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द न्यूयॉर्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत:कंबोडिया में 1,000 कलाकृतियां चुराने वाला टिक बना पुलिस का मददगार, स्कंद-शिव समेत 45 प्रतिमाएं लौटीं

6 दिन पहले
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मूर्तियों का लुटेरा कैंसर ग्रस्त टिक खमेर विरासत लौटाना चाहता है। - Dainik Bhaskar
मूर्तियों का लुटेरा कैंसर ग्रस्त टिक खमेर विरासत लौटाना चाहता है।

दक्षिण पूर्वी देश कंबोडिया के घने जंगलों में पुरातत्ववेत्ताओं के साथ लगभग 70 साल का टोइक टिक विरासत की खोज में जुटा है। 70 के दशक में टिक ने कंबोडिया के जंगलों में बने हजारों साल पुराने मंदिरों से लगभग 1000 मूर्तियां चुराईं। इन मूर्तियों को टिक ने चंद डॉलर के बदले में दलालों को बेच दिया। 90 के दशक में मूर्ति चाेरी का धंधा छोड़ने के बाद टिक को कैंसर हो गया। अब टिक ने कंबोडिया की इन धरोहरों को वापस लौटाने की ठानी है। इसके लिए वो पुरातत्ववेत्ताओं के साथ उन स्थानों पर जाता है जहां से उसने मूर्तयां चुराईं थीं।

टिक की याददाश्त इतनी तेज है कि उसे आज भी वो जगहें याद हैं जहां से उसने चोरी की थी। टिक की गवाही से निशानदेही से अब तक 100 मूर्तियों की पहचान हो चुकी है जिन्हें उसने चुराया था और जो अब दुनिया भर के मशहूर म्यूजियम में हैं। इनमें न्यूयॉर्क का मेट्रोपोलेटिन म्यूजियम भी है। टिक की गवाही से कंबोडिया सरकार ने अबतक दुनिया भर के म्यूजियम से 45 मूर्तियों को देश में लाने में सफलता पाई है। इसमें स्कंद-शिव की विश्व विख्यात मूर्तियां शािमल हैं जाे वापस कंबोडिया लौटीं।

खमेर संस्कृति का मशहूर विशेषज्ञ समझा जाने वाला लैचफोर्ड कराता था उससे चोरियां
टिक की गवाही से एक सनसनीखेज खुलासा भी हुआ। दुनिया भर में कंबोडिया की खमेर संस्कृति का विशेषज्ञ समझा जाने वाला डगलस लैचफोर्ड दरअसल चोरी की मूर्तियाें को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने वाला दलाल था। टिक उसके गुर्गे के जंगलों से मंदिरों की तस्वीरें खींच कर लाता था। ये तस्वीरें देखने के बाद लैचफोर्ड तय करता था कि कौन सी मूर्ति चोरी करनी है। 70 के दशक में गोरिल्ला संगठन खमेर रूज से भी जुड़े रहे टिक को चंद डॉलर मिलते थे जबकि लैचफोर्ड लाखों डाॅलर कमाता था।

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