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  • The Plight Of Women As The Taliban Return; 'Colleges Closed, Burqa Shops Are Opening; Mother Thinks That She Will Save Me From Taliban By Wearing A Burqa.

अफगानिस्तान से आपबीती:कॉलेज बंद, बुर्के की दुकानें खुल रहीं; मां को लगता है कि वो बुर्का पहनाकर मुझे तालिबान से बचा लेंगी

2 महीने पहले
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काबुल पर कब्जे के साथ ही एक बार फिर अफगानिस्तान पर तालिबान काबिज हो गया है। देश के 75% इलाके पर अब तालिबान की हुकूमत है। इसी के साथ अफगानिस्तान में भारी तबाही, औरतों पर बंदिशों और कत्लेआम वाला दौर लौट आया है। तालिबान ने महिलाओं पर पाबंदियां लगानी शुरू कर दी हैं।

लड़कियों के पढ़ने-लिखे, स्कूल-कॉलेज जाने और महिलाओं के दफ्तर जाने पर रोक लगा दी है। बिना पुरुष के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी गई है। औरतों का बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। तालिबान का फरमान नहीं मानने पर कड़ी सजा भी दी जा रही है।

आजादी मांग रहीं महिलाएं
इन सबके बीच अफगानिस्तान की महिलाएं आजादी मांग रही हैं और अपना दर्द साझा कर रही हैं। अफगानिस्तान की फैशन फोटोग्राफर फातिमा कहती हैं- ‘अफगानी महिलाएं दुनिया की सबसे स्टाइलिश औरतों में से मानी जाती हैं। पर तालिबान के लौटने से उन्हें फिर से बुर्के में लौटना पड़ रहा है।’

स्कूल-कॉलेज बंद करवाए
यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 26 वर्षीय हबीबा कहती हैं- ‘तालिबान ने स्कूल कॉलेज बंद करवा दिए हैं। लेकिन बुर्के की दुकानें खुल रही हैं। इनमें भी मोटे कपड़े वाले ऐसे बुर्के की मांग सबसे ज्यादा है, जो महिलाओं को पूरी तरह ढंक देता हो। मेरी मां मिन्नतें कर रही हैं कि मैं और मेरी बहन बुर्का पहनना शुरू कर दें।’

‘मां को लगता है कि वे हमें बुर्का पहनाकर तालिबान से बचा लेंगी। लेकिन हमारे घर में बुर्का है ही नहीं और न ही मैं बुर्का खरीदना चाहती हूं। बुर्का पहनने का मतलब होगा कि मैंने तालिबान की सत्ता को स्वीकार कर लिया है। मैंने उन्हें खुद को कंट्रोल करने का अधिकार दे दिया है। मुझे डर है कि जिन उपलब्धियों के लिए मैंने इतनी मेहनत की वो सब मुझसे छिन जाएंगी।’

तालिबान का निर्देश है कि कोई भी महिला बिना बुर्के के नहीं घूम सकती।
तालिबान का निर्देश है कि कोई भी महिला बिना बुर्के के नहीं घूम सकती।

अब मैं शायद कभी ग्रेजुएशन न कर पाऊं...
22 साल की आयशा काबुल यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस का कोर्स कर रही हैं। वो कहती हैं, ‘मेरे फाइनल सेमेस्टर पूरा होने में महज दो महीने ही बाकी रह गए हैं। पर अब शायद मैं कभी ग्रेजुएट नहीं हो पाऊंगी। लोग सदमे में हैं। किसी की आंखों में आंसू नहीं हैं। कोई नहीं समझ पा रहा कि क्या महसूस करें।’

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