बूचा नरसंहार के विलेन की कहानी:रूसी कमांडर ने गैंग रेप और नरसंहार का ऑर्डर दिया; सैनिकों से कहा- 50 से कम उम्र वाले सभी मर्दों को मार दो

कीव/मॉस्को3 महीने पहले

सेपरेट मोटराइज्ड राइफल ब्रिगेड का कमांडर अजात्बेक ओमुरबेकोव, उम्र 40 साल... ये पहचान है 400 यूक्रेनियों की कब्रगाह बन चुके बूचा शहर के गुनहगार की। रूसी मेडल से सम्मानित और ईश्वर को मानने वाले अजात्बेक ने सामूहिक रेप और नरसंहार के ऑर्डर दिए थे। कहा था- 50 साल से कम उम्र वाले सभी मर्दों को मार डालो।

ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने अपनी रिपोर्ट में अजात्बेक को बूचा का कसाई बताया है। अब दुनिया भी उसे बूचा के कसाई नाम से ही जान रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बेगुनाह लोगों पर गोली चलवाने के बाद अजात्बेक ने परिजनों को लाशें दफनाने के लिए सिर्फ 20 मिनट दिए थे।

पढ़िए बूचा के गुनहगार की कहानी...

कहा- जंग में हथियार अहम नहीं

ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी के साथ ले. कर्नल अजात्बेक ओमुरबेकोव।
ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी के साथ ले. कर्नल अजात्बेक ओमुरबेकोव।

अजात्बेक ओमुरबेकोव ने पिछले साल ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी से भी आशीर्वाद लिया था। जिसके बाद उसने कहा- इतिहास बताता है कि हम अधिकतर जंग अपनी आत्मा के साथ लड़ते हैं। हथियार सबसे अहम चीज नहीं है। पिछले दिनों बूचा में हुए दर्दनाक और भयावह नरसंहार ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।

जबरन कपड़े भी उतरवाए

सैनिक और जांच अधिकारी बूचा में जमीन पर पड़े जले शवों को देखते हुए। यहां रूसी सैनिकों पर वॉर क्राइम का आरोप लगाया गया है।
सैनिक और जांच अधिकारी बूचा में जमीन पर पड़े जले शवों को देखते हुए। यहां रूसी सैनिकों पर वॉर क्राइम का आरोप लगाया गया है।

बूचा के निवासी ने बताया- रूसी सैनिकों ने वहां पहुंचने पर दस्तावेज मांगे। अगर उन्हें थोड़ा भी खतरा नजर आता तो नागरिकों को गोली मार दी जाती। रूसी सैनिकों ने आर्मी टैटू की तलाश में कई लोगों के जबरन कपड़े भी उतरवा दिए। हालांकि रूस ने इन आरोपों से इनकार किया है। सैटेलाइट तस्वीरों को लेकर रूस का कहना है कि यूक्रेन लोगों की हत्या का नाटक कर रहा है।

मिलिट्री मेडल से सम्मानित है कमांडर

19 मार्च की इस सैटेलाइट इमेज में लाल रंग से मार्क की गई जगहों पर यूक्रेनी सैनिकों को नागरिकों की लाशें देखने को मिलीं। इस दौरान बूचा शहर रूसी सेना के कब्जे में था।
19 मार्च की इस सैटेलाइट इमेज में लाल रंग से मार्क की गई जगहों पर यूक्रेनी सैनिकों को नागरिकों की लाशें देखने को मिलीं। इस दौरान बूचा शहर रूसी सेना के कब्जे में था।

अजात्बेक की उम्र करीब 40 साल है। उसे 2014 में रूस के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर दिमित्री बुल्गाकोव ने बेहतरीन काम के लिए मिलिट्री मेडल से सम्मानित भी किया था। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, एक आर्मी कमांडर अपने सैनिकों की ओर से किए गए किसी भी वॉर क्राइम के लिए जिम्मेदार होता है।

बूचा नरसंहार पर आज के 2 बड़े अपडेट्स...

  • भारत ने UNSC की बैठक में बूचा हत्याकांड के जांच की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने यहां नागरिकों के मारे जाने से जुड़ी खबरों को बेहद परेशान करने वाला बताया। उन्होंने कहा- भारत बूचा हत्याओं की निंदा करता है और एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन करता है। हालांकि इस दौरान उन्होंने रूस का नाम नहीं लिया। पूरी खबर यहां पढ़ें..
  • भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि खून बहाकर और मासूमों को मारकर किसी भी समस्या का हल नहीं निकाला जा सकता। रूस और यूक्रेन को बातचीत के जरिए इस समस्या का हल निकालना चाहिए। उन्होंने कहा- अगर भारत इसमें मध्यस्थता करता है तो खुशी होगी।