पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • International
  • The Indian Variant Of The Kovid Is Capable Of Dodging Resistance; Genome Sequencing Of Less Than 1% Of Cases In The Country

पहली बार आनुवांशिक परिवर्तन:प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने में सक्षम है कोविड का इंडियन वेरिएंट; देश में 1% से कम केस की हो रही जिनोम सिक्वेंसिंग

लंदन/नई दिल्ली2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
डॉक्टर की निगरानी में नई दिल्ली के बैंक्वेट हॉल में बने अस्पताल में भर्ती मरीज। - Dainik Bhaskar
डॉक्टर की निगरानी में नई दिल्ली के बैंक्वेट हॉल में बने अस्पताल में भर्ती मरीज।

देश में बेतहाशा बढ़ते संक्रमण के बीच अब चिंता का सबसे बड़ा सबब कोविड-19 का डबल म्यूटेशन वेरिएंट हो गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि देश में तेजी से फैल रहे संक्रमण के पीछे कोविड-19 का बी-1.617 वेरिएंट है। चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि नया वेरिएंट शरीर की प्रतिरोध क्षमता को चकमा देने में सक्षम हो गया है। बदलाव के चलते इसके इंसानी कोशिकाओं को संक्रमित करने और संक्रमण फैलाने की क्षमता बढ़ गई है। पहली बार यह वेरिएंट भारत में सामने आया था।

दरअसल, भारत में पहली लहर कमजोर पड़ने के बाद लापरवाही, मास्क और अन्य सुरक्षा सावधानियों की अनदेखी के कारण दूसरी लहर बेहद तेजी से फैल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक हुए अध्ययनों में पता चला है कि देश के बड़े हिस्से में ब्रिटिश वैरिएंट बी-1.1.7, दक्षिण अफ्रीका का बी-1.351 और ब्राजील का पी-1 फैला है। महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, दिल्ली और कर्नाटक में मिल रहे कुल संक्रमितों में इन विदेशी वेरिएंट्स का बड़ा योगदान है। इसके बावजूद सबसे ज्यादा चिंता बी-1.617 से है।

इसे डबल म्यूटेंट कहा जा रहा है, जबकि इसमें मूल वायरस के मुकाबले 15 म्यूटेशन हैं। इसके स्काइप प्रोटीन में दो चिंताजनक म्यूटेशंस- ई484क्यू व एल452आर हैं, जो महामारी के दौरान कहीं और से जुड़े हैं। पहली बार है किसी वेरिएंट में आनुवांशिक परिवर्तन हुआ है। भारत में कोविड जीनोमिक्स कंसोर्टियम के सदस्य और वाइरोलॉजिस्ट शाहिद जमील कहते हैं कि ई484क्यू और एल452आर तेजी से फैलाता।

यह वैक्सीनेशन करवा चुके तथा संक्रमित हो चुके लोगों में बनी एंटीबॉडी को चकमा दे सकता है। देश में अभी एक फीसदी से कम केसेज की जिनोम स्क्वीवेंसिंग हो रही है, ऐसे में वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ रही। ऑक्सफोर्ड यूनिविर्सिटी में जीनोमिक्स के प्रो. अरीस कैटजोआर्किस कहते हैं, डबल म्यूटेशन वेरिएंट स्थिति को और बदतर बना सकता है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि बी-1.617 उन व्यक्तियों को भी संक्रमित कर सकता है जिनमें वैक्सीनेशन या संक्रमण से एंटीबॉडी बन गई हैं।

महाराष्ट्र में तीन महीने में 61% केस नए वेरिएंट के
महाराष्ट्र में इस जनवरी से मार्च के बीच 61% केस में बी-1.617 वेरिएंट मिला है। पंजाब में 80% मरीज ब्रिटिश वेरिएंट के हैं। प्रो. जमील कहते हैं कि नए वेरिएंट कई राज्यों में फैल चुके हैं। बंगाल में रैलियां जारी हैं। कुंभ में दुनिया की सबसे ज्यादा भीड़ जुटी। इनके जरिए देशभर में संक्रमण फैलेगा। अशोका यूनिवर्सिटी के प्रो गौतम मेनन भी मानते हैं कि भारतीय वेरिएंट ज्यादा संक्रामक है।

अध्ययन बेहद कम, हमें पता ही नहीं क्या करना है
वेल्लोर क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ गगनदीप कंग कहती हैं, बी-1.617 वेरिएंट के बारे में अध्ययन बेहद कम और धीमा है। हमें पता ही नहीं कि क्या करना चाहिए? पहली लहर के दौरान हमने कुछ किया फिर शांत बैठ गए। दूसरी लहर के बाद हम फिर वहीं खड़े हैं। हमें जो करना चाहिए, वह भी नहीं कर पा रहे हैं।

खबरें और भी हैं...