संयुक्त राष्ट्र / कश्मीर मुद्दे पर चीन ने दिया पाक का साथ, यूएन से गुप्त बैठक कराने का अनुरोध किया



पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (बाएं) और चीन के विदेश मंत्री वांग यी। (फाइल) पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (बाएं) और चीन के विदेश मंत्री वांग यी। (फाइल)
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पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (बाएं) और चीन के विदेश मंत्री वांग यी। (फाइल)पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (बाएं) और चीन के विदेश मंत्री वांग यी। (फाइल)

  • यूएनएससी की अध्यक्ष जोआना रोनेका ने बताया कि बैठक में शुक्रवार तक का समय लग सकता है
  • चीन ने यूएनएससी से बंद कमरे में बैठक कराने का औपचारिक निवेदन किया
  • रूस ने भारत का समर्थन करते हुए कहा था कि कश्मीर पर उठाया गया कदम संवैधानिक था

Dainik Bhaskar

Aug 15, 2019, 12:51 PM IST

न्यूयॉर्क. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के भारत के फैसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में चर्चा होने की संभावना है। यूएनएससी की अध्यक्ष जोआना रोनेका ने बुधवार को बताया कि भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लिए जाने के बाद चीन ने इस सत्र को कराने का अनुरोध किया था। चीन परिषद का स्थायी सदस्य है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यूएनएससी की बैठक शुक्रवार को होगी।

 

रोनेका ने बताया कि इस सत्र का आयोजन शुक्रवार 16 अगस्त को हो सकता है। इससे पहले पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत के कश्मीर को लेकर लिए गए निर्णय पर तत्काल एक सत्र कराने का अनुरोध किया था। चीन ने पाक का साथ देते हुए इस मामले पर गुप्त बैठक की बात कही।

 

भारत का कदम संवैधानिक: रूस

चीन की यात्रा से लौटने के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा था कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने यूएनएससी में पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया था। दूसरी तरफ परिषद के एक और स्थायी सदस्य रूस ने भारत के कदम को संवैधानिक बताया था। उसने कहा था कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसी तरह से सुलझाया जाना चाहिए। संयुक्त अरब अमीरात ने भी इसे भारत का आंतरिक मामला कहा था। 

 

किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन नहीं किया: भारत

पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की लगातार कोशिश करता रहा है और वह इस मामले में विश्व समुदाय को शामिल करने का प्रयास करता रहा है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत के अनुच्छेद 370 हटाने के कदम से न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय शांति को खतरा उत्पन्न हुआ है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया था कि यह उसका आंतरिक मामला है और उसने किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया है।

 

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