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ब्रिटेन के कॉर्नवाल में 47वां शिखर सम्मेलन शुरू:जी-7 देशाें से दुनिया को 100 करोड़ टीके मिलने की उम्मीद, ब्रिटेन दुनिया काे 10 कराेड़ खुराकें देगा

2 महीने पहले
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सम्मेलन से पहले बाइडेन और जॉनसन की गुफ्तगू। - Dainik Bhaskar
सम्मेलन से पहले बाइडेन और जॉनसन की गुफ्तगू।

विकसित देशाें के समूह जी-7 से कोरोना टीके की 100 करोड़ खुराकें दुनिया काे मिलने की उम्मीद है। ब्रिटेन की मेजबानी में हाे रहे जी-7 के 47वें सम्मेलन में इसकी घाेषणा हो सकती है। हालांकि अपनी ओर से ब्रिटिश प्रधानमंत्री बाेरिस जाॅनसन ने शुक्रवार काे घोषित कर दिया कि उनका देश दुनिया काे टीके की 10 कराेड़ खुराकें देगा। इसमें से पांच लाख खुराकों की आपूर्ति अगले सप्ताह से की जाएगी।

जाॅनसन ने कहा, ‘ब्रिटेन के सफल टीकाकरण कार्यक्रम के बाद अब हम अन्य देशों के साथ वैक्सीन साझा कर सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि जी-7 शिखर सम्मेलन में मेरे साथी नेता इसी तरह का संकल्प लेंगे। हम मिलकर अगले वर्ष के अंत तक पूरे विश्व का टीकाकरण कर सकेंगे।’ बताते चलें कि जी-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन ब्रिटेन के कॉर्नवाल में किया जा रहा है।

इसकी शुरुआत शुक्रवार से हाे गई है। पिछले हफ्ते बोरिस जॉनसन ने जी-7 के सहयोगी देशाें- कनाडा, फ्रांस, अमेरिका, इटली, जर्मनी और जापान के शासन प्रमुखों से बात की थी। उनसे कहा था कि वे अगले साल के आखिर तक पूरी दुनिया को टीका लगाने का लक्ष्य तय करें। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने अमेरिका के संकल्प का स्वागत करते हुए कहा था कि यूरोप को भी ऐसा कदम उठाना चाहिए।

अमेरिका का 50 कराेड़ डाेज दान करना नाकाफी

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा है कि दुनिया को कोरोनारोधी टीके की 50 करोड़ खुराक देना काफी नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को काेराेना के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में और अधिक टीके दान करने पर विचार करना चाहिए।

टीकों के मामलों में बौद्धिक संपदा के नियमों में छूट मिले
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने टीकों और इसके कंपोनेंट के निर्यात पर प्रतिबंध की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा- ‘इन पाबंदियों का भारत जैसे देशों में कोरोना टीकों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इन पर ढील देने की जरूरत है। टीकों के मामलों में बौद्धिक संपदा के नियमों से छूट दी जाना चाहिए।’ असल में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने भी यह सुझाव विश्व व्यापार संगठन को दिया है। लेकिन इसका जर्मनी समेत कुछ देश विरोध कर रहे हैं।

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