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गूगल की सफलता में छिपी दरारें उजागर:दिग्गज टेक कंपनी इन दिनों फैसलों में देरी का सामना कर रही, कर्मचारियों में भी है असंतोष; सुंदर पिचाई के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे

ऑकलैंड5 महीने पहलेलेखक: डाइसुके वाकाबयाशी
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गुगल के सीईओ, सुंदर पिचाई(फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
गुगल के सीईओ, सुंदर पिचाई(फाइल फोटो)

इसमें कोई शक नहीं कि टेक दिग्गज गूगल दिन-ब-दिन सफलता के नए शिखर छू रही है। गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट की नेटवर्थ 119 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। कंपनी में बाहर से सामान्य दिखाई दे रही चीजें उतनी सामान्य नहीं रह गई हैं। गूगल के कर्मचारियों का एक तबका मानता है कि गूगल की वर्कफोर्स लगातार मुखर हो रही है। व्यक्तिगत समस्याएं सार्वजनिक हो रही हैं।

निर्णायक नेतृत्व, बड़े आइडिया ने जोखिम से बचने और कंपनी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी लेकिन उनमें से कुछ अधिकारी कंपनी छोड़ रहे हैं। कुछ दिनों पहले कंपनी छोड़ने वाले नोआम बार्डिन ने एक ब्लॉग में लिखा है कि मैं कंपनी क्यों छोड़ रहा हूं इससे बेहतर सवाल यह है कि मैं इतने लंबे समय तक क्यों टिका रहा? नाओम ने लिखा कि जोखिम की सहनशीलता घटने से इनोवेशन की चुनौतियां बदतर ही होंगी।

कंपनी के मौजूदा और हाल ही में छोड़कर जाने वाले कर्मचारियों के मुताबिक, गूगल की कई समस्याएं, कंपनी के मिलनसार और सादगी-पसंद सीईओ सुंदर पिचाई की नेतृत्व शैली की वजह से उपजी हैं। पंद्रह वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में कहा कि गूगल इन दिनों बड़ी कंपनी होने के कई नुकसान झेल रही है। इसमें अक्षम ब्यूरोकेसी, पक्षपात भरे निर्णय शामिल हैं। गूगल ने प्रमुख व्यावसायिक और कर्मचारियों के मामलों में भी तेजी नहीं दिखाई क्योंकि पिचाई ने फैसलों को रोके रखा और कार्रवाई में देर की।

कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही है कंपनी

गूगल अंदरूनी तौर पर इन दिनों कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही है। घरेलू और विदेशी स्तर पर रेग्युलेटरी चुनौतियों के अलावा अमेरिकी नेता भी उसके खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, पिचाई अभी तक अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई को नेविगेट करने में कामयाब रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा कर पाना मुश्किल होगा। वहीं खबरों के बदले रकम चुकाने के लिए कंपनी को ऑस्ट्रेलिया में झुकना पड़ा है।