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ट्रम्प की राह पर बाइडेन:अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में वॉरशिप तैनात किया, ताइवान की मदद के लिए तैयार बाइडेन

वॉशिंगटन4 महीने पहले
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फोटो पिछले साल नवंबर की है। तब चीन के एंटी सबमरीन एयरक्राफ्ट ने ताइवान के एयर स्पेस में उड़ान भरी थी। इसके बाद अमेरिका ने यहां अपने फाइटर जेट्स भेज दिए थे। - Dainik Bhaskar
फोटो पिछले साल नवंबर की है। तब चीन के एंटी सबमरीन एयरक्राफ्ट ने ताइवान के एयर स्पेस में उड़ान भरी थी। इसके बाद अमेरिका ने यहां अपने फाइटर जेट्स भेज दिए थे।

दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में ताइवान को धमकाने के लिए चीन के फाइटर जेट्स ने शनिवार से सोमवार तक उड़ान भरी। जवाब में ताइवान ने एयर डिफेंस मिसाइलें तैनात कर दीं। अब अमेरिका ने यहां अपना एडवांस्ड वॉरशिप रूजवेल्ट तैनात कर दिया है। अमेरिका के इस कदम से साफ हो जाता है कि जो बाइडेन भी चीन के मामले में उसी रास्ते पर चलेंगे जो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनाया था।

इलाके में तनाव
अमेरिका में नई सरकार आने के बाद चीन ने अचानक दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियां बढ़ा दीं। शनिवार से सोमवार तक उसमें फाइटर जेट्स ने ताइवान के एयर स्पेस में उड़ान भरी। ताइवान ने एयर डिफेंस मिसाइलें तैनात कर दीं। अमेरिका ने चीन के इरादे भांपते हुए वहां फिलिपींस और ऑस्ट्रेलिया के रास्ते अपना एडवांस्ड वॉरशिप थियोडोर रूजवेल्ट तैनात कर दिया। कुछ घंटे बाद वॉर कार्गो (C-2A Greyhound cargo aircraft) भी यहां पहुंच गया। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा- हम हालात पर नजर रख रहे हैं। चीन हालात बिगाड़ने की कोशिश न करे। ताइवान की हर कीमत पर रक्षा की जाएगी।

क्या चाहता है चीन
शनिवार को चीन ने 13 जबकि रविवार को 15 फाइटर जेट्स ताइवान के एयर स्पेस में भेजे थे। defensenews वेबसाइट के मुताबिक, चीन यह देखने की कोशिश कर रहा है कि बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन साउथ चाइना सी और ताइवान के मुद्दे पर किस हद तक कदम उठाएगी। चीन यहां इंटेलिजेंस गैदरिंग के लिए ड्रोन भी भेज रहा है।

ट्रम्प ने अपनाया था सख्त रुख
बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ने अभी सिर्फ एक वॉरशिप दक्षिण चीन सागर में भेजा है। जब ट्रम्प राष्ट्रपति थे तब अमेरिका ने दो वॉरशिप इस इलाके में तैनात कर दिए थे। कई मौकों पर तो चीन और अमेरिका के वॉरशिप आमने-सामने थे। अमेरिका के कुछ एयरक्राफ्ट्स ने चीन के सीमाई इलाकों में उड़ान भी भरी थी।

चीन सिर्फ इशारा समझ ले
ट्रम्प के दौर में अमेरिका ने ताइवान में तेजी से दखल बढ़ाया। दोनों देशों के बीच फाइटर जेट्स और सबमरीन को लेकर समझौते हुए। अब जबकि बाइडेन सत्ता में आए हैं तो उन्होंने एक कदम आगे बढ़ाया। उनके शपथ ग्रहण समारोह में ताइवान के एम्बेसेडर भी शामिल हुए। खास बात यह है कि 42 (1979 के बाद) साल में यह पहला मौका था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में ताइवान का प्रतिनिधी शामिल हुआ।

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