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अफगानी मां की मजबूरी:दो वक्त के खाने को हैं मोहताज, पति का लिया कर्ज नहीं चुकाया तो साहूकार को सौंपनी होगी 5 साल की बेटी

काबुल15 दिन पहले
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अफगानिस्तान के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। तालिबानी राज और बदहाल अर्थव्यव्यवस्था के चलते लोग गरीबी और भुखमरी से जूझ रहे हैं। लोगों को कर्ज चुकाने के लिए अपने बच्चों को बेचने पर मजबूर होना पड़ता है या फिर साहूकार को अपनी बेटी देनी पड़ती है।

हेरात प्रांत से एक ऐसी लाचार और मजबूर मां की झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है, जिसे अपने पति द्वारा लिए गए 1500 अमेरिकी डॉलर का कर्ज नहीं चुका पाने पर बेटी को साहूकार को सौंपना पड़ सकता है।

सिरिंगुल मुसाजी नाम की यह महिला अफगानिस्तान के हेरात प्रांत के शहर सब्ज क्षेत्र में सात बच्चों के साथ एक तंबू में जिंदगी गुजर रही है। मुसाजी बताती हैं कि उसके पति ने 1500 डॉलर यानी 1,10,887 भारतीय रुपये का कर्ज लिया था। उसके पास दो वक्त के खाने का इंतजाम नहीं है, ऐसे में वह यह कर्ज कहां से चुकाएगी। पति नशेड़ी है, उसने मुझे और बच्चों को मरने के लिए छोड़ दिया। आखिरी बार 8 महीने पहले उसे देखा था।

कर्ज चुकाओ या बेटी देकर साहूकार से मुक्ति पाओ
पाकिस्तानी समाचार पत्र द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, मुसाजी का कहना है कि अगर वह अपने पति का लिया कर्ज नहीं चुका सकती है तो उसे अपनी 5 साल की बेटी सलीहा को कर्जदाता को बेचना होगा। उसके पास दो ही रास्ते हैं- या तो वे कर्ज चुका दें या फिर अपनी बच्ची को गंवा दें। मेरा कोई रिश्तेदार भी नहीं है, जो मेरी मदद कर सके।

लेनदार अपने बेटे से कराना चाहता है सलीहा का निकाह
कर्जदाता हजरत खान का कहना है कि मुसाजी के पति ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज लिया था। वह भी गरीब है और अपना गुजारा करने में असमर्थ है। ऐसे में वह अपना पैसा वापस लेना चाहता है या फिर अपने 12 साल के बेटे का सलीहा से निकाह कराना चाहता है। आखिरी फैसला मूसाजी का ही होगा।