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आईएस दुल्हन की कहानी:मेरी दो सहेलियां आईएस में शामिल होने जा रही थीं, मैं भी पीछे नहीं छूटना चाहती थी, तब छोटी थी; अब सब खो चुकी हूं: शमीमा बेगम

लंदन6 दिन पहले
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शमीमा बेगम आईएस में शामिल होने जब ब्रिटेन से भागकर सीरिया गई, तब वे सिर्फ 15 साल की थी। - Dainik Bhaskar
शमीमा बेगम आईएस में शामिल होने जब ब्रिटेन से भागकर सीरिया गई, तब वे सिर्फ 15 साल की थी।

आतंकी संगठन आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया) में वह ‘आईएस दुल्हन’ के नाम से जानी जाती थी। नाम- शमीमा बेगम। साल 2015 में सिर्फ 15 साल की थी, जब ब्रिटेन से भागकर सीरिया गई। आईएस में शामिल होने के लिए। क्याें, कैसे और किन हालात में? इसका जवाब शमीमा खुद देती है।

‘द रिटर्न : लाइफ ऑफ्टर आईएसआईएस’ डॉक्यूमेंट्री में वह बताती है, ‘उस वक्त आईएस की किसी गतिविधि में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो रहे थे। मेरी दो सहेलियां ऐसा करने जा रही थीं। और मैं ऐसी दोस्त बनकर नहीं रहना चाहती थी, जो पीछे छूट जाए। इसलिए उनके साथ चली गई।’ शमीमा अब 21 साल की है। आईएस के चंगुल से छूट चुकी है। उत्तरी सीरिया के अल रोज कैम्प में रह रही है।

वह बताती है- ‘जब मैंने ब्रिटेन छोड़ा, तब बहुत छोटी थी। नासमझ। उस वक्त छुट्टियां थीं। जब मैंने अपनी सहेलियों के साथ जाने का फैसला किया। मैं जानती थी कि यह बड़ा फैसला था। लेकिन मैंने तब खुद को फैसला लेने के लिए मजबूर पाया। मैं फरवरी 2015 में स्कूल की अपनी सहेलियाें मीरा अबास और कादिजा सुल्ताना के साथ सीरिया पहुंची थी। तुर्की होते हुए रक्का तक। लेकिन वहां मीरा और कादिजा बागहुज शहर में मारी गईं।

मेरी सहेलियां मेरा साथ छोड़ गईं। मैं अकेली रह गई। अब महसूस होता है कि मेरा कोई दोस्त नहीं रहा। वही दोनों मेरा सब कुछ थीं। अब मैं सब खो चुकी हूं। आईएस के साथ रहते हुए बीते छह साल में मैंने तीन बच्चों को खोया है। जब मेरी बेटी की मौत हुई, तब मैं खुद को मार देना चाहती थी। मैं बेहद अकेली हो गई थी। लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी।’

सीरिया के शरणार्थी शिविर में मिली थी, तब 9 महीने की गर्भवती थी
फरवरी-2019 में शमीमा सीरिया के अल-रोज शिविर में मिली थी। उस वक्त वह 9 महीने की गर्भवती थी। ब्रिटेन छोड़ने से पहले शमीमा घरवालों के साथ ईस्ट लंदन के बेथनाल ग्रीन इलाके में रहती थी। उसके माता-पिता बांग्लादेशी हैं। लेकिन शमीमा का जन्म ब्रिटेन में ही हुआ है। हालांकि सीरिया में पाए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने उनकी नागरिकता रद्द कर दी है। फरवरी-2021 में ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे वापस लौटने की इजाजत नहीं दी।