21वीं सदी में जॉइंट फैमिली का कुनबा मजबूत:रिपोर्ट में दावा- 50 सालों में अमेरिका में संयुक्त परिवारों का ट्रेंड तेजी से बढ़ा

वॉशिंगटन9 महीने पहले
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करीब 20 साल पहले अमेरिकी सोशियोलॉजिस्ट वर्न बैंग्ट्सन ने अपने संबोधन में संभावना जताई थी कि 21वीं सदी में अमेरिका में संयुक्त परिवारों (जॉइंट फैमिली) का कुनबा मजबूत होगा। उन्होंने सालों तक किए गए कैलिफोर्निया के 300 परिवारों की पीढ़ियों के शोध के आधार पर ये अनुमान जताया था। लेकिन उस समय न्यूक्लीयर फैमिली (एकल परिवार) मॉडल को ही आदर्श मानने वाले अमेरिका के लिए ये अनुमान चौंकाने वाला था।

हालांकि अब उनकी बात सही साबित हुई है। प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि बीते 50 सालों में अमेरिका में संयुक्त परिवारों का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। इन्हें मल्टी-जेनेरेशनल फैमिली भी कहा जाता है, जिसमें एक ही छत के नीचे कई पीढ़ियां साथ रह रही हों। 1971 के बाद ऐसे परिवारों में चौगुनी बढ़ोतरी हुई।

एक-साथ रहना अच्छा लगता है
मार्च 2021 तक अमेरिका में 6 करोड़ से ज्यादा ऐसे परिवार हो गए थे। प्यू के मुताबिक एशियाई खासकर भारतीय, अश्वेतों और लैटिन अमेरिकियों की यह परिवार व्यवस्था अब श्वेत अमेरिकियों में भी तेजी से जगह बना रही है। रिसर्च टीम ने कई पीढ़ियों और परिजनों से साथ रहने के बारे में पूछा तो 57% ने अपने अनुभव पॉजिटिव बताए।

दूर रहकर भी अपनों के साथ नहीं छूटता
आइडियल अमेरिकी न्यूक्लियर फैमिली के बारे में इतिहासकार स्टेफनी कोंट्ज ने लिखा है- परिवार यानी कमाई करके लाने वाला एक पिता, देखभाल करने वाली मां। जो परिवार जैसे अहम हिस्से से जिंदगी भर अलग-थलग ही रहे और बच्चों की देखभाल के लिए रिश्तेदारों और दोस्तों पर ही निर्भर रहे। 2015 में द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक स्टडी में पता चला था कि औसत अमेरिकी अपने माता-पिता से 28-30 किमी की दूरी पर रहते हैं। नतीजे में बताया गया था कि परिवार के साथ घर साझा करना जरूरी नहीं है। आप करीब रहकर भी परिजनों से मदद ले सकते हैं।

स्टडी में अर्थशास्त्री जेनिस क्रॉम्पटन और रॉबर्ट पोलाक के एक रिसर्च पेपर का हवाला भी दिया था, जिसमें कहा गया कि यदि शादी के बाद लड़के या लड़की की मां साथ रहे तो विवाहित महिलाओं की वर्कफोर्स में 10% बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

आंकड़ों से इतर मैं अपना अनुभव बताती हूं। मैं अपने माता-पिता के घर से 16-17 किमी दूरी पर रहती हूं। मेरे दोनों बच्चों की देखभाल में उन्होंने अनगिनत बार मेरी मदद की। कोरोना काल को ही देखें, अगर उनकी मदद नहीं मिलती तो मुझे या पति को घर ही बैठना पड़ता। वैसे भी बच्चों की बॉन्डिंग माता-पिता की तुलना में दादा-दादी या नाना-नानी से ज्यादा मजबूत होती है। क्योंकि माता-पिता की तरह वे बच्चों पर होमवर्क, ब्रश करना और मस्ती न करने जैसे दबाव नहीं डालते। उनकी डांट भी बच्चों को आहत नहीं करती।

एकल परिवार मॉडल गलत नहीं है
इन सारे फायदों के बावजूद वयस्क होने के बाद माता-पिता के साथ रहना का अनुभव कभी-कभी अच्छा नहीं भी हो सकता है। पर सच्चाई यही है कि अमेरिका में अब यह आदर्श बन रहा है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि नया दौर चुनौतियों को साथ लेकर आता है। न ही कोई ये साबित करने की कोशिश कर रहा है कि एकल परिवार मॉडल गलत है। पर हमें इसे स्वीकार करना चाहिए, जो कोरोना महामारी के बाद हमारी देखभाल के बुनियादी ढांचे में फैली अराजकता के रूप में साफ तौर पर दिखा।

हॉरिजोंटल स्ट्रक्चर बेहतर है
प्यू रिसर्च के मुताबिक करीब 130 साल बाद 2014 में 18-34 साल के युवाओं की माता-पिता के साथ रहने की संभावना ज्यादा मजबूत हुई। क्योंकि वे जीवन साथी या पार्टनर के साथ खुद के घर में रह रहे थे। 2021 में यह ट्रेंड दमदारी के साथ दिखा। अमेरिकी समाजशास्त्री भी इस बात को मानने लगे हैं कि कई पीढ़ियों वाली परिवार प्रणाली यानी हॉरिजोंटल स्ट्रक्चर बेहतर है।

साथ रहने में मैच्योरिटी आती है
महामारी के दौरान हार्वर्ड ने एक स्टडी की थी। इसमें पता चला कि 18-25 साल के अमेरिकी वयस्कों खासकर मदर्स ने भयंकर अकेलापन महसूस किया। जो महामारी से पहले केवल बुजुर्गों तक सीमित था। लेखिका कैटलिन ग्रीनिज अपनी मां और बहनों के साथ रहने के अनुभव को साझा करते हुए लिखती हैं- इस जुगलबंदी ने और मेच्योर बना दिया है। कभी हम लोग किसी पुराने डांस स्टेप पर थिरकने लगते हैं तो कभी एक दूसरे से ईर्ष्या करते हैं। मान लीजिए वीकेंड पर आप सोने के मूड में हैं और बच्चे सुबह 6.30 से बजे से उठकर शोर मचाने लगे हैं। ये सब होते हुए भी घर में सबके साथ अच्छा ही लगता है। 2020 में लेखक डेविड ब्रूक्स ने अपने लेख में लिखा एकल परिवार एक बड़ी गलती थी। इससे भी बड़ी गलती यह रही कि इसके लचीलेपन को छिपाने की कोशिश की गई।

ईश्वर ने दुनियाभर की मदर्स को विशेष साहस और हर स्थिति में ढलने की गजब की क्षमता दी है। अबीगेल टकर लिखती हैं कि अगर प्रसव के बाद महिलाओं को उनके परिवार का साथ मिलता है तो उनके डिपरेशन में आने की आशंका न के बराबर हो जाती है।