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ताइवान / चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को बड़ा झटका, साई इंग-विन दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतीं; कहा- संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे

Taiwan President election | Tsai Ing wen re-elected as Taiwan President; said We stand at the forefront of fighting Chinas expansionist policies.
साई ने अपने चुनाव प्रचार में हॉन्गकॉन्ग आंदोलन को प्रमुख मुद्दा बनाया था। साई ने अपने चुनाव प्रचार में हॉन्गकॉन्ग आंदोलन को प्रमुख मुद्दा बनाया था।
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Taiwan President election | Tsai Ing wen re-elected as Taiwan President; said We stand at the forefront of fighting Chinas expansionist policies.
साई ने अपने चुनाव प्रचार में हॉन्गकॉन्ग आंदोलन को प्रमुख मुद्दा बनाया था।साई ने अपने चुनाव प्रचार में हॉन्गकॉन्ग आंदोलन को प्रमुख मुद्दा बनाया था।

  • डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की साई इंग-विन ने कम्युनिस्ट पार्टी की हॉन कू-यू को 80 लाख से ज्यादा वोटों से हराया
  • जीत के बाद साई ने कहा- हम विस्तारवादी नीतियों से लड़ने के लिए खड़े, चीन ताइवान को डराना बंद करे

दैनिक भास्कर

Jan 12, 2020, 03:53 PM IST

ताईपेई. डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की प्रत्याशी साई इंग-विन ने ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव में दूसरे कार्यकाल के लिए जीत हासिल कर ली है। शनिवार को उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी हॉन कू-यू को 80 लाख से ज्यादा वोटों से हराया। जीत के बाद साई ने कहा- इस चुनाव का परिणाम अहम है। हम चीन की विस्तारवादी नीतियों से लड़ने के लिए खड़े हैं। ताइवान के लोगों ने दिखाया है कि जब उनकी संप्रभुता को खतरा होगा, तो वे ज्यादा जोर से आवाज उठाएंगे।’’

साई की जीत को चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 2016 में उनके पहले कार्यकाल के समय से ही कम्युनिस्ट पार्टी उन्हें हराने की कोशिश कर रही थी। चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी की प्रत्याशी को केवल 38% वोट मिले, जबकि साई 57% वोट हासिल करने में कामयाब रहीं।

जीत के बाद साई बोलीं- चीन ताइवान को डराना बंद करे
साई ने कहा कि इस जीत के बाद चीन ताइवान को डराना बंद करना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि बीजिंग के लोग लोकतांत्रिक ताइवान को समझेंगे। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार होने के नाते हम चीन की धमकियों से नहीं डरेंगे। उन्होंने कहा कि ताइवान चीन की विस्तारवादी नीतियों से परेशान दुनिया के अन्य मुल्कों का प्रतिनिधि है। हम अपने लोकतांत्रिक संस्थानों को बचाने के साथ चीन के साथ आर्थिक संबंधों को बनाए रखने की कोशिश भी कर रहे हैं। हम द्विपक्षी बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण माहौल कायम करने के पक्ष में हैं। 

कम्युनिस्ट बनाम डेमोक्रेटिक रहा चुनाव
ताइवान का राष्ट्रपति चुनाव कम्युनिस्ट बनाम डेमोक्रेटिक रहा। कम्युनिस्ट पार्टी ने ‘एक देश, दो प्रणाली’ की अपनी पुरानी नीति के साथ चुनाव लड़ा। साई ने अपने प्रचार में इसका खुलकर विरोध किया। उन्होंने हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के खिलाफ चीन की कार्रवाई को मुद्दा बनाया। साई ने चुनाव प्रचार के दौरान ‘आज हॉन्गकॉन्ग, कल ताइवान’ का नारा दिया। उन्होंने मतदाताओं से ताइवान की प्रशासनिक स्वतंत्रता से किसी प्रकार का समझौता न करने की अपील की।

चीन ने ताइवान को अलग-थलग करने की कोशिश की
चीन लगातार ताइवान को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। चीन ने इसके कूटनीतिक सहयोगियों को दूर कर दिया। मौजूदा समय में दुनिया के केवल 15 देश ही ताइवान को मान्यता देते हैं। इसके पासपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र मान्यता नहीं देता। ताइवान को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए चीन ने अपने सभी नागरिकों का ताइवान द्वीप पर जाना बैन कर दिया है। ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की मांग करने वाली कई कंपनियों को चीन सरकार ने दंडित दिया है।

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