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चीनी कब्जे पर नेपाल में उठी आवाज:नेपाल के तीन सांसदों की मांग- चीन ने हमारे 4 जिलों की 158 एकड़ जमीन पर कब्जा किया, प्रधानमंत्री इसे वापस दिलाएं

काठमांडू4 महीने पहले
फोटो जून 2018 का है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में मुलाकात की थी। अब नेपाल के एक अखबार ने खुलासा किया है कि चीन ने देश की काफी जमीन हड़प ली है। (फाइल फोटो)
  • चीन ने नेपाल के हुमला, सिंधुपालचौक, गोरखा और रसुवा जिलों की कई हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया है
  • चीन ने गोरखा जिले में सीमा पर पिलर नंबर 35 शिफ्ट कर दिया, इससे रुई गुवान गांव उनके कब्जे में चला गया

नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन का कब्जा सामने आने के बाद इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के तीन सांसदों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चिट्ठी लिखकर चीन से जमीन वापस लेने की मांग की है। सांसदों के मुताबिक, चीन ने नेपाल के कई जिलों की 64 हेक्टेयर (करीब 158 एकड़) जमीन पर कब्जा कर लिया है। इनमें हुमला, सिंधुपालचौक, गोरखा और रसुवा जिले शामिल हैं। यह चिट्ठी प्रतिनिधि सभा के सचिव के जरिए प्रधानमंत्री तक पहुंचाई गई है। 

पूरा गांव अब चीन के कब्जे में

सांसदों ने कहा- चीन और नेपाल सीमा पर मौजूद पिलर नंबर 35 को चीन ने अपनी तरफ शिफ्ट कर लिया है। इससे गोरखा जिले का रुई गुवान गांव उनके कब्जे में चला गया। अब इस गांव के 72 परिवार चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) के नागरिक बताए जा रहे हैं। धारचूला जिले के 18 घरों पर भी चीन दावा कर रहा है।

रुई गुवान पर 60 साल से चीन का कब्जा
नेपाल की जमीन पर चीन के कब्जे का खुलासा बुधवार को लोकल अखबार ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ ने किया था। अखबार के मुताबिक, रुई गुवान गांव में 60 साल से चीन का राज चल रहा है।  नेपाल की सरकार ने कभी इसका विरोध नहीं किया। नेपाल सरकार के आधिकारिक नक्शे में भी यह गांव नेपाल की सीमा के भीतर ही दिखाया गया है। गोरखा जिले के रेवेन्यू दफ्तर में भी रुई गुवान गांव के लोगों से टैक्स वसूली के दस्तावेज हैं। हालांकि, यहां नेपाल सरकार ज्यादा एक्टिव नहीं है। शायद यही वजह है कि इस इलाके पर चीन ने कब्जा कर लिया है।

मार्किंग कर रहा चीन

चीन ने जिन इलाकों पर कब्जा किया है उनको लेकर उसका कभी नेपाल से समझौता भी नहीं हुआ। यह सिर्फ सरकारी लापरवाही का नतीजा है। दोनों देशों ने सीमाएं तय करने और पिलर लगाने के लिए 1960 में काम शुरू किया था। लेकिन, जानबूझकर पिलर नंबर 35 को ऐसी जगह लगाया गया, जिससे नेपाल का इलाका चीन में चला गया। इसके अलावा वह अब चेकम्पार सीमा के कई इलाकों पर भी पिलर लगाकर मार्किंग शुरू कर रहा है। 

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