टाइम मैगजीन / पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा पर्सन ऑफ द ईयर चुनी गईं, सबसे कम उम्र में हासिल किया यह सम्मान

ग्रेटा थनबर्ग ने 15 साल की उम्र में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अपने देश स्वीडन की संसद के बाहर अकेले प्रदर्शन किया था। ग्रेटा थनबर्ग ने 15 साल की उम्र में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अपने देश स्वीडन की संसद के बाहर अकेले प्रदर्शन किया था।
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ग्रेटा थनबर्ग ने 15 साल की उम्र में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अपने देश स्वीडन की संसद के बाहर अकेले प्रदर्शन किया था।ग्रेटा थनबर्ग ने 15 साल की उम्र में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अपने देश स्वीडन की संसद के बाहर अकेले प्रदर्शन किया था।

  • ग्रेटा थनबर्ग से पहले 25 साल के चार्ल्स लिंडबर्ग को 1927 में पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया था
  • थनबर्ग ने इसी साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में दुनिया के शक्तिशाली नेताओं पर ग्रीन हाउस उत्सर्जन से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था

Dainik Bhaskar

Dec 12, 2019, 09:34 AM IST

न्यूयॉर्क. स्वीडन की 16 साल की ग्रेटा थनबर्ग को अमेरिका की टाइम मैगजीन ने 2019 का पर्सन ऑफ द ईयर चुना है। उन्होंने सबसे कम उम्र में यह सम्मान हासिल किया है। उनसे पहले 25 साल के चार्ल्स लिंडबर्ग को 1927 पर्सन ऑफ द ईयर चुने गए थे। जिस समय इसका ऐलान हुआ है, उस समय वह (थनबर्ग) मेड्रिड में यूएन क्लाइमेट फोरम की बैठक में थीं। वहां भी उन्होंने विकसित देशों पर आरोप लगाया कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर वह केवल दिखावे की कार्रवाई कर रहे हैं।  

ग्रेटा इस साल सितंबर में चर्चा में आईं थीं, जब उन्होंने संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में दुनिया के शक्तिशाली नेताओं पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंतानियो गुतारस भी मौजूद थे। इससे पहले वह अपने देश की संसद के बाहर भी जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर प्रदर्शन कर चुकी हैं। 

टाइम मैगजीन ने कहा- ग्रेटा थनबर्ग सबसे बड़े मुद्दे पर बड़ी आवाज बनकर उभरीं

मैगजीन ने ग्रेटा को 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुने जाने पर लिखा, ‘‘साल भर के अंदर ही स्वीडन की 16 साल की लड़की ने अपने देश की संसद के बाहर प्रदर्शन किया और फिर दुनियाभर में युवाओं के आंदोलन का नेतृत्व किया।’’ मैगजीन ने लिखा कि, इतने कम वक्त में ही उन्हें (ग्रेटा) संयुक्त राष्ट्र महासचिव से मुलाकात का मौका मिला, तो वहीं उन्हें सुनने वालों में बड़े देशों के राष्ट्रपति के साथ ही पोप भी शामिल रहे। वह धरती के सबसे बड़े मुद्दे पर सबसे बड़ी आवाज बनकर उभरी हैं। वह(थनबर्ग) कार्रवाई की मांग करती है। उनका कहना है कि कई कदम गलत दिशा में उठाए जा रहे हैं, इसमें सुधार होना चाहिए।

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