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नई रिपोर्ट में खुलासा:जिम्बाब्वे में फेरी लगाकर बदले जा रहे फटे-पुराने डॉलर, लोगों का बैंकों पर भरोसा नहीं, गद्दों के नीचे रखते हैं नोट

हरारे2 महीने पहले
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जिम्बाब्वे ​​​​​​​ की मुद्रा का बहुत ज्यादा अवमूल्यन हो चुका है। - Dainik Bhaskar
जिम्बाब्वे ​​​​​​​ की मुद्रा का बहुत ज्यादा अवमूल्यन हो चुका है।

जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे की गलियों में इन दिनों लाउडस्पीकर पर फटे-पुराने अमेरिकी डॉलर बदले जा रहे हैं। फेरी लगाने वाले कमाई भी कर रहे हैं। 20 डॉलर के नोट के बदले 15 से 18 डॉलर तक दिए जाते हैं। यहां तक कि जिम्बाब्वे ​​​​​​की सरकार भी इन डॉलरों की अदला-बदली को परोक्ष रूप से बढ़ावा दे रही है। दरअसल जिम्बाब्वे की मुद्रा का बहुत ज्यादा अवमूल्यन हो चुका है। महंगाई दर 54 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

वैसे पिछले साल तक मंहगाई दर लगभग 700 फीसदी के आंकड़े तक पहुंच चुकी थी। लोगों को छोटी-छोटी चीजें खरीदने के लिए भी बहुत ज्यादा जिम्बाब्वे ​​​​​​​डॉलर खर्चने पड़ रहे थे। सरकार की हालत ये थी कि अर्थव्यवस्था की गिरती स्थिति के कारण वो और अधिक नोट नहीं छाप सकती। ऐसे में अमेरिकी डॉलर की खासी मांग है। फटे-पुराने अमेरिकी डॉलर नोटों को भी बदलने का तरीका अपनाया है।

डॉलर बदलने वाले कैटानो कसानी का कहना है कि अमेरिकी डॉलर का सीरियल नंबर और कुछ और फीचर सलामत होने चाहिए, वो बदल देता है। जिम्बाब्वे के लोगों को अपने देश के बैंकों पर भरोसा नहीं है। वे लोग नोटों को बैंकों में जमा कराने की बजाए गद्दों के नीचे रखते हैं।

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