फैसला / इजराइल मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ के प्रतिनिधि को निकालने वाला पहला लोकतंत्र

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के निदेशक केन रॉथ (बाएं) और इजराइल-फिलिस्तीन के मानवाधिकार प्रतिनिधि ओमार शकीर। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के निदेशक केन रॉथ (बाएं) और इजराइल-फिलिस्तीन के मानवाधिकार प्रतिनिधि ओमार शकीर।
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मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के निदेशक केन रॉथ (बाएं) और इजराइल-फिलिस्तीन के मानवाधिकार प्रतिनिधि ओमार शकीर।मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के निदेशक केन रॉथ (बाएं) और इजराइल-फिलिस्तीन के मानवाधिकार प्रतिनिधि ओमार शकीर।

  • इजराइल ने ह्यूमन राइट्स वॉच के प्रतिनिधि को देश से निकालने का फैसला किया, उन पर देश के बहिष्कार की बात उठाने का आरोप
  • एचआरडब्ल्यू के प्रमुख केन रॉथ ने कहा, “अब तक सिर्फ उत्तर कोरिया, वेनेजुएला और ईरान ने उसके अधिकारियों को निकाला”
  • रॉथ के मुताबिक, उनकी नजर में कोई लोकतंत्र नहीं है, जिसने पहले कभी ऐसा कदम उठाया हो

दैनिक भास्कर

Nov 25, 2019, 10:55 AM IST
तेल अवीव. इजराइल मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (एचआरडब्ल्यू) के अधिकारी को देश से निकालने वाला पहला लोकतंत्र बनने जा रहा है। एचआरडब्ल्यू के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर केन रॉथ ने रविवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने इजराइल और फिलीस्तीन में मानवाधिकार के हालात पर नजर रख रहे ओमार शकीर को डिपोर्ट करने के फैसले की निंदा की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के रहने वाले ओमार ने हाल ही में इजराइल के बहिष्कार की बात की थी। इसी को लेकर उन्हें देश से बाहर किया जा रहा है। 

बहिष्कार की बात करने वाले को कानून के तहत निकाल सकता है इजराइल

इजराइल के 2017 के एक कानून के मुताबिक, सरकार देश के बहिष्कार की बात करने वाले किसी भी विदेशी नागरिक को डिपोर्ट कर सकती है। इजराइल की सुप्रीम कोर्ट ने ओमार को डिपोर्ट करने के फैसले को सही पाया था। इस लिहाज से ओमार शकीर इस कानून के तहत इजराइल से निकाले जाने वाले पहले व्यक्ति होंगे। 

ह्यूमन राइट्स वॉच ने यह मानने से इनकार किया है कि शकीर ने कभी भी इजराइल के बहिष्कार की बात की। उसके अफसरों ने इजराइल पर फिलिस्तीन के मामले में आलोचना को दबाने का आरोप लगाया। न्यूज एजेंसी से बातचीत में रॉथ ने कहा, “मुझे अब तक किसी ऐसे लोकतंत्र के बारे में नहीं पता, जिसने मानवाधिकार रिसर्चर को देश से निकाल दिया हो। उत्तर कोरिया, वेनेजुएला और ईरान ने ऐसा जरूर किया है, लेकिन उन्हें किसी लोकतंत्र के ऐसा करने की जानकारी नहीं।

रॉथ ने आगे कहा, “चुनाव और फ्री प्रेस होने के बावजूद इजराइल जिस हद तक हो सकता है उस हद तक फिलिस्तीन में हो रहे मानवाधिकार हनन के मामलों को दबाने की कोशिश करता है।” उन्होंने इजराइल के इन कदमों के नाटकीय अंजाम की चेतावनी दी।

इजराइल का आरोप है कि ओमार इजराइल के फिलिस्तीन के साथ बर्ताव की वजह से उसके खिलाफ हैं। इसके अलावा ओमार पर इजराइल के खिलाफ बहिष्कार, भंडाफोड़ और प्रतिबंध लगाने के अभियान के समर्थक होने का भी आरोप है। इसी महीने इजराइल के गृह मंत्री आर्येह देरी ने कहा था कि जो भी लोग इजराइल के खिलाफ काम कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि हम उन्हें जीने और यहां काम नहीं करने देंगे।

शकीर अपने ऊपर लगे आरोपों को कई बार नकार चुके हैं। इजराइल से बाहर निकाले जाने के फैसले के बाद उन्होंने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अमेरिका वापस भेजने के फैसले को सही ठहराया। इस पर ओमार का कहना है कि न कभी उन्होंने और न ही ह्यूमन राइट्स वॉच के किसी प्रतिनिधि ने इजराइल के बहिष्कार की बात कही। हालांकि, फ्री स्पीच के तहत हम जो चाहें वो कह सकते हैं। 

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