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रॉकेट हमले में अमेरिका-ब्रिटेन के सैनिकों समेत 3 की मौत, 5 महीने में गठबंधन सेना पर 22वां हमला

एक वर्ष पहले
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ताजी बेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिक स्थानीय फौज को आतंकियों से लड़ने में मदद करते हैं। - Dainik Bhaskar
ताजी बेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिक स्थानीय फौज को आतंकियों से लड़ने में मदद करते हैं।
  • इराक की राजधानी बगदाद के उत्तर में ताजी एयर बेस को बुधवार शाम रॉकेट से निशाना बनाया गया
  • हमले के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने तीन विमानों से आतंकियों के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की

बगदाद. इराक की राजधानी बगदाद के उत्तर में ताजी एयर बेस पर बुधवार को रॉकेट हमला किया गया। इसमें एक अमेरिका और एक ब्रिटेन के सैनिक समेत एक कॉन्ट्रेक्टर की मौत हो गई। अक्टूबर से अब तक गठबंधन सेना पर यह 22वां हमला है। अमेरिका ने दावा किया कि यह हमला बेस पर मौजूद सैनिकों पर किया गया। 


सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स वॉर मॉनिटर के मुताबिक, बेस पर रॉकेट हमले के एक घंटे बाद अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सीरिया में आतंकियों के ठिकानों पर तीन विमानों से एयर स्ट्राइक की और बम बरसाए। ताजी बेस पर मौजूद अमेरिकी नेतृत्व के सैनिक स्थानीय सेना को आतंकियों से लड़ने में मदद करते हैं।

इराक की सेना का दावा- 10 रॉकेट दागे गए
इराक की सेना ने दावा किया कि 10 रॉकेट ट्रक से दागे गए। हालांकि, हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है। हाल ही में वॉशिंगटन ने इस तरह के हमलों में इराक में सक्रिय हशद अल शाबी के मिलिट्री नेटवर्क को लेकर आशंका जताई थी। वॉशिंगटन के मुताबिक, इस तरह के हमलों को अंजाम देने के लिए इस नेटवर्क को ईरान से मदद मिल रही है।

दिसंबर में भी अमेरिकी सैनिक की मौत हुई थी
इससे पहले दिसंबर में आतंकियों के हमले में एक सैनिक की मौत हो गई थी। इसके दो दिन बाद आतंकी संगठन हशद अल शाबी के लिए काम करने वाले कटैब हिज्बुल्लाह के आतंकियों पर अमेरिका ने बम बरसाए थे। इनमें हिज्बुल्लाह के 25 सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में आतंकियों ने 31 दिसंबर को बगदाद में अमेरिकी दूतावास को घेर लिया था।

ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने कार्रवाई की
3 जनवरी को अमेरिका ने बगदाद एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले में ईरान के मिलिट्री कमांडर कासिम सुलेमानी और हशद के डिप्टी चीफ अबु महदी अल मुहांदिस समेत तीन लोगों को मार गिराया था। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइलों से इराक के पश्चिमी बेस एइन-अल-असद बेस पर हमला किया था। इस हमले में किसी सैनिक की मौत तो नहीं हुई मगर ज्यादातर सैनिकों को ब्रेन इंज्यूरी हुई थी।