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पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध का एकमात्र मंदिर:ऑस्ट्रेलिया में तंजावुर की तर्ज पर ग्रेनाइट का सबसे बड़ा मंदिर तैयार, तमिल हिंदुओं ने 20 करोड़ रुपए से कराया पुनर्निर्माण

7 महीने पहलेलेखक: मेलबर्न से अमित चौधरी
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मेलबर्न का श्रीवक्रतुंड विनयगर मंदिर भारत से बाहर पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध का एकमात्र मंदिर है, जिसे ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है। - Dainik Bhaskar
मेलबर्न का श्रीवक्रतुंड विनयगर मंदिर भारत से बाहर पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध का एकमात्र मंदिर है, जिसे ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है।

मेलबर्न का श्रीवक्रतुंड विनयगर मंदिर भारत से बाहर पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध का एकमात्र मंदिर है, जिसे ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है। भगवान गणेश के इस मंदिर को हाल ही में नया रूप देकर खोला गया है। इस मंदिर का डिजाइन विश्व धरोहर तंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर से लिया गया है।

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष बाला कांदिआ के मुताबिक, मंदिर का निर्माण पिछले साल जून में खत्म होना था, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से यह टलता रहा। इसमें 20 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। गणेश मंदिर के अलावा यहां अन्य देवी-देवताओं के 11 मंदिर भी बनाए गए है।

मूर्ति खरीदने के पैसे नहीं थे, शंकराचार्य की दी ईंट से रखी गई नींव

श्री वक्रतुंड विनयगर मंदिर के प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष बाला कांदीआ बताते हैं कि 1988 में श्रीलंका में ग्रह युद्ध शुरू होते ही तमिल हिंदुओं को देश छोड़ना पड़ा था। इन्होंने ऑस्ट्रेलिया में शरण ली। मेलबर्न में कोई दक्षिण भारतीय मंदिर नहीं था, इसलिए लोगों ने मंदिर बनाने का संकल्प लिया। लेकिन इसके लिए पैसा किसी के पास नहीं था। मंदिर के मौजूदा सचिव शान पिल्लै तमिलनाडु से मूर्ति लाए। इसके बाद चंदा जुटाना शुरू हुआ। 1990 में मेलबर्न के पूर्वी इलाके में जमीन खरीदी गई।

350 टन ग्रेनाइट लगा

  • 350 टन ग्रेनाइट के 1200 अलग-अलग पत्थर, एक के ऊपर एक जोड़कर 17 लेयर्स में लगे हैं।
  • सबसे छोटे पत्थर का वजन 250 किलो, सबसे भारी 6 टन है।
  • तमिलनाडु में महाबलीपुरम के 100 शिल्पकारों ने ग्रेनाइट पत्थरों को तराशा, फिर ऑस्ट्रेलिया भेजा गया। डिजाइन में आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अरुण में और चेन्नई की उमा नरसिम्हन ने सहयोग दिया है।