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दुनियाभर में ट्रैक्टर परेड का ट्रेंड:बर्लिन में 40 हजार किसानों ने रास्ते ब्लॉक कर दिए थे, नीदरलैंड्स में एक हजार किमी का जाम लगा था

एक महीने पहले

नए कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली। दोपहर एक बजे के बाद परेड के दौरान हिंसा फैल गई। राजधानी में किसानों ने जिस तरह ट्रैक्टर को प्रदर्शन का जरिया बनाया, वैसा ही तरीका विदेशों में भी किसान अपनाते रहे हैं।

जर्मनी के बर्लिन में 40 हजार किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाली थी, जिससे रास्ते तक ब्लॉक हो गए थे। वहीं, नीदरलैंड्स में किसानों ने ऐसा ट्रैक्टर मार्च किया था कि एक हजार किलोमीटर लम्बा जाम लग गया था। आइए जानते हैं दुनिया के ऐसे ही ट्रैक्टर प्रदर्शनों के बारे में...

नीदरलैंड्स: दो हजार किसानों ने ट्रैक्टर से हाईवे घेरा था
नीदरलैंड्स में अक्टूबर, 2019 में किसानों ने सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए ट्रैक्टर परेड निकाली थी। सरकार ने नाइट्रोजन उत्सर्जन कम करने के लिए मुर्गियों और सुअरों की संख्या घटाने का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ दो हजार किसान ट्रैक्टरों के साथ डच हाईवे पर निकले थे। किसान राजधानी द हेग की तरफ जा रहे थे। इससे हाईवे पर करीब एक हजार किलोमीटर लम्बा जाम लग गया था। रास्ते में पुलिस से हुई झड़प के दौरान दो किसानों को गिरफ्तार किया गया था।

नीदरलैंड्स में राजधानी द हेग की तरफ किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला था। इससे डच हाईवे पर एक हजार किलोमीटर का जाम लग गया था।
नीदरलैंड्स में राजधानी द हेग की तरफ किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला था। इससे डच हाईवे पर एक हजार किलोमीटर का जाम लग गया था।

फ्रांस: यहां भी किसानों ने किया था सरकारी कृषि नीति का विरोध
सरकार की नीतियों के विरोध में पेरिस में भी ट्रैक्टर मार्च निकाला गया था। किसानों का कहना था हाईवे को तब तक जाम रखा जाएगा, जब तक राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों उनकी मांगें सुनने के लिए राजी नहीं हो जाते। यहां पेरिस रिंग रोड का नजारा भी दिल्ली बॉर्डर जैसा था। किसानों ने टेंट लगाए थे और सर्दी से बचने के लिए आग जला रखी थी। हालांकि, प्रेसिडेंट ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि ऐसे हालात में राष्ट्रपति और किसान के बीच बातचीत मुमकिन नहीं है।

पेरिस में सरकारी नीतियों के खिलाफ हुए प्रदर्शन में किसान दिल्ली की तरह ही तैयारी करके आए थे। वहां भी किसानों ने रहने के लिए टेंट लगाए थे।
पेरिस में सरकारी नीतियों के खिलाफ हुए प्रदर्शन में किसान दिल्ली की तरह ही तैयारी करके आए थे। वहां भी किसानों ने रहने के लिए टेंट लगाए थे।

जर्मनी: जब 40 हजार किसानों ने घेरी थी बर्लिन की सड़कें
जर्मनी के बर्लिन में नवम्बर, 2019 में 40 हजार किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकालकर सरकार की नई कृषि नीति का विरोध किया था। प्रदर्शन में करीब 8 हजार 600 ट्रैक्टर थे। यह काफिला 10 किलोमीटर लम्बा था। रास्ते ब्लॉक होने के कारण शहर थम सा गया था। पैदल चलने वालों का भी निकलना मुश्किल हो गया था।

जर्मनी में सरकार की एग्रीकल्चर पॉलिसी के खिलाफ 40 हजार किसानों ने प्रदर्शन किया था। इस दौरान आठ हजार से ज्यादा ट्रैक्टरों से बर्लिन के रास्ते ब्लॉक हो गए थे।
जर्मनी में सरकार की एग्रीकल्चर पॉलिसी के खिलाफ 40 हजार किसानों ने प्रदर्शन किया था। इस दौरान आठ हजार से ज्यादा ट्रैक्टरों से बर्लिन के रास्ते ब्लॉक हो गए थे।

बेल्जियम: खेती में सब्सिडी बढ़ाने के लिए पहुंचे कई देशों के किसान
फरवरी, 2020 में सैकड़ों किसान ब्रसेल्स की सड़कों पर उतरे थे। उन्होंने यूरोपियन काउंसिल का दफ्तर घेरा। उनकी मांग थी कि खेती के लिए मिलने वाली सब्सिडी बढ़ाई जाए। इस प्रदर्शन में 100 से ज्यादा ट्रैक्टर आए थे। विरोध दर्ज कराने के लिए यहां बेल्जियम के अलावा आयरलैंड, स्पेन और इटली से भी किसान पहुंचे थे।

बेल्जियम में खेती पर सब्सिडी बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने यूरोपियन काउंसिल का दफ्तर घेरा था। इसमें आयरलैंड, स्पेन और इटली के किसान भी शामिल हुए थे।
बेल्जियम में खेती पर सब्सिडी बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने यूरोपियन काउंसिल का दफ्तर घेरा था। इसमें आयरलैंड, स्पेन और इटली के किसान भी शामिल हुए थे।

आयरलैंड: बीफ की कीमत बढ़ाने के लिए किसानों ने घेरी थी सड़क
डबलिन में जनवरी 2020 में 100 से ज्यादा ट्रैक्टरों के साथ किसानों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन 24 घंटे तक चला। किसान बीफ के दाम 3.60 यूरो से बढ़ाकर 4 यूरो प्रति किलो कराना चाहते थे। इसी बात को लेकर ट्रैक्टर परेड हुई। प्रदर्शन का सबसे ज्यादा असर यहां के किल्डेर स्ट्रीट, मोल्सवर्थ स्ट्रीट, सेंट स्टीफन ग्रीन और मेरियन स्क्वॉयर पर दिखा। किसानों का कहना था कि वे अपनी फसल और उत्पादों के लिए बेहतर कीमत चाहते हैं ताकि आयरलैंड का ग्रामीण हिस्सा तबाह न हो।

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