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सऊदी अरब / साथी की हत्या करने पर दो भारतीयों को मौत की सजा, दोनों के सिर काटे गए

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 01:04 PM IST


प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
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  • सऊदी सरकार ने भारतीय दूतावास को इत्तला किए बगैर फरवरी में दे दी सजा
  • सतविंदर होशियारपुर का निवासी था, जबकि हरजीत लुधियाना का रहने वाला था

चंडीगढ़. सऊदी अरब में दो भारतीयों के सिर काटकर उन्हें मौत की सजा दी गई। विदेश मंत्रालय ने मामले की पुष्टि की है। होशियारपुर निवासी सतविंदर सिंह और लुधियाना के हरजीत सिंह पर अपने साथी आरिफ इमामुद्दीन की हत्या का आरोप था। 9 दिसंबर 2015 को हुई वारदात के सिलसिले में दोनों को गिरफ्तार करके रियाद जेल में रखा गया था। मंत्रालय का कहना है कि सऊदी अरब सरकार ने सजा के बारे में भारतीय दूतावास को नहीं बताया। 
 

लूट के पैसे में बंटवारे पर हुआ था विवाद

  1. सूत्रों का कहना है कि हरजीत, सतविंदर और इमामुद्दीन आपस में दोस्त थे। तीनों लूटमार करते थे। लूट के पैसे में बंटवारे को लेकर उनमें विवाद हुआ, जिसमें इमामुद्दीन की हत्या कर दी गई। 

  2. कुछ दिनों बाद हरजीत, सतविंदर को शराब पीकर हुड़दंग मचाने के मामले में पकड़ा गया। सऊदी सरकार उन्हें वापस भारत भेजने की तैयारी कर रही थी। तभी पता चला कि दोनों हत्या के मामले में संलिप्त रहे हैं। दोनों ने इमामुद्दीन की हत्या करने की बात मान ली थी। 

  3. सुनवाई पर भारतीय दूतावास के अधिकारी कोर्ट में मौजूद रहे थे

    विदेश मंत्रालय का कहना है कि 31 मई 2017 को हुई सुनवाई के दौरान भारतीय दूतावास के अधिकारी कोर्ट में मौजूद थे। उनका मामला अपील कोर्ट के पास भेजा गया था। तब इसमें हाइवे पर लूट के आरोप को जोड़ा गया था। इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है। 

  4. सूत्रों का कहना है कि विदेश मंत्रालय ने दोनों को मौत की सजा दिए जाने की बात तब मानी, जब सतविंदर की पत्नी सीमा ने उनसे संपर्क साधा। सीमा को मंत्रालय का पत्र सोमवार को मिला। इसमें कहा गया कि हरजीत और सतविंदर को मौत की सजा दी जा चुकी है। 

  5. मंत्रालय का कहना है कि हरजीत और सतविंदर के मामले में भारतीय दूतावास ने पूरी रुचि दिखाई। अधिकारी हर पेशी में कोर्ट में मौजूद रहे, लेकिन उन्हें फांसी देने की जानकारी दूतावास को नहीं दी गई। सऊदी सरकार ने सजा के बाद दोनों के मृत शरीर भारत सरकार के सुपुर्द करने से भी इनकार कर दिया, क्योंकि दोनों जघन्य अपराध में संलिप्त थे। 

  6. मंत्रालय का कहना है कि हरजीत और सतविंदर 2013 में वर्क परमिट पर सऊदी अरब गए थे। वहीं पर उनकी मुलाकात इमामुद्दीन से हुई। तीनों लूटमार की वारदात कब से कर रहे थे, इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। 

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