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महामारी के साइड इफेक्ट:कोरोना से अमीर-गरीब में बढ़ी खाई, रुतबा दिखाने को झगड़ालू हो रहे हैं लोग

एक महीने पहलेलेखक: बेलिंडा लसकोम्बे
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दुनिया भर में बात-बात पर झगड़े की घटनाओं में इजाफा हुआ है। - Dainik Bhaskar
दुनिया भर में बात-बात पर झगड़े की घटनाओं में इजाफा हुआ है।

कोरोना महामारी ने दुनिया को चिड़चिड़ा बना दिया है। लोग छोटी-छोटी बातों पर आपा खो देते हैं। झगड़े बढ़ रहे हैं। इसका बड़ा कारण है कोरोना काल के दौरान बदला दुनिया का स्वरूप। जिंदगी कोरोना पूर्व के समान नहीं रही। लोगों के तौर-तरीके बदल गए हैं। अमेरिका के फिलाडेल्फिया में एक फास्ट फूड रेस्त्रां में खाना ऑनलाइन ऑर्डर करने की बात पर एक महिला ने कर्मचारियों पर बंदूक तान दी। टेक्सास में महिला ग्राहक ने महिला वेटर के साथ छोटी सी बात पर धक्कामुक्की कर डाली।

कनेक्टिकट में एक बच्चे की मां ने स्कूल बस ड्राइवर को थप्पड़ जड़ दिया। ये ऐसी कुछ घटनाएं हैं जो कोरोना काल के दौरान और अब जब महामारी उतार पर है, लगातार बढ़ रही हैं। दुनिया भर के विभिन्न समाजों में ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। लगता है समाज में शालीनता का व्यवहार लौटने की राह मुश्किल होगी। लोग शालीन तौर-तरीकों से किनारा कर रहे हैं। वकील, फ्लाइट अटेंडेंट और रेस्त्रां के कर्मचारी झगड़ालू क्लाइंट्स की शिकायत कर रहे हैं।

ऊर्जा को बचा कर अच्छे कामों में लगाएं
एजेंसी एफएए ने इस साल झगडालू विमान यात्रियों से लाखों रुपए का जुर्माना वसूला। इंडियाना यूनिवर्सिटी के अस्पताल और अमेरिका के कई राज्यों के रेस्त्रां में आने वालों से आपा नहीं खाेने की हिदायत वाले बोर्ड तक लगाने पड़ रहे हैं। इसमें समझाइश दी गई है कि आप अपनी ऊर्जा को बचा कर अच्छे कामों में लगाएं। मनोविज्ञानी और ओवरकमिंग डिस्ट्रक्टिव बिहेवियर के लेखक बर्नाड गोल्डल का कहना है कि कोराेना काल के दौरान कई लोगों ने अपने करीबियों को खोया, नौकरियां चली गईं और कई लोग आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

ऐसे में उनमें गुस्सा और अवसाद भर गया है। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. हैंस स्टाइनर का कहना है कि दूसरे लोगों पर गुस्सा दिखाना खुद को बड़ा दिखाना भी है। ऐसा करके लोग अपनी ताकत का प्रदर्शन भी करते हैं। जाे लोग आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं उनको गुस्सा करके दबाया जा सकता है। इंटरनेट पर भी हेट स्पीच का ट्रेंड बढ़ना इसका बड़ा कारण है।

हाथ नहीं मिलाने के कारण बढ़ रही हैं लोगों में दूरियां
मेलबर्न यूनिवर्सिटी के प्रो. स्टीवन जाक का कहना है कि कोरोना काल के दौरान लोगों के झगड़ालू व्यवहार का एक बड़ा कारण है हाथ नहीं मिलाना। प्रो. जाक का कहना है कि हाथ मिलाने से लोगों में समीपता का भाव आता था जो अब नदारद हो गया है। लोगों में दूरियां बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि हाथ मिलाना सदियों से चला आ रहा एक सभ्य तरीका था। अब सोशल डिस्टेंसिंग के कारण हाथ मिलाने का चलन नहीं रहा। ऐसे में लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करना है।