अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी का ताइवान दौरा:US के 24 फाइटर जेट्स ने दिया सिक्योरिटी कवर; चीन ने कहा- मिलिट्री एक्शन जरूर लेंगे

वॉशिंगटन/बीजिंग/सिंगापुर17 दिन पहले

अमेरिकी संसद के निचले सदन (भारत में लोकसभा की तरह) हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी मंगलवार को ताइवान की राजधानी ताईपेई पहुंचीं। अमेरिकी नेवी और एयरफोर्स के 24 एडवांस्ड फाइटर जेट्स ने नैंसी के प्लेन को एस्कॉर्ट किया।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने पिछले दिनों कहा था कि अगर पेलोसी का प्लेन ताइवान की तरफ गया तो उसे उड़ाया जा सकता है। बाद में ये भी कहा गया कि चीनी एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट पेलोसी के विमान को घेर लेंगे।

चीन की फिर धमकी
पेलोसी के ताइवान पहुंचने के बाद चीन ने फिर अमेरिका को धमकी दी। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, चीन ने कहा- हम टारगेटेड मिलिट्री एक्शन जरूर लेंगे। हालांकि, यह साफ नहीं किया गया कि चीन किन टारगेट पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहा है। इसके पहले अमेरिका, ताइवान और चीन तीनों ने अपनी फौजों को कॉम्बेट रेडी (जंग के लिए तैयार) रहने को कहा था। तीनों देशों ने फौज के लिए हाईअलर्ट जारी कर दिया था।

यह फोटो मंगलवार रात ताइवान की फॉरेन मिनिस्ट्री ने जारी किया। इसके कैप्शन में कहा गया- अमेरिका की हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी का ताईपेई में वेलकम करते हैं।
यह फोटो मंगलवार रात ताइवान की फॉरेन मिनिस्ट्री ने जारी किया। इसके कैप्शन में कहा गया- अमेरिका की हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी का ताईपेई में वेलकम करते हैं।

पेलोसी बोलीं- अमेरिका ताइवान की डेमोक्रेसी के समर्थन में, चीन ने कहा- आग से खेलना बंद करे US

सीधा टकराव नहीं चाहता चीन
‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआत में कुछ झिझक दिखाने के बाद अब जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ने चीन से सीधे निपटने के लिए तैयारी कर ली। पेलोसी के एयरक्राफ्ट को रोकने की हिम्मत चीन नहीं कर पाया।

कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन ने सिर्फ धमकी दी थी। वो ऐसी कोई हिमाकत नहीं करेगा जिससे अमेरिका से सीधा टकराव तय हो जाए। इसकी वजह यह है कि इस क्षेत्र में अब अमेरिका भी बेहद ताकतवर हो चुका है।

ताइवान और अमेरिका भी तैयार
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ताइवान की सेनाएं चीन से निपटने के लिए तैयारी कर चुकी हैं। अमेरिकी नेवी के 4 वॉरशिप हाईअलर्ट पर हैं और ताइवान की समुद्री सीमा में गश्त कर रहे हैं। इन पर एफ-16 और एफ-35 जैसे हाईली एडवांस्ड फाइटर जेट्स और मिसाइलें मौजूद हैं। रीपर ड्रोन और लेजर गाइडेड मिसाइलें भी तैयार हैं। अगर चीन की तरफ से कोई हिमाकत की गई तो अमेरिका और ताइवान उस पर दोनों तरफ से हमला कर सकते हैं।

कहा जा रहा है कि चीन ने कार्रवाई के लिए लॉन्ग रेंज हुडोंग रॉकेट और टैंक तैयार रखे हैं। उसके पास ताइवान स्ट्रेट में दूसरे मिलिट्री इंस्टॉलेशन्स भी हैं। इनका इस्तेमाल वो कर सकता है। अमेरिकी फौज की इन हरकतों पर पैनी नजर है। USS रोनाल्ड रीगन वॉरशिप और असॉल्ट शिप हाईअलर्ट पर हैं।

अमेरिकी सैनिक ताइवान में
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पेलोसी के दौरे के कई दिन पहले ही अमेरिका के कई सैनिक और मिलिट्री टेक्निकल एक्सपर्ट ताइवान पहुंच चुके हैं। मिलिट्री टर्मिनोलॉजी में इसे बूट ऑन ग्राउंड कहा जाता है। दरअसल, अमेरिका अब यह तय कर चुका है कि साउथ चाइना सी या ताइवान स्ट्रेट में चीन की दादागीरी पर लगाम कसनी ही होगी।

अमेरिका ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि उसके सैनिक ताइवान में मौजूद हैं या नहीं। पिछले हफ्ते जब पेंटागन के प्रवक्ता से इस बारे में सवाल किया गया था तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था।

यह फोटो 10 मई 2017 का है। तब नैंसी पेलोसी ने भारत के धर्मशाला में तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा से मुलाकात की थी। चीन दलाई लामा को भगोड़ा अपराधी करार देता है। चीन के उईगर मुस्लिमों, हॉन्गकॉन्ग में तानाशाही कानून और थिएनमेन स्क्वायर नरसंहार को लेकर पेलोसी कई बार चीन को फटकार लगा चुकी हैं।
यह फोटो 10 मई 2017 का है। तब नैंसी पेलोसी ने भारत के धर्मशाला में तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा से मुलाकात की थी। चीन दलाई लामा को भगोड़ा अपराधी करार देता है। चीन के उईगर मुस्लिमों, हॉन्गकॉन्ग में तानाशाही कानून और थिएनमेन स्क्वायर नरसंहार को लेकर पेलोसी कई बार चीन को फटकार लगा चुकी हैं।

चीन की फिर धमकी
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को फिर अमेरिका को धमकी दी। कहा- वो अमेरिकी जो पेलोसी की विजिट पर सियासत कर रहे हैं। वो आग से खेल रहे हैं। उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। इस बीच, इंटरनेट पर लाखों लोग ऑनलाइन ट्रैकर के जरिए यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कुआलालम्पुर से निकलने के बाद पेलोसी का एयरक्राफ्ट कब ताईपेई पहुंचेगा।

ताइवान पर तनातनी क्यों?
चीन वन-चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश की तरह देखता है। चीन का लक्ष्‍य ताइवान को उनकी राजनीतिक मांग के आगे झुकने और चीन के कब्‍जे को मानने के लिए ताइवान को मज‍बूर करने का रहा है।

इधर, अमेरिका भी वन चाइना पॉलिसी को मानता है, लेकिन ताइवान पर चीन का कब्जा नहीं देख सकता। बाइडेन ने 2 महीने पहले कहा था- हम वन चाइना पॉलिसी पर राजी हुए, हमने उस पर साइन किया, लेकिन यह सोचना गलत है कि ताइवान को बल के प्रयोग से छीना जा सकता है। चीन का ये कदम न केवल गलत होगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को एक तरह की नई जंग में झोंक देगा।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पेलोसी के दौरे के कई दिन पहले ही अमेरिका के कई सैनिक और मिलिट्री टेक्निकल एक्सपर्ट ताइवान पहुंच चुके हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पेलोसी के दौरे के कई दिन पहले ही अमेरिका के कई सैनिक और मिलिट्री टेक्निकल एक्सपर्ट ताइवान पहुंच चुके हैं।