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थाईलैंड में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन:राजधानी बैंकॉक में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, संविधान बदलने और दोबारा चुनाव कराने की मांग की

बैंकॉक7 महीने पहले
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में शनिवार को डेमाेक्रेसी मोनुमेंट के पास लोगों ने सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया।
  • यह प्रदर्शन लिबरेशन यूथ ग्रुप के बैनर तले किया गया, इसमें ज्यादातर युवा शामिल हुए
  • प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बैंकॉक के डेमोक्रेसी मोनुमेंट के पास बैरिकेडिंग कर दी

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हजारों लोगों ने शनिवार को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने देश में नया संविधान बनाने, दोबारा चुनाव कराने और ऐसे कानून खत्म करने की मांग की जो लोगों के खिलाफ हैं। यह प्रदर्शन लिबरेशन यूथ ग्रुप के बैनर तले किया गया। इसमें ज्यादातर युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बैंकॉक के डेमोक्रेसी मोनुमेंट के पास बैरिकेडिंग कर दी। इमरजेंसी कानून का हवाला देते हुए प्रदर्शन खत्म कराया गया।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री प्रयुत्त चान-ओ-चा के खिलाफ 2014 से ही लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रयुत्त तख्ता पलट करके देश की सत्ता पर आए थे। लोग सरकार के कामकाज में सेना के बढ़ते दखल से नाराज हैं और प्रयुत्त ओ चान से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 

देश में फिलहाल लागू है इमरजेंसी कानून

थाईलैंड में महामारी को देखते हुए इमरजेंसी कानून लागू किया गया है। इससे संक्रमण रोकने में मदद मिली है। इसके साथ ही सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भी कमी आई है। हालांकि, लोगों का आरोप है कि सरकार इमरजेंसी कानून को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। फरवरी में यहां की अदालत ने एक पार्टी को भंग करने का आदेश दिया था। यह पार्टी अपने लोकतांत्रिक नीतियों के कारण युवाओं में लोकप्रिय थी। इसके बाद भी प्रदर्शन हुए थे।

क्यों सरकार के खिलाफ हो रहे हैं प्रदर्शन?
2014 में थाईलैंड में सरकार का तख्ता पलट किया गया था। इसके बाद सेना में जनरल रहे प्रयुत प्रधानमंत्री बने थे। इसके दो साल बाद 2016 में देश का नया संविधान तैयार हुआ और जनमत कराया गया। संविधान में ऐसे बदलाव किए गए कि लोकतंत्र बहाली के बाद भी सत्ता पर सेना की पकड़ बनी रहे। 2019 में यहां चुनाव भी हुआ। इसमें प्रयुत्त की पार्टी को जीत मिली। हालांकि, इसके बाद चुनाव में गड़बड़ी करने के आरोप भी लगे। अब यहां लोग संविधान और जन विरोधी कानून को बदलने की मांग कर रहे हैं।

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