यूक्रेन पर रूसी हमले का खतरा:सरहद से 20 किमी. दूर पुतिन की फौज तैयार, जंग टालने के लिए अमेरिका-रूस के विदेश मंत्री मिले

जिनेवा/वॉशिंगटन4 महीने पहले

यूक्रेन जंग के मुहाने पर है। रूसी सेनाएं उसकी सीमा से महज 20 किलोमीटर दूर हमले के लिए तैयार नजर आती हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी नाटो देश इस जंग को टालने के लिए भरपूर कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को जिनेवा में रूस और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की बैठक पर नजरें टिकी थीं। ये मीटिंग हुई और नतीजा उम्मीदभरा रहा। मीटिंग के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा- हमने रूस को एक लिखित दस्तावेज दिया है। वो इस पर विचार करेगा और इसके बाद हम फिर बातचीत करेंगे।

वहीं, डर इस बात का है कि अगर रूस किसी वक्त यूक्रेन पर हमला करता है तो यह जंग रूस बनाम पश्चिम हो सकती है। जंग की आशंका देखते हुए ब्रिटेन ने यूक्रेन को एंटी टैंक वेपन्स दे दिए हैं तो कनाडा ने अपनी पैरा ट्रूपर रेजीमेंट यूक्रेन भेज दी है।

एकजुट नहीं है नाटो
न्यूयॉर्क टाइम्स ने दोनों फॉरेन मिनिस्टर्स की मीटिंग से पहले अपनी एक रिपोर्ट में कहा- अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मुलाकात से यह पता लगेगा कि यूरोप में एक नई जंग होती है या इसे टाला जा सकेगा। रूस अब पश्चिम के लिए बड़ा खतरा है। ऐसा लगता है कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच सही कोऑर्डिनेशन नहीं है।

खुद बाइडेन ने गुरुवार रात ‘छोटी घुसपैठ’ शब्द इस्तेमाल करके सहयोगी देशों को असमंजस में डाल दिया। हालांकि, बाद में सफाई दी कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो अमेरिका और सहयोगी आर्थिक तौर पर करारा जवाब देंगे।

यूक्रेन की सेना ने 2018 में एक परेड में अपने हथियारों का प्रदर्शन किया था।
यूक्रेन की सेना ने 2018 में एक परेड में अपने हथियारों का प्रदर्शन किया था।

ज्यादा उम्मीदें नहीं
अमेरिकी अधिकारियों को लावरोव-ब्लिंकन मुलाकात से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं। पिछले हफ्ते तीन अमेरिकी डिप्लोमैट्स ने रूस के अफसरों से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्हें लगता है कि विवाद खत्म होने की गुंजाइश काफी कम है। रूस साफ तौर पर कह रहा है कि नाटो को यह वादा करना होगा कि यूक्रेन नाटो का हिस्सा नहीं बनेगा और अमेरिका या उसके सहयोगी इस क्षेत्र में पैर नहीं पसारेंगे। साथ ही यह भी कि अमेरिका यहां से अपने तमाम न्युक्लियर वेपन्स हटा लेगा। खुद रूस के विदेश मंत्री मान चुके थे कि ब्लिंकन से उनकी बातचीत से ज्यादा उम्मीदें नहीं की जानी चाहिए। ब्लिंकन ने भी गुरुवार को कहा था- यह ठीक है, लेकिन बातचीत के रास्ते तो खुले रखने चाहिए।

क्रीमिया की जंग में तबाह यूक्रेन के एक सैन्य ठिकाने की तस्वीर।
क्रीमिया की जंग में तबाह यूक्रेन के एक सैन्य ठिकाने की तस्वीर।

यूक्रेन तो बहाना, मामला अमेरिका बनाम रूस
ब्लिंकन ने बुधवार को कहा था- रूस की कुछ बातों पर तो विचार तक नहीं किया जा सकता। हम आर्म्स कंट्रोल और मिलिट्री एक्सरसाइज पर बात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि शुक्रवार को मुलाकात के बाद ब्लिंकन और लावरोव दोनों मीडिया से खुलकर बात करेंगे। रूस जोर देकर कह रहा है कि अमेरिकी अधिकारियों को लिखित वादे करने होंगे। ब्लिंकन कहते हैं कि वे इस पर विचार तो कर सकते हैं, लेकिन वादा नहीं।

ब्लिंकन जिनेवा आने से पहले जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर चुके हैं। इसके बाद वो गुरुवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति से मिले। अमेरिका ने यूक्रेन को 6 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद भी मुहैया कराई है।

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