चीन को झटका / ट्रम्प ने हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र का समर्थन किया, अमेरिका पुलिस को प्रदर्शन रोकने वाले हथियार नहीं भेजेगा 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। (फाइल) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। (फाइल)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। (फाइल)अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। (फाइल)

  • ट्रम्प ने हाॅन्गकॉन्ग में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकरियों के पक्ष में दो विधेयकों पर हस्ताक्षर किए
  • अमेरिका अब हॉन्गकॉन्ग को दिए गए विशेष दर्जे की समीक्षा करेगा, इसके तहत ट्रम्प प्रशासन वहां के हालात भी परखेगा

दैनिक भास्कर

Nov 28, 2019, 10:29 AM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र समर्थकों के पक्ष में लाए गए ‘मानवाधिकार और लोकतंत्र विधेयक’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके जरिए अब अमेरिका हॉन्गकॉन्ग की स्वायत्ता की समीक्षा करेगा। इसके बाद फैसला होगा कि अमेरिका की तरफ से हॉन्गकॉन्ग को दिया विशेष दर्जा बनाए रखना है या नहीं। अमेरिका का यह कदम चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, हॉन्गकॉन्ग अपने विकसित आधारभूत ढांचे की वजह से चीन के लिए एक अहम व्यापार केंद्र है। ऐसे में उसके विशेष दर्जे की समीक्षा चीन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। 

चीन ने इसे अमेरिका के बुरे इरादे कहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का फैसला चीन के मामलों में हस्तक्षेप है और वह इसमें कभी सफल नहीं होगा। हॉन्गकॉन्ग की बीजिंग समर्थित सरकार ने कहा है कि अमेरिका की इस नीति से हॉन्गकॉन्ग के हालात संभलने की जगह बिगड़ सकते हैं। 

हॉन्गकॉन्ग पुलिस को हथियार नहीं भेजेगा अमेरिका

ट्रम्प ने हॉन्गकॉन्ग पुलिस को दी जाने वाली मदद रोकने से जुड़े एक विधेयक पर भी हस्ताक्षर किए। इसके तहत अब अमेरिका वहां की पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने वाले हथियार नहीं भेजेगा। इनमें आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां और स्टन गन शामिल हैं। ट्रम्प ने विधेयकों पर हस्ताक्षर के बाद कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि चीन और हॉन्गकॉन्ग के प्रतिनिधि अपने विवादों को सुलझाएंगे, जिससे शांति स्थापित होगी।


मानवाधिकार और लोकतंत्र कानून से चीन को क्या परेशानी?
अमेरिकी सांसदों के समूह ने हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन शुरू होने के बाद मानवाधिकार और लोकतंत्र विधेयक पेश किया था। इसमें कहा गया है कि हॉन्गकॉन्ग चीन का हिस्सा है, लेकिन शहर कानून और आर्थिक मामलों में काफी अलग है। सालाना समीक्षा के जरिए आने वाले समय में यह पता लगाया जाएगा कि चीन ने हॉन्गकॉन्ग के आधारभूत कानून का किस हद तक उल्लंघन किया है और नागरिक स्वायत्ता और कानून के राज को कितना कम किया है। इसके बाद हॉन्गकॉन्ग के विशेष दर्जे को कायम रखने पर विचार किया जाएगा।

चीन की परेशानी इसी विशेष दर्जे को लेकर है। हॉन्गकॉन्ग के विशेष दर्जे का मतलब है कि उस पर अमेरिका के किसी भी प्रतिबंध और शुल्क का प्रभाव नहीं पड़ता। जबकि चीन को अमेरिका की तरफ से कोई छूट नहीं मिलती। नए कानून के तहत हॉन्गकॉन्ग में गिरफ्तार हुए प्रदर्शनाकरियों को अमेरिकी वीजा दिए जाने का भी प्रावधान है। 

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