्क. कम्प्यूटर में कट, कॉपी और पेस्ट की कमांड का आविष्कार करने वाले 74 साल के वैज्ञानिक लैरी टेस्लर का निधन हो गया। न्यूयॉर्क में जन्मे और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएट लैरी ने 1973 में जेरॉक्स पालो अल्टो रिसर्च सेंटर से करियर शुरू किया था। टेस्लर ने इस रिसर्च सेंटर में टिम मॉट के साथ मिल कर जिप्सी टेक्स्ट एडिटर तैयार किया। इसी जिप्सी टेक्स्ट एडिटर में उन्होंने टेक्स्ट को कॉपी व मूव करने के लिए मेथड तैयार किया।

टेस्लर के इस आविष्कार ने लोगों के लिए पर्सनल कम्प्यूटर इस्तेमाल करना काफी आसान बना दिया। उन्होंने फाइंड और रिप्लेस जैसी कई कमांड बनाईं, जिनसे टेक्स्ट लिखने से लेकर सॉफ्टवेयर डेवलप करने जैसे कई काम आसान हो गए। उनकी यह कमांड तब पॉपुलर हुई, जब 1983 में इसे एपल के सॉफ्टवेयर में लिसा कम्प्यूटर के लिए इस्तेमाल किया गया। टेस्लर ने एपल, अमेजन व याहू में भी काम किया है। 
 

फाइंड और रिप्लेस जैसी कमांड बनाकर कम्प्यूटर का इस्तेमाल सरल किया

टेस्लर ने 1960 के दशक में सिलिकॉन वैली में काम करना शुरू किया था। तब कम्प्यूटर कुछ लोगों तक ही सीमित था। जेरॉक्स छोड़ने के बाद लैरी ने 1980 में एपल ज्वाइन की। यहां 17 साल तक बतौर चीफ साइंटिस्ट काम किया। उन्होंने 2011 में कैलिफोर्निया के चर्चिल क्लब कार्यक्रम में कहा था- ‘27 सितंबर 1979 का दिन मुझे अच्छी तरह याद है, जब मुझे एपल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स को जेरॉक्स का अल्टो कम्प्यूटर दिखाने का मौका मिला। इसमें आइकन, विंडो, फोल्डर, माउस और मेरी कट, कॉपी और पेस्ट की तकनीक शामिल थी। इसे देखते समय स्टीव काफी उत्साहित नजर आए।

वे कभी मेरी ओर तो कभी स्क्रीन पर टकटकी लगाकर देखते रहे। वे कमरे के चारों ओर चक्कर काट रहे थे। प्रेजेंटेशन खत्म होते ही वे मेरी ओर आए व बोले- आप तो सोने की खान पर बैठे हैं। आप इस तकनीक के साथ क्याें कुछ नहीं कर रहे हैं... आप दुनिया बदल सकते हैं। मैंने उनसे कहा- आपको लगता है कि यह तकनीक ऐसा कर सकती है तो आप क्यों नहीं इसका इस्तेमाल करते हैं? इतना कहते ही उन्होंने तत्काल मुझे नए असाइनमेंट के लिए अनुबंधित किया। उन्होंने मेरी सभी तकनीक को एपल में जगह दी। वे सालों तक हर बार मुझे यह बताते कि इस तकनीक से कंपनी ने कितना मुनाफा व नाम कमाया। वे हर बार मुझे कंपनी की नई ऊंचाई छूने पर बधाई देना नहीं भूलते। मुझे खुशी है कि आईफोन, आईपैड में उपयोग में आने वाली कई तकनीक पर मैंने काम किया, जो भविष्य को नई दिशा देगा।’

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